अरब सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टकराया पाकिस्तानी जहाज; भारत ने पाक राजनयिक को तलब कर दर्ज कराया कड़ा विरोध
उत्तरी अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत से पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज टकरा गया. सरकारी सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी जहाज ने तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आकर बेहद असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से युद्धाभ्यास (मैन्युवर) किया, जिसके कारण दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई.
नई दिल्ली: उत्तरी अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मंगलवार की शाम एक गंभीर नौसैनिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां नियमित निगरानी अभियान पर तैनात भारतीय नौसेना (Indian Navy) के एक युद्धपोत से पाकिस्तानी नौसेना का जहाज टकरा गया. भारतीय अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तानी पोत ने अत्यधिक तेज गति से भारतीय पोत के करीब आकर खतरनाक और गैर-पेशेवर तरीके से युद्धाभ्यास किया, जिसके कारण यह टक्कर हुई.
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में घटी और गनीमत यह रही कि इसमें भारतीय युद्धपोत को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा और न ही कोई हताहत हुआ. घटना के तुरंत बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजनयिक स्तर पर इस मामले को उठाया है. यह भी पढ़ें: Indonesia's Anak Krakatau Erupts: इंडोनेशिया में फटा अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी, 50 हजार फीट तक उठी राख; सैकड़ों उड़ानें रद्द
पाकिस्तानी जहाज का गैर-पेशेवर आचरण बना टकराव की वजह
ANI News की रिपोर्ट के अनुसार, 15 सितंबर 2026 की शाम को भारतीय नौसेना का अग्रिम पंक्ति का युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में सामान्य गश्त पर था.
- अचानक तेज रफ्तार से आया पोत: पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सामान्य नौवहन प्रोटोकॉल की अनदेखी करते हुए तेज गति से भारतीय युद्धपोत की ओर बढ़ना शुरू किया.
- असुरक्षित मैन्युवरिंग: पाकिस्तानी जहाज ने सुरक्षित दूरी बनाए रखने के बजाय खतरनाक तरीके से दिशा बदली, जिसके परिणामस्वरूप दोनों नौसैनिक जहाजों के बीच टक्कर हो गई.
- भारतीय रक्षा और विदेश मंत्रालय ने इस कृत्य को समुद्र में नौसैनिक इकाइयों के आचरण के लिहाज से पूरी तरह अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर करार दिया है.
भारत ने पाकिस्तानी राजनयिक को किया तलब, दर्ज कराया कड़ा विरोध
मामले की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी (चार्ज डी'अफेयर्स) को साउथ ब्लॉक तलब किया:
- सख्त आपत्ति: विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने पाकिस्तानी राजनयिक को तलब कर इस घटना पर औपचारिक और कड़ा विरोध पत्र सौंपा.
- लापरवाही से बचने की हिदायत: राजनयिक से कहा गया कि वे इस्लामाबाद में संबंधित सैन्य व नौसैनिक अधिकारियों तक भारत की गंभीर चिंता पहुंचाएं और स्पष्ट करें कि समुद्र में सैन्य इकाइयों को संचालन के दौरान आवश्यक सतर्कता बरतनी चाहिए.
- इस्लामाबाद में भी विरोध: इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के प्रभारी को भी निर्देश दिया है कि वे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष ऐसा ही कड़ा विरोध दर्ज कराएं.
1991 के द्विपक्षीय सैन्य समझौते का सीधा उल्लंघन
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का यह आचरण भारत और पाकिस्तान के बीच अप्रैल 1991 में हुए ऐतिहासिक समझौते के अनुच्छेद 10 का सीधा उल्लंघन है:
- समझौते का मुख्य उद्देश्य: 1991 का यह समझौता सैन्य अभ्यास, गतिविधियों, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की पूर्व सूचना देने के लिए एक द्विपक्षीय ढांचा प्रदान करता है.
- इसका प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की गलतफहमी, अनपेक्षित टकराव या सैन्य दुर्घटना के जोखिम को कम करना है.
- भारत ने दोहराया कि भविष्य में इस तरह की खतरनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दोनों पक्षों की सेनाओं को प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौतों के प्रावधानों का कड़ाई से सम्मान करना चाहिए.
राजनयिक हल और आगे की स्थिति
The Tribune के अनुसार, वर्तमान में दोनों देशों के बीच इस मामले को राजनयिक माध्यमों से सुलझाने की प्रक्रिया चल रही है. भारतीय नौसेना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपने नियमित निगरानी और सुरक्षा अभियानों को पूरी सतर्कता के साथ जारी रखे हुए है, जबकि इस घटना पर पाकिस्तान के आधिकारिक बयान और प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.