Mumbai Local Train Murder Case: मुंबई लोकल ट्रेन में 21 वर्षीय मयंक लोहार की हत्या के मामले में आरोपी रोशन सुवर्णा के परिवार ने 'सोशल मीडिया ट्रायल' को लेकर चिंता जताई है. परिवार का कहना है कि मामले की सुनवाई अदालत में शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और वायरल वीडियो के कारण उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी प्रभावित हो रही है. Mumbai Local Train Stabbing: बारिश में ट्रेन का दरवाजा बंद करने को लेकर हुआ विवाद, चलती लोकल में यात्री पर चाकू से हमला; सामने आया खौफनाक वीडियो
'सोशल मीडिया ट्रायल' से परिवार परेशान
मीडिया से बातचीत में रोशन सुवर्णा के परिजनों ने दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया पर अपमानजनक संदेश मिल रहे हैं और समाज में भी अलग नजर से देखा जा रहा है. परिवार का कहना है कि वायरल वीडियो और ऑनलाइन चर्चाओं के आधार पर लोगों ने पहले ही अपनी राय बना ली है, जिससे परिवार के सदस्यों के लिए नौकरी और सामान्य जीवन जारी रखना मुश्किल हो गया है.
उन्होंने लोगों से अपील की कि मामले को लेकर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जाए.
लोकल ट्रेन में विवाद के बाद हुई थी हत्या
पुलिस के अनुसार, 23 जून की रात चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल की फर्स्ट क्लास बोगी में भारी बारिश के दौरान ट्रेन का दरवाजा खुला रखने को लेकर रोशन सुवर्णा और 21 वर्षीय मयंक लोहार के बीच बहस हुई थी.
जांच एजेंसियों का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर रोशन सुवर्णा ने चाकू निकालकर मयंक लोहार पर कई वार किए, जिससे उनकी मौत हो गई. घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था, लेकिन बाद में मुंबई पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
जांच में जुटी मुंबई पुलिस
मुंबई पुलिस इस मामले की जांच जारी रखे हुए है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है. फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और कानूनी प्रक्रिया जारी है.
पीड़ित परिवार ने मांगी कड़ी सजा
दूसरी ओर, मयंक लोहार के परिवार ने आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है. परिजनों का कहना है कि हमला बिना किसी उकसावे के किया गया और इस घटना ने पूरे परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है.
सोशल मीडिया ट्रायल पर फिर छिड़ी बहस
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावे तेजी से वायरल हुए, जिससे मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आरोपी का दोषी या निर्दोष होना केवल अदालत में पूरी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय किया जा सकता है, न कि सोशल मीडिया पर बन रही राय के आधार पर.












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