राहुल गांधी का आरोप- मेक इन इंडिया फेल, चीन से हम 10 साल पीछे, 'ड्रैगन' ने 4000 स्क्वायर KM भारतीय जमीन पर किया कब्जा

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, लेकिन सरकार इसके प्रति सजग नहीं है. उन्होंने पब्लिक स्कूल स्तर से ही बैट्री और इंजन की पढ़ाई शुरू करने की वकालत की और कहा कि चीन इस क्षेत्र में हमसे दस साल आगे है.

अमेरिका दौरे पर विदेश मंत्री का ज़िक्र

राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अमेरिका दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि भारत अपने प्रधानमंत्री को न्यौता लाने के लिए अमेरिका नहीं भेजता. इस बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई और कहा कि विपक्ष को गंभीर विषयों पर जिम्मेदारी से बयान देना चाहिए.

इस पर राहुल गांधी ने सफाई देते हुए कहा कि यदि उनके बयान से कोई विचलित हुआ हो तो वह माफी मांगते हैं. उन्होंने कहा कि जयशंकर को तीन बार अमेरिका भेजा गया, लेकिन इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला.

चीन के कब्जे का मुद्दा

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चीन ने भारत की 4000 स्क्वायर किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इस बात को खारिज करते हैं, जबकि भारतीय सेना ने खुद इसकी पुष्टि की है. उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह के बयान देश के हित में नहीं हैं.

स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से अपनी बातों को तथ्यात्मक रूप से सदन में रखने को कहा. इसके जवाब में राहुल गांधी ने सेना प्रमुख के बयान का हवाला देते हुए कहा कि चीन भारत की जमीन पर कब्जा कर चुका है और यह एक सच्चाई है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन की सफलता का कारण उसका मजबूत "वॉर इंडस्ट्रियल सिस्टम" है, जिसमें भारत बहुत पीछे है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिति

राहुल गांधी ने दावा किया कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पिछले 60 सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. उन्होंने "मेक इन इंडिया" अभियान का ज़िक्र करते हुए अपने फोन को दिखाया और कहा कि यह भले ही भारत में असेंबल किया गया हो, लेकिन इसके अधिकतर पार्ट्स चीन से आए हैं.

उन्होंने कहा कि भारत में खपत पर ध्यान दिया गया, लेकिन उत्पादन पर नहीं, जिससे असमानता बढ़ी है. उन्होंने बताया कि विश्व अब पेट्रोलियम से बैट्री और परमाणु ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है, लेकिन भारत इस बदलाव को अपनाने में पीछे रह गया है. उन्होंने 1980 के दशक में हुई कंप्यूटर क्रांति का उदाहरण देते हुए कहा कि तब सरकार ने सही निर्णय लिया था, जिससे भारत को फायदा हुआ.

एआई और डेटा पर चिंता

राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एआई पूरी तरह डेटा पर निर्भर है. उन्होंने सवाल उठाया कि भारत के पास खुद का डेटा नहीं है, जिससे एआई या तो चीन या अमेरिका का डेटा इस्तेमाल करेगा. उन्होंने कहा कि यदि भारत को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो उसे अपने डेटा प्रबंधन और एआई अनुसंधान पर ध्यान देना होगा.

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया

राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर भी निशाना साधा और कहा कि इसमें कोई नई बात नहीं थी. उन्होंने कहा कि यदि इंडिया ब्लॉक की सरकार होती, तो अभिभाषण में बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं पर चर्चा होती. उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए और एनडीए दोनों ही सरकारें युवाओं को रोजगार देने में असफल रही हैं.

उन्होंने "मेक इन इंडिया" को एक अच्छा विचार बताया, लेकिन कहा कि इसे लागू करने में सरकार विफल रही है. उन्होंने साफ किया कि उनकी मंशा प्रधानमंत्री पर सीधा आरोप लगाने की नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियों में खामियों को उजागर करना है.

राहुल गांधी के इन बयानों ने लोकसभा में तीखी बहस को जन्म दिया. उनके आरोपों पर सत्ता पक्ष ने नाराजगी जताई, जबकि विपक्ष ने उनका समर्थन किया. यह स्पष्ट है कि भारत को तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में मजबूत होने के लिए नई नीतियों और ठोस कार्ययोजना की जरूरत है.