Mumbai Onion Price Hike: मुंबई में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी, वाशी APMC मार्केट में आपूर्ति घटने से खुदरा दाम ₹70 प्रति किलो तक पहुंचे
थोक व्यापारियों के अनुसार, महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति में आई कमी इसका मुख्य कारण है. पिछले महीने की तुलना में मंडी में गाड़ियों की संख्या काफी घट गई है.
Mumbai Onion Price Hike: मुंबई के खुदरा बाजारों में 12 सितंबर को प्याज की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जिससे कीमतें 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं. वाशी स्थित कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में प्याज की दैनिक आवक घटने के कारण थोक और खुदरा दरों में यह बढ़ोतरी हुई है. इस अचानक उछाल से आम उपभोक्ताओं के रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है.
थोक व्यापारियों के अनुसार, महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति में आई कमी इसका मुख्य कारण है. पिछले महीने की तुलना में मंडी में गाड़ियों की संख्या काफी घट गई है. यह भी पढ़े: CNG-PNG Price Hike: महंगाई की मार, मुंबई में सीएनजी-पीएनजी और दूध के दाम बढ़े, ऑटो-टैक्सी का सफर भी हुआ महंगा
वाशी APMC मंडी में आवक में गिरावट
नवी मुंबई स्थित वाशी APMC मंडी में प्याज की दैनिक आवक लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो गई है. पहले जहां मंडी में रोजाना 100 से अधिक गाड़ियां प्याज लेकर पहुंचती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर 60 से 70 ट्रकों के आसपास रह गई है.
मंडी में आवक कम होने से थोक बाजार में प्याज की दरें 40 से 46 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो एक महीने पहले 15 से 25 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थीं. थोक दरों में आई इसी बढ़ोतरी का सीधा असर मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के खुदरा बाजारों पर देखने को मिल रहा है.
आपूर्ति कम होने के मुख्य कारण
व्यापारियों का कहना है कि नासिक, अहिल्यानगर (अहमदनगर), पुणे और सोलापुर जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में पुराना स्टॉक सीमित बचा है. इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारत और दिल्ली जैसे राज्यों से भी मांग बनी हुई है, जिसके कारण महाराष्ट्र की मंडियों से माल अन्य राज्यों में भी भेजा जा रहा है.
आपूर्ति श्रृंखला में आई इस बाधा की वजह से जब तक नई फसल की आवक पूरी तरह शुरू नहीं होती, तब तक कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है.
आम जनता और व्यापारियों पर असर
खुदरा बाजारों में प्याज 60 से 70 रुपये प्रति किलो बिकने से आम परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है. होटल, रेस्तरां और छोटे खाद्य विक्रेताओं की परिचालन लागत भी बढ़ गई है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में थोक मंडियों में नई फसल की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो खुदरा कीमतों में कुछ समय और तेजी बनी रह सकती है. हालांकि, जिला मंडियों से आपूर्ति सुचारू करने के प्रयास जारी हैं.