NEET-UG 2026: OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 6 उम्मीदवार; शीर्ष अदालत सुनवाई को तैयार

नीट-यूजी 2026 के छह अभ्यर्थियों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा जारी ओएमआर शीट की कॉपियों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली है.

सुप्रीम कोर्ट (Photo Credits: File Photo)

नई दिल्ली: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 2026 के छह उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) (NTA) द्वारा अपलोड की गई ओएमआर (Optical Mark Recognition) (OMR) शीटों की प्रतियों और परीक्षा के दौरान दर्ज किए गए उत्तरों के बीच भारी विसंगतियों का आरोप लगाया है. मंगलवार को देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया गया.

आगामी केंद्रीय काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए याचिकाकर्ताओं ने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. यह भी पढ़ें: NEET UG Counselling 2026: 4 अगस्त से शुरू होगी काउंसलिंग प्रक्रिया, 8 सितंबर से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र; NTA ने जारी किया पूरा शेड्यूल

अंक और दर्ज उत्तरों में अंतर का दावा

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि यह मामला उन छह मेधावी छात्रों से संबंधित है, जिन्होंने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में 600 और 650 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं. हालांकि, छात्रों का दावा है कि एनटीए द्वारा वेबसाइट पर जारी की गई ओएमआर शीट उनके द्वारा परीक्षा हॉल में मार्क किए गए वास्तविक उत्तरों से मेल नहीं खाती हैं.

वकील ने अदालत को बताया कि प्रभावित छात्रों ने इस समस्या के समाधान के लिए एनटीए को कई ईमेल भेजे और व्यक्तिगत रूप से उनके कार्यालय का दौरा भी किया. आरोप है कि अधिकारियों ने उनकी शिकायतों का कोई समाधान नहीं दिया, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हस्तक्षेप की गुहार लगानी पड़ी.

नीट-यूजी 2026 परीक्षा का घटनाक्रम

उल्लेखनीय है कि नीट-यूजी 2026 सत्र पहले से ही विवादों और पुनरीक्षण के दौर से गुजर चुका है. राष्ट्रीय स्तर की यह मेडिकल प्रवेश परीक्षा मूल रूप से 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक की व्यापक शिकायतों के बाद अधिकारियों ने इसे रद्द कर दिया था.

इसके बाद एनटीए ने 21 जून को देशभर में दोबारा परीक्षा (Re-exam) आयोजित की थी. अब मेडिकल दाखिले की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने वाली है, ऐसे में शीर्ष अदालत ने मामले की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को देखते हुए त्वरित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है.

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