Operation Muskan: मुंबई रेलवे पुलिस का सराहनीय प्रयास, 5 साल में 2,100 से अधिक बच्चों को परिजनों से मिलाकर लौटाई खुशियां
मुंबई रेलवे पुलिस ने 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत पिछले पांच वर्षों में रेलवे नेटवर्क से रेस्क्यू किए गए 2,117 बच्चों और 345 वयस्कों को उनके परिवारों से सुरक्षित मिलाया है. वर्ष 2021 से अब तक 6,000 से अधिक बच्चों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है.
Operation Muskan: मुंबई रेलवे पुलिस ने पिछले पांच वर्षों में 'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है. इस विशेष अभियान के माध्यम से रेलवे नेटवर्क पर लावारिस, भटके हुए या असुरक्षित स्थिति में मिले 2,117 बच्चों को उनके माता-पिता से दोबारा मिलाया गया है. इसके साथ ही इसी अवधि में 345 लापता वयस्कों को भी खोजकर उनके परिवारों को सौंपा गया है. रेलवे पुलिस द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, यह मुहिम मुंबई के व्यस्त रेल नेटवर्क पर बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी को रोकने में बेहद प्रभावी साबित हुई है.
साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में 173 बच्चों का रेस्क्यू
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2021 से अब तक मुंबई के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में अकेले यात्रा कर रहे या भटकते हुए पाए गए 6,000 से अधिक बच्चों को पुलिस सुरक्षा में लिया गया. इनमें से कई बच्चों को सुरक्षित उनके गृह राज्यों में भेजा गया या परामर्श के बाद उनके माता-पिता को सौंपा गया. केवल इस वर्ष, यानी जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच ही, गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 173 बच्चों और 27 वयस्कों को उनके परिजनों से मिलाने में सफलता हासिल की है. यह भी पढ़े: Mumbai Metro 3: MMRC का सराहनीय कदम, मुंबई मेट्रो 3 में दिव्यांग यात्रियों के लिए पास पर 25% की छूट की घोषणा
एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) की सक्रिय भूमिका
लापत्ता बच्चों की तलाश और अपहरण के मामलों को सुलझाने में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने केंद्रीय भूमिका निभाई है. वर्ष 2021 से 2026 के बीच इस विशेष इकाई के तहत कुल 167 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से शानदार कार्यप्रणाली का प्रदर्शन करते हुए 162 मामलों को पूरी तरह सुलझा लिया गया है. इन सुलझाए गए मामलों में 109 लड़कियां और 58 लड़के शामिल थे. इस दौरान पुलिस ने 'ऑपरेशन शोध' और 'ऑपरेशन मुस्कान-14' जैसे कई अन्य लक्षित अभियान भी चलाए.
घर छोड़ने के पीछे के मुख्य कारण
बांद्रा रेलवे पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) किशोर शिंदे ने बताया कि मुंबई के रेलवे स्टेशन अक्सर ऐसे भटके हुए बच्चों के लिए पहला पड़ाव बनते हैं, क्योंकि ट्रेनों में सफर करना आसान और सस्ता होता है.
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश बच्चे माता-पिता की डांट, पढ़ाई के अत्यधिक दबाव, पारिवारिक विवाद या गरीबी से तंग आकर घर छोड़ देते हैं. इसके अलावा, एक बड़ी संख्या उन बच्चों की भी होती है जो मुंबई मायानगरी की चकाचौंध से प्रभावित होकर यहां नौकरी खोजने या अपनी किस्मत आजमाने के सपने लेकर घर से भाग आते हैं.
एनजीओ-निर्भया पाठक का सराहनीय योगदान
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 8 से 10 गैर-सरकारी संगठन (NGO) रेलवे पुलिस के साथ मिलकर चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं. 'विधायक भारती' एनजीओ के बाल कार्यकर्ता संतोष शिंदे ने बताया कि उनका संगठन पिछले 35 वर्षों से महाराष्ट्र पुलिस के साथ हर कदम पर समन्वय कर रहा है. एनजीओ के स्वयंसेवक बच्चों को सुरक्षित माहौल का अहसास कराते हैं, काउंसिलिंग करते हैं और परिजनों से संपर्क न होने की स्थिति में उन्हें बाल सुधार गृहों (Juvenile Homes) में भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कराते हैं.
इसके अलावा, पुलिस की विशेष 'निर्भया पाठक' विंग के प्रदर्शन में भी भारी उछाल देखा गया है. साल 2021 में जहां इस विंग ने केवल 5 बच्चों को रेस्क्यू किया था, वहीं साल 2025 में यह संख्या बढ़कर 931 तक पहुंच गई.
हालिया रेस्क्यू ऑपरेशन के प्रमुख उदाहरण
इसी वर्ष अप्रैल महीने में रेलवे पुलिस ने आसनसोल-मुंबई एक्सप्रेस में अकेले सफर कर रहे झारखंड के 7 नाबालिग लड़कों को सुरक्षित रेस्क्यू किया था. इसके अलावा, कल्याण रेलवे स्टेशन के पास झारखंड का ही एक 14 वर्षीय लड़का अकेला घूमता हुआ पाया गया, जो बिना किसी को बताए सिर्फ "मुंबई शहर घूमने" के इरादे से ट्रेन पकड़कर यहां आ गया था. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन बच्चों को उनके परिजनों से सुरक्षित मिला दिया है.
(The above story first appeared on LatestLY on May 25, 2026 12:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

