चीनी खतरे के बीच भारत और न्यूजीलैंड ने शुरू की रणनीतिक साझेदारी
अपनी तीन देशों की यात्रा के आखिरी चरण में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न्यूजीलैंड पहुंचे हुए हैं.
अपनी तीन देशों की यात्रा के आखिरी चरण में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न्यूजीलैंड पहुंचे हुए हैं. इस दौरान भारत और न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की गई है.न्यूजीलैंड और भारत ने शनिवार को रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की. यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान हुई. यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पिछले 40 वर्षों में पहली न्यूजीलैंड यात्रा है. प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने माओरी परंपरा से मोदी का स्वागत किया. मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया.
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि वो भारत के साथ संबंध मजबूत करना चाहते हैं. अप्रैल में दोनों देश मुक्त व्यापार समझौता कर चुके हैं. लक्सन ने इसे आर्थिक विकास के लिए अहम कदम बताया. हालांकि इस समझौते को अभी संसदीय मंजूरी मिलनी बाकी है.
नरेन्द्र मोदी की यह यात्रा भी उनकी 6 से 11 जुलाई तक चली तीन देशों की यात्रा का हिस्सा है. इस दौरान वह इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलियाभी गए. यह दौरा क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच हुआ. चीन ने सोमवार को ही प्रशांत महासागर इलाके में मिसाइल परीक्षण किया था.
रक्षा पर साथ काम करेंगे दोनों देश
भारत, प्रशांत महासागर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका बढ़ा रहा है. इसमें चीन की बढ़ती मौजूदगी भी चर्चा में रही है. नरेन्द्र मोदी ने न्यूजीलैंड के साथ साझेदारी को महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया. उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा आधार कहा. ऑकलैंड में दोनों नेताओं की विस्तृत वार्ता हुई. इस दौरान रिश्तों में नई ऊर्जा लाने पर जोर दिया गया.
दोनों देशों के बीच हुए समझौते में रक्षा सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है. कहा गया है कि नौसैनिक अभ्यासों को मजबूत किया जाएगा. व्यापार और कूटनीतिक संबंध भी गहरे करने की बात कही गई है. वहीं विज्ञान, संस्कृति और खेल सहयोग भी बढ़ाने का जिक्र है. हालांकि जानकारों के मुताबिक पर्यटन के क्षेत्र में भी न्यूजीलैंड भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करना चाहता है. देश लंबे समय से दुनियाभर के पर्यटकों को लुभाता रहा है.
‘चीनी आक्रामकता' से निपटने की तैयारी
संयुक्त बयान में हिंद-प्रशांत इलाके का जिक्र हुआ. दोनों देशों ने मुक्त और सुरक्षित क्षेत्र का समर्थन किया. समृद्ध और शांतिपूर्ण क्षेत्रीय व्यवस्था पर जोर दिया. साझा हितों की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई गई. बातचीत में चीनी मिसाइल परीक्षण पर भी चर्चा हुई. लक्सन ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस बात की पुष्टि की. उन्होंने चीन को लेकर सीधी टिप्पणी नहीं की लेकिन साझेदारियों के विस्तार की जरूरत बताई.
क्रिस्टोफर लक्सन ने न्यूजीलैंड को व्यापारिक देश बताया. उन्होंने देश को समुद्री देश भी कहा. समान मूल्यों वाले साझेदार देशों की जरूरत की बात भी कही. उन्होंने उभरती क्षेत्रीय व्यवस्थाओं का समर्थन किया. पीएम लक्सन ने भारत के साथ संबंध विस्तार को बहुस्तरीय सहयोग बताया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा से समृद्धि को बढ़ावा मिलता है. क्षेत्रीय साझेदारियां इसी दिशा में मददगार हैं.
भारतीय मूल के लोगों से मिले मोदी
ऑकलैंड के स्पार्क एरिना में बड़ा आयोजन हुआ. इसमें दस हजार से ज्यादा लोग पहुंचे. अधिकांश लोग भारतीय मूल के समुदाय से थे. न्यूजीलैंड में करीब तीन लाख भारतीय रहते हैं. हालांकि इस स्टेडियम के बाहर सिख समूहों ने नरेंद्र मोदी के पुतले के साथ प्रदर्शन किया. उन्होंने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए और उन्होंने पीएम मोदी को हिंदू राष्ट्रवाद का चेहरा बताया.
हालांकि सिख समूहों के विरोध में मोदी समर्थक भी आ गए. समर्थकों ने "मोदी, मोदी” के नारे लगाए. दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए तो पुलिस ने हस्तक्षेप कर दूरी बनाई.
आम चुनावों में भारतीय आप्रवासी बने मुद्दा
नवंबर में न्यूजीलैंड में आम चुनाव होने हैं. पीएम क्रिस्टोफर लक्सन व्यापार समझौते का प्रचार कर रहे हैं. वह रोजगार और निवेश लाभों पर जोर दे रहे हैं. उन्होंने आर्थिक अवसरों को प्रमुख मुद्दा बनाया हुआ है.
हालांकि न्यूजीलैंड में मुक्त व्यापार समझौते का विरोध भी हुआ है. आसान वीजा और आप्रवासन नियमों पर विवाद हुआ है. कुछ समूहों ने इन बदलावों पर चिंता जताई है. भारतीय छात्रों और कामगारों के आने के नियम आसान बनाने का विरोध हुआ है.
इन बदलावों के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन की 'न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी' ने आलोचना की. पार्टी नेताओं ने समझौते के कुछ हिस्सों का विरोध किया. सांसद शेन जोन्स की विवादित टिप्पणी पर विवाद बढ़ गया. उन्होंने भारतीय आप्रवासन नियमों पर आपत्ति जताई थी. भारतीय समुदाय के एक नेता ने इस पर प्रतिक्रिया दी और इस टिप्पणी को सीधा-सीधा नस्लवाद बताया.