NEET Student Protests: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की जांच के लिए बनाई 5 सदस्यीय समिति
इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे. समिति के अन्य सदस्यों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं.
NEET Student Protest Case: सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में छात्रों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए गुरुवार को पांच सदस्यीय हाई-पावर कमेटी का गठन किया है. यह समिति 20 जुलाई को हुए 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई की जांच करेगी. साथ ही प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की भी समीक्षा करेगी. यह भी पढ़ें: Maharashtra: NEET की तैयारी कर रहे 19 वर्षीय छात्र ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा- 'अगले जन्म में आपके लिए डॉक्टर जरूर बनूंगा'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समिति में न्यायिक, जांच और पुलिस प्रशासन का व्यापक अनुभव रखने वाले सदस्यों को शामिल किया गया है ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके.
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज करेंगे समिति की अगुवाई
इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे. समिति के अन्य सदस्यों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं.
किन आरोपों की होगी जांच?
समिति यह जांच करेगी कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया या नहीं. जांच के दायरे में लाठीचार्ज, आंसू गैस, पेलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के आरोप शामिल हैं. इसके अलावा प्रदर्शनकारियों के घायल होने, महिला छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के आरोपों की भी जांच की जाएगी. समिति यह भी देखेगी कि सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किया गया बल कानून के अनुरूप और परिस्थितियों के हिसाब से उचित था या नहीं.
पुलिस की कार्यप्रणाली और निगरानी तकनीक की भी होगी समीक्षा
समिति यह भी जांच करेगी कि प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी वर्दी में थे या नहीं और उनके नाम-पट्ट (नेमप्लेट) लगे थे या नहीं. इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेस रिकग्निशन और अन्य निगरानी तकनीकों के इस्तेमाल की भी समीक्षा की जाएगी. समिति यह भी देखेगी कि घायल लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता मिली या नहीं और क्या पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की जरूरत है.
पुलिस पर लगे आरोपों के साथ प्रदर्शनकारियों की भूमिका भी होगी जांच का हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल सुरक्षा बलों के खिलाफ लगे आरोपों तक सीमित नहीं रहेगी. समिति उन आरोपों की भी जांच करेगी जिनमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं. इससे पूरे घटनाक्रम का संतुलित मूल्यांकन किया जा सकेगा.
20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के बाद उठा विवाद
यह मामला 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो' मार्च के बाद सामने आया था, जहां NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी. पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम आवश्यक बल का ही इस्तेमाल किया गया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताते हुए इस समिति का गठन किया.
सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
पांच सदस्यीय समिति अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी. इसके आधार पर अदालत भविष्य में विरोध प्रदर्शनों के दौरान भीड़ नियंत्रण, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जुड़े मामलों में आगे के निर्देश जारी कर सकती है.