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अब महिला सरपंचों की जगह नहीं ले पाएंगे 'प्रधान पति', लगेगा भारी जुर्माना

भारत की पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर अधिकांश मामलों में उनके पति या उनके घर के दूसरे पुरुष कार्यभार संभालते हैं.

अब महिला सरपंचों की जगह नहीं ले पाएंगे 'प्रधान पति', लगेगा भारी जुर्माना
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत की पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर अधिकांश मामलों में उनके पति या उनके घर के दूसरे पुरुष कार्यभार संभालते हैं. पंचायती राज मंत्रालय की तरफ से गठित एक समिति ने इस पर अपनी रिपोर्ट जारी की है.वेब सीरीज 'पंचायत' में ग्राम फुलेरा की प्रधान मंजू देवी (नीना गुप्ता) तब एक बड़े संकट में फंस जाती हैं, जब जिलाधिकारी को यह भनक लग जाती है कि पंचायत का असली काम तो उनके पति (रघुबीर यादव) संभाल रहे हैं.

यह कहानी भारत की कई ग्राम पंचायतों की है, जहां महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर चुनी गई महिला प्रधान की जगह उनके पति या उनके घर के ही दूसरे पुरुष उनकी जगह सारा काम देखते हैं. हाल ही में ऐसे मामलों पर पंचायती राज मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी.

अब पहले से ज्यादा घरेलू काम कर रहे हैं पुरुष

इस रिपोर्ट में प्रधान पति जैसी प्रथा को रोकने के लिए ऐसे मामलों में लिप्त पाए जाने वाले लोगों पर भारी दंड की सिफारिश की गई है. साथ ही महिलाएं बेहतर तरीके से काम कर पाएं इसके लिए उन्हें एआई के जरिए बेहतर प्रशिक्षण देने और नीतिगत सुधार लाने की बात कही गई है.

महिलाओं को सशक्त बनाने और गांवों के विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन के जरिए 1992 में तीन स्तर (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद) की पंचायत प्रणाली की स्थापना की गई थी, जिसमें महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गई. आगे चलकर 21 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों ने इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया.

कौन होते हैं प्रधान पति

'प्रधान पति', 'सरपंच पति' या 'मुखिया पति' नाम के पद निर्वाचित महिलाओं के पतियों को मिलता है, जो अपनी पत्नी की जगह काम करते हैं. इस वजह से निर्वाचित महिला प्रतिनिधि बस नाममात्र की प्रतिनिधि रह जाती हैं और सारी शक्तियां उनके पतियों के हाथ में आ जाती हैं.

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मंत्रालय की ओर से गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस समस्या का जिक्र किया है. 'पंचायती राज प्रणालियों और संस्थानों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और भूमिकाओं को बदलना: प्रॉक्सी भागीदारी के प्रयासों को खत्म करना' विषय पर जारी रिपोर्ट में इस व्यवस्था को खत्म करने की सिफारिश के साथ-साथ इसमें सुधार के लिए कई उपाय भी सुझाए गए हैं.

भारत में पंचायत के तीन स्तरों पर लगभग 2.63 लाख पंचायतें हैं. इनमें 32.29 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों में 46.6 फीसदी (15.03 लाख) महिलाएं हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है, जहां महिला प्रतिनिधियों की जगह पुरुष काम करते हैं.

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समिति ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए 'प्रॉक्सी' यानी किसी के बदले काम करने की इस प्रथा में शामिल महिलाओं के पतियों या पुरुष रिश्तेदारों को कठोर दंड दिए जाने की बात कही है.

कैसे सुधरेंगे हालात

केरल की तर्ज पर समिति ने पंचायतों और वार्ड स्तर की समितियों में लिंग के आधार पर विशेष कोटा देने के साथ-साथ प्रॉक्सी नेतृत्व के खिलाफ 'एंटी-प्रधान पति' पुरस्कार दिए जाने की सिफारिश की है.

इस तरह के मामलों से निपटने के लिए महिला लोकपाल की नियुक्ति के सुझाव के अलावा ग्राम सभाओं के शपथ ग्रहण को सार्वजनिक समारोह की तरह आयोजित करने की बात कही है. समिति ने महिलाओं को बेहतर ट्रेनिंग देने और उनके कौशल को बढ़ावा देने के लिए वर्चुअल रियलिटी (वीआर) और एआई के जरिए उन्हें प्रशिक्षण दिए जाने का सुझाव भी दिया है.

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महिला प्रतिनिधिओं को पंचायत से जुड़े मुद्दों का बेहतर समाधान मिल सके इसके लिए अधिकारियों के साथ वाट्सएप ग्रुप बनाए जाने, पंचायत निर्णय पोर्टल के जरिए नागरिकों को प्रधानों के कामकाज और भागीदारी पर नजर रखे जाने का सुझाव दिया है.

पंचायती राज मंत्रालय ने जुलाई 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सितंबर 2023 में इस मामले और इससे जुड़े दूसरे मुद्दों की जांच करने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन किया था. मंत्रालय फिलहाल समिति की सिफारिशों को लागू करने की योजना पर काम कर रहा है.

रिपोर्ट: आयुष यादव

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 03, 2025 05:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).