अहमदाबाद, 14 जून। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project) में अंतरराष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया जा रहा है. परियोजना के तहत पहाड़ों को काटकर बनाई जा रही सुरंगों के मुहानों (पोर्टल्स) पर 'टनल हुड' (Tunnel Hoods) स्थापित किए जा रहे हैं. भारत में पहली बार रेलवे सुरंगों के लिए इस तरह की विशेष तकनीक का डिजाइन और क्रियान्वयन किया जा रहा है. बुलेट ट्रेन (Bullet Train) का यह कॉरिडोर बेहद चुनौतीपूर्ण इलाकों से होकर गुजरता है, जिसमें महाराष्ट्र में सात और गुजरात में एक पहाड़ी सुरंग शामिल है. इन सभी सुरंगों के दोनों छोरों पर टनल हुड लगाए जा रहे हैं. यह भी पढ़ें: Bullet Train Project: मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के काम में आई गति! बीकेसी से शीलफाटा की सुरंग का काम हुआ पूरा, NHSRCL ने दी जानकारी
क्यों जरूरी है टनल हुड? (विज्ञान और जरूरत)
जब कोई बुलेट जैसी हाई-स्पीड ट्रेन (300 किमी/घंटा से अधिक की गति से) अचानक किसी बंद सुरंग में प्रवेश करती है, तो वह अपने आगे मौजूद हवा की विशाल मात्रा को तेजी से ढकेलती है. यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही होती है जैसे किसी सिलेंडर के भीतर पिस्टन घूमता है. हवा के इस अचानक संपीड़न (कंप्रेशन) से शक्तिशाली दबाव तरंगें (प्रेशर वेव्स) उत्पन्न होती हैं, जो सुरंग के भीतर यात्रा करती हैं. यदि इन्हें सही तरीके से नियंत्रित न किया जाए, तो जब ट्रेन सुरंग से बाहर निकलती है, तो एक जोरदार 'टनल बूम' (धमाके जैसी आवाज) पैदा होती है.
टनल हुड कैसे काम करता है?
सुरंगों के मुहाने पर बने ये टनल हुड खुले वातावरण और सुरंग के संकीर्ण स्थान के बीच एक 'ट्रांजिशन जोन' (बदलाव क्षेत्र) के रूप में कार्य करते हैं. इसकी सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें बेहद सावधानी से डिजाइन की गई खिड़कियां या 'प्रेशर-रिलीफ वेंट्स' होते हैं.
जैसे ही बुलेट ट्रेन सुरंग में प्रवेश करती है, संपीड़ित हवा का एक हिस्सा इन खिड़कियों के माध्यम से धीरे-धीरे वायुमंडल में निकल जाता है. इससे हवा का दबाव अचानक नहीं बढ़ता, दबाव तरंगों की तीव्रता कम हो जाती है और टनल बूम की समस्या खत्म हो जाती है. सरल शब्दों में कहें तो टनल हुड ट्रेन और हवा के दबाव को अचानक के बजाय धीरे-धीरे तालमेल बिठाने में मदद करता है.
इस तकनीक के मुख्य लाभ
- ध्वनि प्रदूषण में कमी: सुरंग से बाहर निकलते समय होने वाले टनल बूम और तेज शोर को न्यूनतम करता है, जिससे आस-पास की आबादी और पर्यावरण को कोई परेशानी नहीं होती.
- यात्रियों की सुविधा: यह तकनीक सुरंग के भीतर और बाहर हवा के प्रवाह को सुचारू बनाए रखती है, जिससे ट्रेन के भीतर बैठे यात्रियों को कानों में दबाव महसूस नहीं होता और सफर आरामदायक रहता है.
- सुरक्षित संचालन: 300 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के सुरक्षित और कुशल एयरोडायनामिक संचालन में सहायता मिलती है.
अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन
जापान और यूरोप जैसे देशों में, जहां हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनें चलती हैं, टनल हुड एक सामान्य और अनिवार्य इंजीनियरिंग विशेषता है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में इस तकनीक का अपनाया जाना यह दर्शाता है कि भारत में विश्व स्तरीय सुरक्षा, सुविधा और पर्यावरणीय प्रदर्शन मानकों को सुनिश्चित करने के लिए सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं और उन्नत इंजीनियरिंग समाधानों का उपयोग किया जा रहा है.













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