Vande Mataram New Rules: 'वंदे मातरम्' के लिए गृह मंत्रालय के नए दिशानिर्देश जारी; जानिए क्या है प्रोटोकॉल
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत के राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन और वादन को लेकर आधिकारिक दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल जारी किए हैं. नए नियमों के अनुसार आधिकारिक कार्यक्रमों में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित सभी छह छंदों का गायन अनिवार्य होगा, जिसकी निर्धारित अवधि 3 मिनट 10 सेकंड होगी.
नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) ने भारत के राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' (Vande Mataram) के गायन, वादन और उसके सम्मान से जुड़े प्रोटोकॉल के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नए प्रोटोकॉल के तहत अब आधिकारिक सरकारी और औपचारिक आयोजनों में राष्ट्रगीत के पूरे छह छंदों (Six Stanzas) का गायन या वादन किया जाएगा, जिसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) निर्धारित की गई है.
यह दिशा-निर्देश ऐसे समय में विशेष चर्चा में आए हैं जब हाल ही में स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में पूरे गीत के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ था और महाराष्ट्र के ठाणे में एक सरकारी कार्यक्रम में मूल रचना के बजाय फिल्मी संस्करण बजने पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को खेद व्यक्त करना पड़ा था. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रगीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भी इस मानकीकरण को अहम माना जा रहा है. यह भी पढ़ें: Independence Day 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से गूंजेगा 'वंदे मातरम'; 150 वर्ष पूरे होने पर होगा ऐतिहासिक आयोजन
क्या हैं 'वंदे मातरम्' के नए आधिकारिक नियम?
गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में राष्ट्रगीत के गायन को मानकीकृत किया गया है:
- आधिकारिक संस्करण और अवधि: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित मूल छह छंदों को आधिकारिक रूप दिया गया है। इसका निर्धारित वादन/गायन समय 3 मिनट 10 सेकंड का होगा.
- शुरुआती संकेत: बैंड द्वारा राष्ट्रगीत की प्रस्तुति से पहले ड्रम या बिगुल/मृदंग की सात कदमों की धीमी ताल (Roll of Drums) के साथ औपचारिक शुरुआत का संकेत दिया जाएगा.
- सामूहिक गायन: आयोजनों में प्रतिभागियों को एक साथ गाने के लिए उचित साउंड सिस्टम की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर प्रतिभागियों में गीत के आधिकारिक बोल वितरित करने का सुझाव दिया गया है.
राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान: प्रस्तुति का क्रम
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ('वंदे मातरम्') और राष्ट्रगान ('जन गण मन') दोनों को शामिल किया जाता है, तो पहले 'वंदे मातरम्' गाया या बजाया जाएगा, जिसके बाद 'जन गण मन' की प्रस्तुति होगी.
यह व्यवस्था इसलिए तय की गई है ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान में एकरूपता बनी रहे और प्रोटोकॉल को लेकर कोई असमंजस न रहे.
किन औपचारिक अवसरों पर बजाया जाएगा राष्ट्रगीत?
दिशा-निर्देशों के अनुसार आधिकारिक छह छंदों वाला संस्करण प्रमुख रूप से निम्नलिखित अवसरों पर अनिवार्य रूप से बजाया जाएगा:
- नागरिक अलंकरण समारोहों (Civil Investiture Ceremonies जैसे पद्म पुरस्कार आदि) में.
- औपचारिक राजकीय समारोहों में राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान के समय.
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आधिकारिक कार्यक्रमों में राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन और प्रस्थान के अवसर पर.
- परेड के दौरान जब राष्ट्रीय ध्वज लाया जाए.
- आकाशवाणी (AIR) और दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले और बाद में.
- सांस्कृतिक व औपचारिक आयोजनों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समय.
- इसके अलावा, सभी स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे अपने दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से करें ताकि विद्यार्थियों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़े.
नागरिकों और दर्शकों के लिए क्या है आचार संहिता?
- सावधान की मुद्रा (Attention): जब भी किसी सार्वजनिक सभा या आधिकारिक कार्यक्रम में 'वंदे मातरम्' गाया या बजाया जाएगा, वहां मौजूद सभी नागरिकों से सावधान (Attention) की मुद्रा में खड़े रहने की अपेक्षा की गई है.
- सिनेमा हॉल और फिल्मों के लिए छूट: दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट अपवाद रखा गया है कि यदि किसी न्यूजरील, वृत्तचित्र (Documentary) या फीचर फिल्म के हिस्से के रूप में 'वंदे मातरम्' बजता है, तो दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं है, ताकि फिल्म के प्रदर्शन में व्यवधान या अव्यवस्था न हो.
हालिया राजनीतिक विवाद और घटनाओं की पृष्ठभूमि
इन नियमों की प्रासंगिकता हाल के दो प्रमुख घटनाक्रमों के बाद और अधिक बढ़ गई:
- स्वतंत्रता दिवस विवाद: 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पूरे 'वंदे मातरम्' के गायन के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी. भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत का अनादर बताया था, जबकि कांग्रेस ने स्पष्ट किया था कि वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे के खड़े रहने के कारण केवल कुर्सी मंगवाने की बात कही गई थी और अंततः पूरा गीत गाया गया.
- ठाणे कार्यक्रम की त्रुटि: महाराष्ट्र के ठाणे में एक सरकारी समारोह में आयोजकों ने मूल राष्ट्रगीत के बजाय लता मंगेशकर का एक दूसरा संगीतबद्ध गाना बजा दिया था, जिसके चलते दर्शकों को चार मिनट तक खड़े रहना पड़ा और बाद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए थे.