Nipah Virus Cases in Bengal: पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 5 मामलों की पुष्टि के बाद मचा हड़कंप; नए प्रकोप को रोकने के लिए मोदी सरकार ने उठाए अहम कदम, जानें इसके लक्षण-इलाज

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में निपाह वायरस के 5 पुष्ट मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. स्वास्थ्य विभाग ने 100 से अधिक लोगों को क्वारंटीन किया है और केंद्र सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक उच्च स्तरीय टीम भेजी है.

Nipah Virus Cases in West Bengal:  भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस (NiV) के नए प्रकोप ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है. 26 जनवरी 2026 तक राज्य में निपाह के 5 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं. संक्रमण का केंद्र उत्तर 24 परगना जिले का बारासात इलाका बताया जा रहा है. एहतियात के तौर पर प्रशासन ने संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लगभग 100 लोगों को क्वारंटीन कर दिया है.

स्वास्थ्य कर्मियों में फैला संक्रमण

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यह संक्रमण एक निजी अस्पताल से फैला है, जहां एक संदिग्ध मरीज का इलाज करने के दौरान डॉक्टर और नर्सें इसकी चपेट में आ गए. संक्रमितों में दो नर्सें, एक डॉक्टर और एक अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं. इनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें कोलकाता के बेलेघाटा आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. यह भी पढ़े:  पश्चिम बंगाल में Nipah Virus का अलर्ट: 5 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क; जानें लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

निपाह वायरस: कारण और फैलाव

निपाह एक 'जूनोटिक' वायरस है, जो जानवरों (विशेषकर फलों खाने वाले चमगादड़ों या 'फ्लाइंग फॉक्स') से इंसानों में फैलता है. इसके फैलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

प्रमुख लक्षण और पहचान

निपाह वायरस के लक्षण संक्रमण के 4 से 14 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं. शुरुआत में यह सामान्य फ्लू जैसा लगता है, लेकिन जल्द ही जानलेवा हो सकता है:

  1. शुरुआती लक्षण: तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गले में खराश.

  2. श्वसन संबंधी समस्या: गंभीर खांसी और सांस लेने में तकलीफ.

  3. दिमागी जटिलताएं: भ्रम की स्थिति, नींद आना, दौरे पड़ना और दिमागी सूजन (Encephalitis). गंभीर मामलों में मरीज 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है.

उपचार और बचाव के उपाय

वर्तमान में निपाह वायरस का कोई टीका (Vaccine) या विशिष्ट एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है. डॉक्टरों द्वारा केवल 'सपोर्टिव केयर' (ऑक्सीजन और हाइड्रेशन बनाए रखना) दी जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस वायरस की मृत्यु दर 40% से 75% तक हो सकती है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है.

सरकार की कार्रवाई और सावधानी

केंद्र सरकार ने एक विशेष टीम पश्चिम बंगाल भेजी है ताकि 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' (संपर्क में आए लोगों की पहचान) तेज की जा सके. तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों ने भी एडवाइजरी जारी कर अस्पतालों को सतर्क रहने को कहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग पेड़ों से गिरे हुए आधे-खाए फल न खाएं और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें.

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