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Lucknow: अब बदला राज्य, इस बार उत्तरप्रदेश का चुनाव होगा ' बाहुबली मुक्त '

लखनऊ: एक जमाने में बाहुबलियों के बगैर यूपी में चुनाव नहीं हो सकते थे. चाहे विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव, सभी जगह उनका बराबर दखल हुआ करता था. उनके सामने चुनाव लड़ने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी. अब जमाना बदल गया है. ऐसे ज्यादातर लोग या तो जेल में हैं या फिर सियासी रसातल में पहुंच गए हैं.

Lucknow: अब बदला राज्य, इस बार उत्तरप्रदेश का चुनाव होगा ' बाहुबली मुक्त '
(Photo : X)

लखनऊ: एक जमाने में बाहुबलियों के बगैर यूपी में चुनाव नहीं हो सकते थे. चाहे विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव, सभी जगह उनका बराबर दखल हुआ करता था. उनके सामने चुनाव लड़ने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी. अब जमाना बदल गया है. ऐसे ज्यादातर लोग या तो जेल में हैं या फिर सियासी रसातल में पहुंच गए हैं.

राजनीतिक दलों ने भी बाहुबलियों से पीछा छुड़ाना शुरू कर दिया है. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि 1970 से लेकर 2017 तक पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड और पश्चिम इलाके तक बाहुबलियों का बोलबाला हुआ करता था. यह न सिर्फ चुनाव लड़ते थे, बल्कि पार्टियों को ब्लैकमेल भी करते थे और चुनाव को बाधित करते थे.

उदाहरण के तौर पर मऊ सदर सीट से विधायक बनने वाले मुख्तार अंसारी का जलवा होता था. मऊ-गाजीपुर के हर छोटे-बड़े चुनावों में उसका हस्तक्षेप रहता था. समय का पहिया घूमा और आज वह जेल की सलाखों के पीछे है. ऐसे ही पूर्व सांसद धनंजय सिंह को सात साल की सजा सुनाई गई है। उनका राजनीतिक भविष्य अधर में लटका है. यह भी पढ़े :Mafia Mukhtar Ansari sentenced to life imprisonment: माफिया मुख्तार अंसारी को फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में आजीवन कारावास की सजा

यादव वोटों पर मजबूत पकड़ रखने वाले चार बार के सांसद और पांच बार के विधायक बाहुबली नेता रमाकांत यादव जेल में बंद हैं. इस बार चुनाव में उनका कोई प्रभाव नहीं रहेगा. ज्ञानपुर के पूर्व विधायक विजय मिश्र की हत्या के मामले में जेल में बंद उमाकांत यादव भी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। वह चुनाव में भाग नहीं ले पाएंगे.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि उत्तर प्रदेश का चुनाव बिना बाहुबलियों के कभी नहीं लड़ा गया. यह ऐसा पहला चुनाव है, जिसमें नामी माफिया या तो जेल में बंद हैं या फिर ऊपर की सैर कर रहे हैं. अगर बात करें बुंदेलखंड और चंबल कि तो यहां शिव कुमार पटेल ददुआ, ठोकिया, शंकर जैसे डाकू चुनाव की हार-जीत तय करते थे. इनका इतिहास आतंक का हुआ करता था. समय के साथ उनका अंत हो गया है.

रावत कहते हैं कि पूर्व मंत्री डीपी यादव से सपा, बसपा ने किनारा किया तो उनकी राजनीतिक जमीन कमजोर हो गई. प्रयागराज में माफिया अतीक और उसका भाई अशरफ ये दो नाम थे, जिनके इर्द-गिर्द हर चुनाव घूमता था, लेकिन पिछले वर्ष दोनों की हत्या के बाद प्रभाव खत्म हो गया.

उत्तर प्रदेश पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जनपदों के दुर्दांत अपराधियों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई के दौरान कुल 194 अपराधी मुठभेड़ में मारे गये और 5,942 घायल हुए. इसमें पुलिस बल के 16 जवान वीरगति को प्राप्त हुए तथा 1,505 पुलिस कर्मी घायल हुए.

राज्य स्तर पर चिन्हित कुल 68 माफिया और उनके गैंग के सदस्यों और सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. अब तक लगभग 3,758 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर एक्शन लिया गया है.

 

 

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 13, 2024 07:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).