Mumbai Ganeshotsav 2026: भांडुप के 'तुळशेतपाड्याचा राजा' गणेश मंडल की अनोखी पहल, गणपति पंडाल में बच्चों को दिखाई जा रही रामानंद सागर की 'रामायण'

मंडल ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य किसी पर कोई विचार थोपना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और भारतीय शास्त्रों को जानने-समझने का अवसर देना है. उनका विश्वास है कि यदि गणेशोत्सव के माध्यम से बच्चे प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेते हैं, तो यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता होगी.

Bhandup Ganeshotsav 2026: मुंबई के भांडुप स्थित प्रसिद्ध तुळशेतपाड्याचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ने इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल की है. मंडल ने अपने गणपति पंडाल में रामानंद सागर की लोकप्रिय टीवी श्रृंखला 'रामायण' की स्क्रीनिंग शुरू की है. इस पहल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और जीवन मूल्यों से जोड़ना है.

मंडल का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी आधुनिक तकनीक और डिजिटल दुनिया के बीच बड़ी हो रही है. ऐसे समय में केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और नैतिक मूल्यों का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है. इसी सोच के साथ गणपति उत्सव में आने वाले बच्चों और परिवारों को भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, मर्यादा, कर्तव्य, माता-पिता के प्रति सम्मान और रिश्तों की अहमियत से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है.

पंडाल में रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावक एक साथ बैठकर रामायण का आनंद ले रहे हैं. मंडल का कहना है कि रामायण केवल एक धारावाहिक नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला महाग्रंथ है, जिसमें ऐसे संस्कार और शिक्षाएं हैं जो आज भी समाज के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं.

प्रतियोगिता के विजेताओं को विशेष सम्मान और आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे. प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 'बाल-चाणक्य', द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को 'बाल-वाल्मीकि' और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को 'बाल-नचिकेता' की सम्मानजनक उपाधि प्रदान की जाएगी.

भांडुप के इस गणेश मंडल ने महाराष्ट्र के अन्य सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों और दुर्गा उत्सव मंडलों से भी अपील की है कि वे अपने-अपने उत्सवों के माध्यम से बच्चों और किशोरों के लिए ऐसे ज्ञानवर्धक एवं संस्कारवर्धक कार्यक्रम आयोजित करें. उनका मानना है कि धार्मिक उत्सव केवल मनोरंजन तक सीमित न रहें, बल्कि नई पीढ़ी को रामायण, महाभारत, भगवद्गीता और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी बनें.

मंडल ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य किसी पर कोई विचार थोपना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और भारतीय शास्त्रों को जानने-समझने का अवसर देना है. उनका विश्वास है कि यदि गणेशोत्सव के माध्यम से बच्चे प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेते हैं, तो यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता होगी.

 

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