Narmada Water Dispute Resolved: महाराष्ट्र को बड़ा तोहफा, नर्मदा जल विवाद सुलझा, समझौते के बाद राज्य को मिलेगा 10 TMC पानी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई चार राज्यों की बैठक में 20 साल पुराने नर्मदा जल विवाद का समाधान हो गया है. इस ऐतिहासिक समझौते के तहत महाराष्ट्र को उसके हिस्से का 10 TMC पानी मिलेगा और करोड़ों रुपये का वित्तीय बकाया भी माफ कर दिया गया है.
Narmada Water Dispute Resolved: नर्मदा जल परियोजना से जुड़े दो दशक पुराने लंबित विवादों का आखिरकार समाधान हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच ऐतिहासिक सहमति बनी. इस समझौते के तहत महाराष्ट्र को उसके हक का 10 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) पानी मिलने का रास्ता साफ हो गया है. इसके साथ ही राज्यों के बीच वित्तीय देनदारियों के विवाद को भी वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए सुलझा लिया गया है.
20 साल पुराना विवाद और चार राज्यों की सहमति
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल शामिल हुए. यह भी पढ़े: मुंबई झील का स्तर आज: भारी बारिश के चलते मुंबई के जलाशयों में जल भंडार 41% के पार, विहार और तुलसी डैम ओवरफ्लो; देखें VIDEO
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया को बताया कि नर्मदा परियोजना पूरी होने के बाद से महाराष्ट्र को केवल बिजली मिल रही थी, जबकि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राज्य के हिस्से का 10 TMC पानी अब तक नहीं मिल पाया था. मंगलवार को हुई बैठक में इस समस्या का स्थायी समाधान खोज लिया गया.
CM देवेंद्र फडणवीसस का पोस्ट
उकाई बांध से पानी उठाने पर गुजरात की मंजूरी
महाराष्ट्र सरकार ने अपने हिस्से के 10 TMC पानी को इस्तेमाल करने के लिए दो विकल्प रखे थे. इसके तहत 5 TMC पानी नर्मदा-तापी डायवर्जन योजना के जरिए और बाकी 5 TMC पानी उकाई परियोजना से देने की मांग की गई थी.
गुजरात सरकार ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए मानसून के दौरान महाराष्ट्र को उकाई बांध से पानी उठाने की अनुमति दे दी है. मानसून के समय जब उकाई बांध में पानी का स्तर पर्याप्त रहेगा, तब महाराष्ट्र अपना हिस्सा ले सकेगा. इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महाराष्ट्र सरकार एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रही है, जिससे उत्तर महाराष्ट्र के जिलों को बड़ा लाभ मिलेगा.
वित्तीय देनदारियों में बड़ी राहत
इस समझौते के तहत महाराष्ट्र को पानी मिलने के साथ-साथ एक बड़ी वित्तीय राहत भी मिली है. पहले महाराष्ट्र पर सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण से जुड़े लागत साझाकरण को लेकर 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये तक के बड़े वित्तीय दावों की बात चल रही थी.
नए समझौते के बाद महाराष्ट्र के पुराने सभी बड़े बकाये माफ कर दिए गए हैं. अब राज्य को केवल 27 करोड़ रुपये का अंतिम भुगतान करना होगा. मुख्यमंत्री फडणवीस ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) का एक बेहतरीन उदाहरण बताया, जहां चारों राज्यों ने मिलकर एक 'विन-विन' स्थिति बनाई है.
कुसुम योजना में महाराष्ट्र को मिला सबसे ज्यादा फंड
उसी दिन केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी की अध्यक्षता में महाराष्ट्र में अक्षय ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने कुसुम योजना के तहत देश के कुल आवंटित बजट का 51 प्रतिशत हिस्सा अकेले महाराष्ट्र को दिया है.
राज्य सरकार ने केंद्र से संशोधित कुसुम योजना में भी अधिकतम सहयोग देने का अनुरोध किया है. वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने महाराष्ट्र से 'प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना' के तहत और अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने की उम्मीद जताई है, जिसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार आवश्यक नीतिगत सुधार करेगी.