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Mumbai Marine Tragedy: बांद्रा के कार्टर रोड पर बहकर आया व्हेल का बच्चा; क्रेन और रेस्क्यू टीमों की भारी मशक्कत के बाद भी नहीं बची जान (Watch Video)

मुंबई के बांद्रा वेस्ट स्थित कार्टर रोड तट पर शनिवार सुबह एक 26 फीट लंबी व्हेल का बच्चा बहकर आ गया. स्थानीय मछुआरों, दमकल विभाग, मैंग्रोव सेल और वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक (VBSL) के श्रमिकों द्वारा क्रेन की मदद से चलाए गए कई घंटों के संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद इस मूक जीव को बचाया नहीं जा सका.

Mumbai Marine Tragedy: बांद्रा के कार्टर रोड पर बहकर आया व्हेल का बच्चा; क्रेन और रेस्क्यू टीमों की भारी मशक्कत के बाद भी नहीं बची जान (Watch Video)
हम्पबैक व्हेल (Photo Credits: X/@warlordkush)

मुंबई: आर्थिक राजधानी मुंबई के बांद्रा वेस्ट (Bandra West) इलाके से पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों को मायूस करने वाली एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. यहाँ कार्टर रोड (Carter Road) पर स्थित 'ओटर्स क्लब' के पास शनिवार, 27 जून 2026 की सुबह एक 26 फीट लंबा व्हेल का बच्चा (Juvenile Whale) बहकर चट्टानों के बीच फंस गया. इस विशालकाय जीव को बचाने के लिए मुंबई पुलिस, दमकल विभाग, महाराष्ट्र वन विभाग के मैंग्रोव सेल, तटीय शोधकर्ताओं, स्थानीय कोली मछुआरों और वहां निर्माणाधीन वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक (VBSL) के कर्मचारियों ने मिलकर एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, हालांकि, पानी से बाहर आने के कारण अंदरूनी अंगों के ढहने और चोटों की वजह से तमाम कोशिशों के बाद भी इस व्हेल शावक को बचाया नहीं जा सका. यह भी पढ़ें: Mumbai Rains Alert Today: मुंबई, ठाणे और आसपास के जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, पालघर के लिए 'रेड अलर्ट' जारी

सी-लिंक के कर्मचारियों ने सुबह सबसे पहले देखा

तटीय संरक्षण फाउंडेशन (Coastal Conservation Foundation) के निदेशक और मरीन इकोलॉजिस्ट शौनक मोदी के अनुसार, मुंबई स्ट्रैंडिंग रिस्पांस नेटवर्क को शनिवार सुबह करीब 9 बजे कार्टर रोड तट पर एक व्हेल के फंसे होने की सूचना मिली थी. हालांकि, साइट पर मौजूद लोगों ने बताया कि वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक (VBSL) के प्रोजेक्ट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों ने सुबह लगभग 7:30 बजे ही इस व्हेल को चट्टानों के बीच तड़पते हुए देख लिया था, जिसके बाद तुरंत मुंबई पुलिस और दमकल विभाग को सूचित किया गया.

सूचना मिलते ही मैंग्रोव प्रोटेक्शन सेल और चिम्बाई कोलीवाड़ा के स्थानीय मछुआरे उफनते समुद्र (Choppy Waters) के बीच लाइफ जैकेट पहनकर पानी में उतरे. चूंकि व्हेल का वजन काफी ज्यादा था और समुद्र में तेज लहरें उठ रही थीं, इसलिए निर्माणाधीन सी-लिंक साइट पर मौजूद एक विशालकाय हाइड्रोलिक क्रेन को मौके पर बुलाया गया. क्रेन के जरिए व्हेल को चट्टानों से सुरक्षित उठाने का प्रयास किया गया, लेकिन रेस्क्यू पूरा होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया.

मुंबई तट पर फंसे किशोर हंपबैक व्हेल की बचाव से पहले मौत हो गई

ब्लू व्हेल या हम्पबैक व्हेल? प्रजाति को लेकर संशय

शुरुआती जांच और विजुअल्स के आधार पर मरीन एक्सपर्ट्स को लगा कि यह एक लुप्तप्राय 'ब्लू व्हेल' (Blue Whale) का बच्चा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा जीव माना जाता है. लेकिन बाद में वन विभाग के आधिकारिक सूत्रों और वन्यजीव डॉक्टरों द्वारा इसके शारीरिक ढांचे के गहन परीक्षण के बाद स्पष्ट किया गया कि यह लगभग 26 फीट लंबा एक किशोर 'हम्पबैक व्हेल' (Humpback Whale) था.

कानूनी और चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत, महाराष्ट्र वन विभाग ने व्हेल के शव को अपने कब्जे में लिया और दोपहर करीब 3 बजे एक बड़े ट्रक के जरिए उसे वर्सोवा तट पर ले जाया गया. वहां पशु चिकित्सकों की निगरानी में व्हेल का पोस्टमॉर्टम (Necropsy) किया गया ताकि उसकी मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके, और बाद में समुद्र तट की रेत में उसे दफन (Buried) कर दिया गया.

क्या वन्यजीव विभाग की प्रतिक्रिया में हुई देरी?

इस घटना के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं. एक वन्यजीव उत्साही ने नाराजगी जताते हुए कहा, "यह बेहद हैरान करने वाला है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी मैंग्रोव सेल का कोई भी शीर्ष अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. कुछ साल पहले जब रत्नागिरी तट पर एक व्हेल फंसी थी, तो राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त कर नावों के जरिए उसे गहरे समुद्र में वापस भेजने का सफल प्रयास किया था."

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी प्रवीण परदेशी ने इस घटना को "बेहद दुखद" बताया. उन्होंने तकनीकी पहलू साझा करते हुए कहा:

एक्सपर्ट कमेंट: "समुद्र तट पर बहकर आने वाली व्हेल मछलियों का बचना बेहद दुर्लभ होता है। पानी की कमी और गुरुत्वाकर्षण के कारण पानी के भीतर मिलने वाला उछाल (Buoyancy) खत्म हो जाता है, जिससे उनके अपने ही भारी वजन से उनके अंदरूनी अंग (Internal Organs) अंदर ही अंदर डैमेज और ब्लॉक हो जाते हैं. हमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तटीय क्षेत्रों में विशेष तकनीकी प्रणाली पर काम करना होगा."

समुद्र में बढ़ता प्रदूषण और जहाजों की हलचल बड़ी वजह?

पर्यावरणविदों (जैसे एनजीओ वनशक्ति के डी. स्टालिन) ने आशंका जताई है कि मानसून के दौरान अक्सर तेज लहरों या दिशाभ्रम (Disorientation) के कारण समुद्री जीव तट की ओर आ जाते हैं. इसके अलावा मुंबई के समुद्र में लगातार बढ़ रहा औद्योगिक कचरा, अनुपचारित सीवेज (Untreated Sewage), प्लास्टिक प्रदूषण और भारी कमर्शियल जहाजों व मछली पकड़ने वाले बड़े ट्रॉलर्स की आवाजाही के कारण होने वाला 'अंडरवाटर नॉइज़ डिस्टर्बेंस' (पानी के नीचे का शोर) भी इन बड़े स्तनधारी जीवों को बीमार और भ्रमित कर देता है, जिससे वे अपना रास्ता भटककर किनारे आ जाते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 29, 2026 04:31 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).