Mirzapur Rabies Case: कुत्ते के काटने के 4 महीने बाद भौंकने लगा था 15 वर्षीय करन; डॉक्टरों ने मानी थी लाइलाज स्थिति, 22 दिन के इलाज के बाद हुआ पूरी तरह स्वस्थ
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से मेडिकल साइंस को हैरान कर देने वाला एक दुर्लभ मामला सामने आया है, जहां कुत्ते के काटने के चार महीने बाद रेबीज के गंभीर लक्षणों से जूझ रहे 15 वर्षीय किशोर करन ने पूरी तरह से स्वस्थ होकर नई जिंदगी पाई है.
मिर्जापुर/वाराणसी: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मिर्जापुर (Mirzapur) जिले के कछवां बाजार क्षेत्र में रहने वाले 15 वर्षीय करन का मामला चिकित्सा जगत में चर्चा का विषय बन गया है. कुत्ते के काटने के करीब चार महीने बाद जब किशोर में हाइड्रोफोबिया (पानी से अत्यधिक डर) और कुत्ते की तरह भौंकने जैसी आवाजें निकालने के गंभीर लक्षण विकसित हुए, तो डॉक्टरों ने इसे रेबीज (Rabies) का अंतिम चरण मान लिया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि रेबीज के लक्षण उभरने के बाद मरीज का बचना लगभग असंभव होता है, लेकिन करन ने 22 दिनों के इलाज और टीकाकरण के बाद इस घातक स्थिति को मात देकर पूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया है.
कैसे हुआ था कुत्ता काटने का हादसा और छूटा टीकाकरण?
करन के अनुसार, यह घटना 20 दिसंबर 2025 को वाराणसी के हरहुआ में अपने मामा के घर एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी:
- घटनाक्रम: पड़ोस में पाले गए एक देसी कुत्ते को 5-6 साल का बच्चा कुछ खिला रहा था. जब करन ने बच्चे को अपनी ओर खींचा, तो कुत्ते ने उसके हाथ पर काट लिया.
गलतफहमी से छूटा टीका: स्थानीय स्तर पर करन को टिटनेस का इंजेक्शन लगाया गया. करन जब अस्पताल में रेबीज का टीका लगवाने पहुंचा, तो अत्यधिक भीड़ के बीच एक स्वास्थ्य कर्मी ने कथित तौर पर यह कह दिया कि टिटनेस का टीका लग चुका है तो रेबीज की जरूरत नहीं है, जिसके चलते उसने टीका नहीं लगवाया.
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चार महीने बाद अचानक बिगड़ी तबीयत, निकलने लगीं अजीब आवाजें
करन के पिता भैयालाल के मुताबिक, कुत्ते के काटने के करीब चार महीने तक करन पूरी तरह सामान्य रहा। लेकिन 13 मार्च को अचानक वह घर के बाहर गिर पड़ा.
- गंभीर लक्षण: अगली सुबह वह दोबारा बेहोश होकर गिरा और बोलने में असमर्थ हो गया. उसके मुंह से लार टपकने लगी, वह पानी देखकर कांपने लगा और कुत्ते की तरह भौंकने जैसी आवाजें निकालने लगा.
- अस्पतालों के चक्कर: परिजन पहले झाड़-फूंक के लिए मंदिर ले गए, फिर कछवां क्रिश्चियन अस्पताल और मिर्जापुर जिला अस्पताल होते हुए उसे बीएचयू (BHU) ट्रॉमा सेंटर वाराणसी ले जाया गया.
- डॉक्टरों ने छोड़ दी थी उम्मीद: परिजनों के अनुसार, बीएचयू में डॉक्टरों ने कहा कि मरीज रेबीज के अंतिम चरण में है, लोगों को काटने का प्रयास कर रहा है और उसके पास तीन-चार दिन से ज्यादा समय नहीं है. अन्य अस्पतालों ने भी पानी छिड़ककर देखा और मरीज की स्थिति को लाइलाज बताया.
हरहुआ पीएचसी में 22 दिन चला इलाज और 7 टीकों से पलटी बाजी
निराश होकर परिजन करन को वाराणसी के हरहुआ ले गए, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की एक सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मी और पीएचसी अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार की देखरेख में उसका सघन इलाज शुरू किया गया:
- एंटी-रेबीज कोर्स: करन को तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन की खुराक दी गई, जिसके 24 घंटे के भीतर उसकी आक्रामकता में कमी आने लगी.
- कुल 7 इंजेक्शन: अगले 22 दिनों के दौरान उसे 5 नियमित टीके लगाए गए। घर लौटने के बाद जब थोड़ी समस्या फिर महसूस हुई, तो 1-1 हफ्ते के अंतराल पर 2 अतिरिक्त बूस्टर डोज दिए गए, जिससे कुल टीकों की संख्या 7 हो गई.
- पूरी तरह स्वस्थ: करन अब पूरी तरह से स्वस्थ है, 9वीं कक्षा में नियमित पढ़ाई कर रहा है और सामान्य जीवन जी रहा है.
क्या कहते हैं चिकित्सा विशेषज्ञ?
हरहुआ पीएचसी के अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार और प्रतापगढ़ जिला अस्पताल के डॉ. देवेंद्र प्रताप पटेल के अनुसार यह मामला अध्ययन का विषय है:
- संक्रमण का मार्ग: हाथ पर कुत्ते का काटना सिर या गर्दन की तुलना में मस्तिष्क से अधिक दूरी पर होता है, जिससे वायरस को तंत्रिका तंत्र के जरिए दिमाग तक पहुंचने में लंबा समय (4 महीने) लगा.
- पालतू कुत्ते की संभावना: जिस कुत्ते ने काटा था, संभवतः वह पूर्व में आंशिक रूप से वैक्सीनेटेड रहा हो, जिससे वायरस का लोड कम रहा.
- वैज्ञानिक सावधानी: विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिकवरी असाधारण और दुर्लभ है, लेकिन इसे इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि रेबीज का पूर्ण इलाज मिल गया है. कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन-पानी से धोना और समय पर पूरा पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) टीकाकरण कराना ही जान बचाने का एकमात्र सुरक्षित उपाय है.