केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन की एक अदालत ने हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई है और अब यह सजा 16 जुलाई 2025 को फांसी देकर पूरी की जाएगी. यह मामला भारत समेत विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है. निमिषा प्रिया, एक प्रशिक्षित नर्स हैं जो 2008 में यमन काम करने के लिए गई थीं ताकि अपने माता-पिता का सहारा बन सकें. वहां कई अस्पतालों में काम करने के बाद उन्होंने खुद का क्लिनिक खोलने की कोशिश की, जिसके लिए स्थानीय नियमों के अनुसार उन्हें एक स्थानीय नागरिक तालाल अब्दो महदी के साथ साझेदारी करनी पड़ी.
2014 में निमिषा और महदी के बीच रिश्तों में खटास आ गई. निमिषा ने महदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन वह जल्दी ही जेल से छूट गया और कथित रूप से निमिषा को धमकाने लगा.
परिवार के मुताबिक, निमिषा ने अपना जब्त पासपोर्ट वापस लेने के लिए महदी को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, लेकिन ओवरडोज के कारण उसकी मौत हो गई. निमिषा को देश छोड़ने की कोशिश के दौरान गिरफ्तार किया गया और 2018 में हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया.
यमन में कानून और मौत की सजा
यमन में हत्या सहित कई अपराधों के लिए मृत्युदंड की सजा दी जाती है. वहां के सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने भी नवंबर 2023 में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा.
क्या है 'ब्लड मनी' और क्यों रुकी बातचीत?
यमन के कानून के अनुसार, अगर पीड़ित के परिवार को एक तय राशि मुआवज़े (जिसे 'ब्लड मनी' कहते हैं) के रूप में दी जाए, तो वे सजा माफ कर सकते हैं. लेकिन यह राशि पीड़ित परिवार तय करता है और इस पर बातचीत आसान नहीं होती.
निमिषा की मां, जो कोच्चि में घरेलू सहायिका का काम करती हैं, ने बेटी के लिए अपना घर तक बेच दिया. वहीं, बातचीत के लिए नियुक्त यमनी वकील अब्दुल्ला आमिर ने 40,000 डॉलर (करीब ₹33 लाख) की फीस मांगी, जिससे मामला अटक गया.
भारत सरकार की कोशिशें और मां की भावुक अपील
भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वे मामले को "बहुत करीब से देख रहे हैं" और हर संभव मदद कर रहे हैं. इसके बावजूद, समय तेज़ी से निकल रहा है और निमिषा की मां ने भारत सरकार से आखिरी बार अपील की है, "मैं भारत सरकार और केरल सरकार की मदद के लिए आभारी हूं, लेकिन अब अंतिम समय है. कृपया मेरी बेटी की जान बचा लीजिए."













QuickLY