Sharad Navratri 2026 Maha Navami: महानवमी पर देशभर के शक्तिपीठों में उमड़ा आस्था का सैलाब; मां सिद्धिदात्री की विशेष पूजा और कन्या पूजन कर रहे हैं भक्त
शारदीय नवरात्र के नौवें व अंतिम दिन महानवमी के पावन अवसर पर देशभर के प्रमुख मंदिरों और शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सिद्धपीठ मां सिद्धिदात्री मंदिर, दिल्ली के झंडेवालान मंदिर, मध्य प्रदेश के देवास स्थित माता टेकरी और मैहर में त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा शक्तिपीठ में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं.
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र के समापन अवसर पर सोमवार, 19 अक्टूबर को देश के कोने-कोने में भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला. नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की विधिवत आराधना की। मंदिरों में शंखध्वनि, घंटों की गूंज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लाखों भक्तों ने शीश नवाया.
शास्त्रों के अनुसार, मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की आध्यात्मिक सिद्धियों, ज्ञान और मनोवांछित फल की प्रदाता मानी जाती हैं. इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन और हवन अनुष्ठान संपन्न कर अपने नौ दिवसीय उपवास को पूर्ण किया.
काशी के सिद्धिदात्री मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ऐतिहासिक मां सिद्धिदात्री देवी मंदिर में महानवमी पर तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. संकरी गलियों से होकर मंदिर परिसर तक पहुंचे भक्तों ने माता के विग्रह के दर्शन किए और विशेष पूजन में भाग लिया.
- पुजारी का कथन: समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मंदिर के मुख्य पुजारी बच्चा लाल मिश्रा ने नवमी के धार्मिक महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, "जो श्रद्धालु किसी कारणवश पूरे नवरात्र में देवी के अन्य रूपों की आराधना नहीं कर पाते, वे यदि अंतिम दिन केवल मां सिद्धिदात्री के दर्शन कर लें, तो उन्हें समस्त नौ रूपों की पूजा का संयुक्त पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है."
देवास की माता टेकरी: घुटनों के बल चलकर पहुंचे श्रद्धालु
मध्य प्रदेश के देवास स्थित प्रसिद्ध माता टेकरी पर नवमी के अवसर पर अद्भुत आस्था का दृश्य देखने को मिला. यहां स्थित चामुंडा माता और तुलजा भवानी मंदिर में सुबह की मंगला आरती में हजारों भक्त शामिल हुए.
- कठिन आस्था: कई श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर टेकरी की सीढ़ियों और ढलानों पर घुटनों के बल रेंगते हुए माता के दरबार तक पहुंचे.
- रक्त पीठ की मान्यता: मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर देवी सती का रक्त गिरा था, जिसके चलते प्राचीन चामुंडा माता मंदिर को 'रक्त पीठ' के रूप में पूजा जाता है.
- स्वयंभू स्वरूप: तुलजा भवानी मंदिर के पुजारी मुकेश नाथ ने बताया कि देवताओं के वास के कारण ही इस नगरी का नाम 'देवास' पड़ा. उन्होंने कहा कि यहां मां चामुंडा का स्वरूप स्वयंभू है और ऐसा विशाल विग्रह विश्व में अन्यत्र देखने को नहीं मिलता.
दिल्ली के झंडेवालान और मैहर शक्तिपीठ में भव्य अनुष्ठान
- झंडेवालान मंदिर (दिल्ली): राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक झंडेवालान मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही भक्तों का प्रवेश शुरू हुआ. सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच भक्तों ने माता के जयकारों के साथ दर्शन किए.
- मां शारदा धाम (मैहर): मध्य प्रदेश के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा शक्तिपीठ में नवमी पर विशेष पुष्प सज्जा की गई. लाल और पीले वस्त्रों व फूलों से सजे मंदिर परिसर में पारंपरिक पद्धति से मां सिद्धिदात्री का महाभिषेक और पूजन संपन्न हुआ.
कन्या पूजन और हवन के साथ नवरात्र अनुष्ठान का समापन
महानवमी के दिन घरों और मंदिरों में कन्या पूजन (कंजिका पूजन) का पारंपरिक अनुष्ठान बड़े पैमाने पर किया गया. दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर उनके चरण धोए गए और उन्हें हलवा, पूरी तथा काले चने का पारंपरिक भोग परोसा गया. इसके साथ ही नवार्ण मंत्रों की आहुतियों के साथ हवन कुंड में पूर्णाहुति दी गई.
नवमी के इस पावन समापन के बाद अब देशभर में बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी (दशहरा) पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं.