8th Pay Commission Demands: 8वें वेतन आयोग से पेंशनभोगियों की बड़ी मांग; बेसिक पे बढ़ाने और भत्तों पर निर्भरता घटाने का दिया सुझाव
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है. इसमें वेतन संरचना में भत्तों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने और मूल वेतन का अनुपात बढ़ाने की मांग की गई है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनधारकों को वित्तीय नुकसान न उठाना पड़े.
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8th Pay Commission Demands: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) द्वारा विभिन्न हितधारकों और कर्मचारी संगठनों के साथ परामर्श की प्रक्रिया तेज हो गई है. न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (Retd. Justice Ranjana Prakash Desai) की अध्यक्षता में गठित आयोग क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की शिकायतों व सुझावों का आकलन कर रहा है.
इसी क्रम में 'रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसाइटी' (RSCWS) ने आयोग को एक ज्ञापन सौंपकर सेवानिवृत्ति सुरक्षा, मूल वेतन (Basic Pay) के संतुलन और विभिन्न भत्तों के ढांचे को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग ने अगस्त और सितंबर के बैठकों का शेड्यूल जारी किया; जानें आपके शहर में कब होगी बैठक
भत्तों पर अत्यधिक निर्भरता से पेंशन में नुकसान
RSCWS ने अपने ज्ञापन में कहा है कि मौजूदा वेतन ढांचे में मूल वेतन के बजाय भत्तों पर अत्यधिक निर्भरता का दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है, विशेषकर पेंशनभोगियों पर. चूंकि अधिकांश भत्ते पेंशन की गणना में शामिल नहीं किए जाते, इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की कुल आय में अचानक बड़ी गिरावट आ जाती है.
सोसाइटी ने आयोग से मांग की है कि मूल वेतन और भत्तों के बीच एक संतुलित अनुपात बनाए रखा जाए. उन्होंने तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति के बाद यद्यपि अधिकांश भत्ते बंद हो जाते हैं, लेकिन आवास, स्वास्थ्य देखभाल और परिवहन जैसे बुनियादी खर्च काफी बढ़ जाते हैं.
प्रमुख चिंताएं और प्रस्तावित सिफारिशें
| प्रमुख समस्या | वर्तमान स्थिति / कारण | RSCWS का सुझाव / मांग |
| कम पेंशन बेस | अधिकांश भत्ते पेंशन गणना में शामिल नहीं होते। | बेसिक पे का अनुपात बढ़ाया जाए ताकि पेंशन बेस मजबूत हो। |
| रिटायरमेंट के बाद घटती आय | महंगाई बढ़ती है, लेकिन मुख्य भत्ते बंद हो जाते हैं। | पेंशनभोगियों के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए वेतन ढांचा सुदृढ़ किया जाए। |
| मकान किराया (HRA) | मौजूदा दरें वास्तविक शहरी लागत के अनुरूप नहीं हैं। | वास्तविक जीवन-यापन लागत के आधार पर HRA का समय-समय पर पुनरीक्षण हो। |
| यातायात खर्च (TA) | परिवहन लागत में लगातार वृद्धि हो रही है। | ट्रांसपोर्ट अलाउंस को महंगाई दरों से जोड़ा जाए। |
| कठिन व खतरनाक ड्यूटी | 7वें वेतन आयोग में विलय/समाप्ति से विसंगतियां आईं। | दुर्गम और जोखिम भरे क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के भत्तों की समीक्षा की जाए। |
HRA, TA और भत्तों को महंगाई से जोड़ने की मांग
पेंशनभोगियों के संगठन ने मांग की है कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसे प्रमुख भत्तों की आवधिक समीक्षा की जानी चाहिए. इसके अलावा, भत्तों के मूल्य में गिरावट को रोकने के लिए इन्हें आधिकारिक महंगाई सूचकांक से सीधे जोड़ने का सुझाव दिया गया है ताकि दो वेतन आयोगों के अंतरिम काल में इनकी क्रय शक्ति प्रभावित न हो.
संगठन ने 7वें वेतन आयोग के दौरान कतिपय भत्तों के विलय या समाप्ति से तकनीकी व विशेषज्ञ भूमिकाएं निभाने वाले कर्मचारियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है.
परामर्श का आगामी कार्यक्रम
8वां वेतन आयोग पूरे देश में हितधारकों के साथ विचार-विमर्श जारी रखे हुए है. दिल्ली, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बैठकों के बाद आगामी सघन चर्चाएं नई दिल्ली में निर्धारित हैं, जिसके बाद चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ में क्षेत्रीय सत्र आयोजित किए जाएंगे.
आयोग द्वारा अपनी अंतिम और विस्तृत सिफारिशें मध्य-2027 (Mid-2027) तक केंद्र सरकार को सौंपे जाने की संभावना व्यक्त की गई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 05, 2026 08:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

