Mozambique Cyclone: चक्रवात 'जूड' से भारी तबाही, 14 लोगों की मौत, हजारों विस्थापित
उत्तरी मोजाम्बिक में आए उष्णकटिबंधीय चक्रवात जूड ने भारी तबाही मचाई है. इस चक्रवात से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और कई इलाकों में 1 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं.
मापुटो, 15 मार्च : उत्तरी मोजाम्बिक में आए उष्णकटिबंधीय चक्रवात जूड ने भारी तबाही मचाई है. इस चक्रवात से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और कई इलाकों में 1 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. मोजाम्बिक की राजधानी मापुटो में सरकारी प्रवक्ता इनोसेंशियो इम्पिसा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चक्रवात जूड से हुई मौतें ज्यादातर नामपुला और नियासा प्रांतों में हुई. उन्होंने कहा कि दीवारें गिरने, बिजली गिरने और डूबने की वजह से लोगों की जान गई. सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि चक्रवात 'जूड' की वजह से करीब 20,000 घरों को नुकसान पहुंचा. इनमें से 7,000 घर पूरी तरह बर्बाद हो गए, जबकि 13,000 से ज्यादा घरों को आंशिक क्षति हुई. इससे हजारों परिवार बेघर हो गए हैं.
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, चक्रवात 'जूड' से मोजाम्बिक में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है. 30 स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वहीं 59 स्कूलों की 182 कक्षाएं तबाह हो गईं. इससे 17,402 छात्र और 264 शिक्षक प्रभावित हुए हैं. सरकारी प्रवक्ता इनोसेंशियो इम्पिसा ने बताया कि चक्रवात जूड की वजह से सड़कों को भी काफी नुकसान पहुंचा है. खासकर नामपुला प्रांत में छह मुख्य सड़कें पूरी तरह तबाह हो गई हैं. 19 बिजली के खंभे गिर गए, दो पानी की सप्लाई व्यवस्थाएं टूट गईं और 1,262 हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गईं. यह भी पढ़ें : क्यूबा में ब्लैकआउट से हाहाकार, लाखों लोग बिना बिजली के परेशान, ग्रिड फेल होने से अंधेरे में पूरा देश
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों की मदद के लिए हर संभव संसाधन जुटा रही है. उन्होंने बताया कि नौ आश्रय केंद्र शुरू किए गए हैं, जहां नामपुला प्रांत के 1 लाख से ज्यादा लोग अभी शरण लिए हुए हैं. उन्होंने बताया कि प्रभावित प्रांतों में मदद के लिए टीमें भेजी गई हैं और कई जिलों में आपातकालीन केंद्रों को फिर से शुरू कर दिया गया है. प्रवक्ता इनोसेंशियो इम्पिसा ने बताया कि सरकार चक्रवात 'जूड' से प्रभावित लोगों की मदद के लिए कई कदम उठा रही है. इसमें जानकारी फैलाना, लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाना, आश्रय और खाना बांटना, साथ ही सामुदायिक रेडियो के जरिए जागरूकता बढ़ाना शामिल है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 15, 2025 04:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

