Delhi-Mumbai Air Quality: दिल्ली के बाद मुंबई की हवा भी खराब, लोगों का सांस लेना हुआ मुश्किल; VIDEOS

Delhi-Mumbai Air Pollution:  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई भी अब दिल्ली की राह पर चलते हुए खराब वायु गुणवत्ता की चपेट में आ गई है. दिल्ली के बाद मुंबई की हवा भी बिगड़ने लगी है, जिससे दोनों शहरों में लोगों का सांस लेना लगातार मुश्किल होते जा रहा है.  26 नवंबर 2025 की सुबह 7 बजे दिल्ली-एनसीआर का औसत AQI 339 दर्ज किया गया, जो हवा की गुणवत्ता के ’बहुत खराब’ स्तर को दर्शाता है.

दिल्ली की हवा हुई जहरीली

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली में कई इलाकों में प्रदूषण गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया. रोहिणी में AQI 376, आनंद विहार में 364 और बावना में 382 दर्ज हुआ, जिसने हवा को बेहद जहरीला बना दिया है. अक्षरधाम मंदिर के आसपास धुंध की मोटी चादर छाई है और PM2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सीमा से काफी अधिक पाया गया.

दिल्ली में प्रदुषण बढ़ा

मुंबई की हवा भी हुई ख़राब

वहीं, मुंबई में भी वायु प्रदूषण का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है। खराब हवा के कारण शहर पर स्मॉग की परत छा गई है. 26 नवंबर को मुंबई का औसत AQI 221 तक पहुंच गया, जबकि सोमवार को यह 316 था. वडाला ट्रक टर्मिनल में 364 का स्तर दर्ज हुआ, जबकि चेंबूर, कोलाबा और वरली जैसे इलाकों में AQI 300 से ऊपर बना रहा. निर्माण कार्यों से उठती धूल, वाहनों का धुआं और ला नीना के कारण हवा की गति धीमी पड़ने से प्रदूषण बढ़ा है.

 मुंबई का एयर क्वालिटी

BMC ने उठाए अहम कदम

मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने स्थिति को देखते हुए GRAP-4 के तहत सख्त कदम उठाए हैं. निर्माण स्थलों पर लगातार जांच की जा रही है, पानी का छिड़काव और मिस्टिंग की जा रही है. ईस्टर्न फ्रीवे ब्रिज के आसपास धुंध की पतली परत नजर आ रही है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो रही है.

विशेषज्ञों  ने क्या कहा

विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर से फरवरी तक वायु प्रदूषण चरम पर पहुंचता है। इसलिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे लंबे समय तक बाहर न रहें, मास्क का उपयोग करें और घरों में एयर प्यूरीफायर चलाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हवा की गति में सुधार नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं.

सर्दियों में दिल्ली और मुंबई में हर साल वायु प्रदुषण बिगड़ता है

सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली और मुंबई दोनों में प्रदूषण बढ़ना हर साल की सामान्य स्थिति है, लेकिन इस बार जलवायु परिवर्तन, तेज शहरीकरण और प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही के कारण हालात और गंभीर हो गए हैं. सरकारें जरूरी कदम उठा रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के समाधान के लिए सख्त नीतियों और जनसहयोग की बेहद जरूरत है.