Muzaffarnagar: पत्नी की हत्या को सड़क हादसा बताने वाले निलंबित BSF जवान को उम्रकैद; कोर्ट ने लगाया ₹50 हजार का जुर्माना
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित एक सत्र अदालत ने अपनी पत्नी की लोहे की रॉड से पीटकर हत्या करने और वारदात को सड़क दुर्घटना का रूप देने के दोषी निलंबित सीमा सुरक्षा बल के जवान मनोज कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार ने अभियुक्त को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए ₹50,000 का आर्थिक जुर्माना भी लगाया.
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने पत्नी की नृशंस हत्या के दो साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है. रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के निलंबित जवान मनोज कुमार को अपनी पत्नी आकांक्षा की लोहे की रॉड से हमला कर जान लेने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मनोज कुमार को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषी पाया और उस पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया. यह भी पढ़ें: Bengaluru Horror: पत्नी की गला घोंटकर हत्या के बाद शव पर डाला गर्म तेल, त्वचा उतारने की कोशिश का आरोप; बिहार निवासी पति गिरफ्तार
अप्रैल 2024 की वारदात: सड़क हादसे का रचा था झूठा नाटक
रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी वकील आशीष कुमार ने अदालत में घटना का पूरा ब्योरा पेश किया:
- शादी और घटनाक्रम: मृतका आकांक्षा का विवाह 6 फरवरी 2017 को बीएसएफ जवान मनोज कुमार के साथ हुआ था.
- लोहे की रॉड से हमला: 3 अप्रैल 2024 को कासिमपुर गांव में आरोपी मनोज कुमार ने घरेलू विवाद के दौरान अपनी पत्नी आकांक्षा पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने के कारण आकांक्षा की मौके पर ही मौत हो गई.
- गुमराह करने का प्रयास: हत्या करने के बाद आरोपी ने मामले को छिपाने के लिए मृतका के मायके वालों को फोन कर झूठी सूचना दी कि आकांक्षा की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है.
पिता के शक पर दर्ज हुई थी FIR, BSF ने किया था निलंबित
सड़क हादसे की कहानी पर मृतका के पिता सुभाष को गहरा संदेह हुआ:
- पिता ने मौके पर पहुंचकर बेटी के शरीर पर चोटों के निशान देखे और तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
- पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा, जिसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि मौत सड़क हादसे से नहीं, बल्कि किसी भारी वस्तु (लोहे की रॉड) से सिर पर लगातार वार किए जाने से हुई थी.
- हत्या का मुकदमा दर्ज होने और गिरफ्तारी के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने आंतरिक अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए मनोज कुमार को सेवा से निलंबित कर दिया था.
दो सह-आरोपी बरी, ट्रायल के दौरान पिता की हुई मौत
शुरुआती शिकायत में मृतका के पिता ने मनोज कुमार के अलावा उसके पिता अजब सिंह, मां मिथलेश और चाचा बाबू को भी आरोपी बनाया था:
- अदालत का फैसला: सुनवाई के दौरान पर्याप्त और ठोस साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने मनोज की मां मिथलेश और चाचा बाबू को सभी आरोपों से बरी कर दिया।.
- वहीं, आरोपी के पिता अजब सिंह की मुकदमे के ट्रायल के दौरान ही स्वाभाविक कारणों से मौत हो गई थी.
- अदालत ने केवल मुख्य अभियुक्त मनोज कुमार को ही हत्या का प्रत्यक्ष दोषी पाया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेज दिया. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आपराधिक अदालत से हत्या के आरोप में दोषसिद्धि के बाद अब बीएसएफ सेवा नियमों के तहत आरोपी की औपचारिक बर्खास्तगी (Dismissal) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.