PM-Kisan Yojana: किसान सम्मान निधि योजना बनी गुजरात के 69 लाख से ज्यादा किसान परिवारों की आर्थिक जीवनरेखा, 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की मिली सहायता
सरकार ने योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग किया है. 12वीं किस्त से भूमि रिकॉर्ड सत्यापन (Land Seeding), 13वीं किस्त से आधार और बैंक खाते की लिंकिंग तथा DBT को अनिवार्य किया गया. वहीं 15वीं किस्त से ई-केवाईसी (e-KYC) भी जरूरी कर दिया गया. इस तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म कर दी है.
PM-Kisan Yojana: गुजरात में कृषि परिवर्तन और किसान सशक्तिकरण की दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan Yojana) राज्य के लाखों किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच बनकर उभरी है. योजना की शुरुआत से अब तक गुजरात के 69.25 लाख से अधिक किसान परिवारों को 22 किस्तों के माध्यम से 23,083 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है. PM Kisan Yojana 23rd Installment Update: पीएम किसान योजना की अगली किस्त की तैयारी शुरू, e-KYC अनिवार्य; न करने पर रुक सकती है किस्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह योजना किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने वाली सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में गिनी जा रही है. राष्ट्रीय स्तर पर भी इस योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक किसानों को 4.27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता प्रदान की जा चुकी है.
गुजरात में योजना की पहली किस्त के दौरान 28.65 लाख से अधिक किसानों को 572.21 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी. वहीं अब 22वीं किस्त तक पहुंचते-पहुंचते लाभार्थी किसानों की संख्या बढ़कर 69.25 लाख से अधिक हो गई है. हाल ही में जारी 22वीं किस्त के तहत राज्य के 50.54 लाख से अधिक किसान परिवारों के खातों में 1,010 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे ट्रांसफर की गई.
किसानों को मिल रही बड़ी राहत
गुजरात के कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है. इस सहायता से छोटे और सीमांत किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए समय पर वित्तीय सहयोग मिल रहा है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसानों को बीज, खाद और कीटनाशकों की खरीद के लिए अक्सर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था. कई किसानों को साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था. लेकिन अब हर चार महीने में मिलने वाली 2,000 रुपये की किस्त खेती के खर्चों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है.
गांधीनगर जिले के दशेला गांव के किसान गोविंदभाई पटेल ने बताया कि सरकार द्वारा हर साल सीधे खाते में जमा की जाने वाली तीन किस्तें उन्हें खाद, बीज और कृषि दवाओं की खरीद में मदद करती हैं. इससे मूंगफली और कपास जैसी फसलों की खेती करना आसान हो गया है.
वहीं किसान रमेशभाई पटेल का कहना है कि यह योजना मजदूरी, डीजल और रखरखाव जैसे छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने में किसानों के लिए बड़ा सहारा साबित हो रही है.
DBT के जरिए पारदर्शी व्यवस्था
योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बिचौलियों या भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है. पूरी सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है.
सरकार ने योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग किया है. 12वीं किस्त से भूमि रिकॉर्ड सत्यापन (Land Seeding), 13वीं किस्त से आधार और बैंक खाते की लिंकिंग तथा DBT को अनिवार्य किया गया. वहीं 15वीं किस्त से ई-केवाईसी (e-KYC) भी जरूरी कर दिया गया. इस तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म कर दी है और यह सुनिश्चित किया है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे.