Child Safety On Social Media: इंस्टाग्राम पर चाइल्ड एब्यूज विज्ञापनों पर घिरी मेटा; सरकार बोली- 'केवल मध्यस्थ मानकर छूट नहीं मिलेगी'

इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSAM) के विज्ञापनों को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सोशल मीडिया दिग्गज मेटा ने अपनी चूक स्वीकार कर ली है. केंद्र सरकार ने तकनीकी कंपनी को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल एक 'मध्यस्थ' होने का दावा कर अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती.

Meta CEO Mark Zuckerberg (Photo Credit: Wikimedia Commons)

नई दिल्ली: फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा (Meta) द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण से संबंधित विज्ञापनों को मंजूरी दिए जाने के मामले ने बड़ा तूल पकड़ लिया है. केंद्र सरकार के कड़े रुख के बाद मेटा ने इस गंभीर चूक को स्वीकार किया है और भारत में बाल सुरक्षा नियमों के अनुपालन के लिए प्रणाली में बड़े बदलाव की सहमति दी है.

The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की कड़ी फटकार के बाद मेटा ने माना है कि उसके विज्ञापन सत्यापन और मॉडरेशन सिस्टम में खामियां थीं. यह भी पढ़ें: Meta Child Safety: भारत सरकार की सख्ती के बाद झुका मेटा, बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी भारतीय एजेंसियों को देने पर जताई सहमति

सरकार की दो टूक: 'सिर्फ इंटरमीडियरी बताकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते'

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने मेटा को स्पष्ट संदेश दिया है कि उसका भूमिका केवल एक निष्क्रिय मंच (Passive Platform) की नहीं है:

अब सीधे भारत के साइबर क्राइम पोर्टल (I4C) को भेजी जाएंगी शिकायतें

Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के निरंतर दबाव के बाद मेटा ने अपनी रिपोर्टिंग व्यवस्था में बड़ा नीतिगत बदलाव किया है:

इंस्टाग्राम पर चाइल्ड एब्यूज विज्ञापनों पर घिरी मेटा

NCPCR की जांच: विज्ञापनों में 'रेप वीडियो' जैसे कीवर्ड्स का इस्तेमाल

यह पूरा विवाद तब सामने आया जब एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया जांच (बीबीसी आई) में खुलासा हुआ कि इंस्टाग्राम पर ऐसे सशुल्क विज्ञापन चल रहे थे जिनमें "चाइल्ड वीडियो" और "रेप वीडियो" जैसे कीवर्ड्स के जरिए उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जा रहा था, जहां अवैध सामग्री बेची जा रही थी:

मेटा के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी बाल शोषण के खिलाफ लड़ाई में सरकार के साथ मिलकर काम करने और अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय अन्य प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों पर भी बाल सुरक्षा संबंधी फिल्टर और सख्त एआई मॉडरेशन लागू करने के लिए निगरानी बनाए हुए है.

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