Expired Maggi Case: एक्सपायर्ड मैगी बेचने पर विशाल मेगा मार्ट को बड़ा झटका, फूड पॉइजनिंग के बाद कोर्ट ने लगाया 2.8 लाख रुपये का जुर्माना
आयोग ने विशाल मेगा मार्ट को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 25,000 रुपये मानसिक पीड़ा (Mental Agony) के लिए और 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करे. इसके अलावा आयोग ने 2.50 लाख रुपये दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) के रूप में आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने का भी निर्देश दिया.
Expired Maggi Case: आंध्र प्रदेश के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Commission) ने एक्सपायर्ड मैगी बेचने के मामले में विशाल मेगा मार्ट (Vishal Mega Mart) पर सख्त कार्रवाई की है. आयोग ने रिटेल चेन को 2.80 लाख रुपये का जुर्माना और मुआवजा देने का आदेश दिया है. आयोग ने कहा कि एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद बेचना उपभोक्ताओं के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इससे लोगों की सेहत को बड़ा खतरा हो सकता है.
एक्सपायर्ड मैगी खाने के बाद हुई फूड पॉइजनिंग
यह मामला 20 मार्च 2025 का है. कुर्नूल जिले के येम्मिगनूर निवासी पी. श्रवण कुमार ने स्थानीय विशाल मेगा मार्ट स्टोर से मैगी आटा इंस्टेंट नूडल्स के दो पैकेट खरीदे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम मैगी खाने के कुछ समय बाद उन्हें तेज बुखार, उल्टी और पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई. अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें फूड पॉइजनिंग होने की पुष्टि की. बाद में जब उन्होंने दूसरा पैकेट देखा तो पता चला कि उस पर 18 मार्च 2025 की एक्सपायरी डेट थी, जबकि स्टोर ने यह उत्पाद 20 मार्च को बेचा था.
कानूनी नोटिस के बाद भी नहीं मिला जवाब
पीड़ित ने दिसंबर 2025 में विशाल मेगा मार्ट को कानूनी नोटिस भेजकर मुआवजे की मांग की, लेकिन कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया. आयोग ने कंपनी को नोटिस जारी किया, लेकिन विशाल मेगा मार्ट की ओर से न तो कोई प्रतिनिधि पेश हुआ और न ही कोई जवाब दाखिल किया गया.
कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
उपभोक्ता आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूत, जिनमें एक्सपायर्ड मैगी का पैकेट, खरीद की रसीद, डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड और अस्पताल के दस्तावेज शामिल थे, का कंपनी की ओर से कोई खंडन नहीं किया गया. आयोग ने कहा कि एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ बेचना गंभीर लापरवाही और सेवा में स्पष्ट कमी (Deficiency in Service) है.
2.8 लाख रुपये देने का आदेश
आयोग ने विशाल मेगा मार्ट को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 25,000 रुपये मानसिक पीड़ा (Mental Agony) के लिए और 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करे. इसके अलावा आयोग ने 2.50 लाख रुपये दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) के रूप में आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने का भी निर्देश दिया. कोर्ट ने कंपनी को आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया है. यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो बकाया राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 14, 2026 08:39 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

