भारत की कूटनीतिक रणनीति के आगे ऐसे झुका चीन, आर्थिक नुकसान का था डर

‘जैश-ए-मोहम्मद’ सरगना मसूद अजहर को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित कर दिया.

मसूद अजहर (Photo Credits: Twitter)

‘जैश-ए-मोहम्मद’ (Jaish-e-Mohammad) सरगना मसूद अजहर (Masood Azhar) को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने ‘वैश्विक आतंकवादी’ (Global Terrorist) घोषित कर दिया. भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने जयपुर में एक चुनावी रैली में मसूद अजहर को बुधवार को आतंकवादी घोषित किए जाने पर संतोष जताते हुए इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत (India) के लंबे संघर्ष की बड़ी सफलता बताया. पीएम मोदी ने इसके साथ ही कहा कि यह गर्व का दिन है और इस बात का प्रतीक है कि आज भारत की आवाज दुनिया भर में सुनी जाती है. आइए जानते हैं कि चीन ने कैसे अपने रुख में बदलाव किया और भारत को यह बड़ी कामयाबी मिली.

भारत ने कूटनीति के जरिए बनाया दबाव

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने वैश्विक स्तर पर मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकवादी घोषित किए जाने को लेकर अपनी कोशिश शुरू कर दी थी. हालांकि मसूद अजहर के खिलाफ इसी साल 13 मार्च को यूएनएससी में प्रस्ताव पारित नहीं हो सका तो अमेरिका की तरफ से यह कहा गया कि वह दूसरे विकल्प पर विचार कर रहा है. इसके साथ ही फ्रांस ने भी कहा कि वह मसूद अजहर पर अंकुश लगाने के लिए दूसरे विकल्पों में सहयोग करने को तैयार है. बता दें चीन इससे पहले तीन मौकों पर प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज कराकर खारिज करा चुका था. बाद में चीन की ओर से गंभीर चर्चा किए जाने संबंधी बयान के बाद अमेरिका ने भारत का साथ दिया. फिर बाद में फ्रांस और इंग्लैंड भी इसके समर्थन में आ गए. यह भी पढ़ें-भारत द्वारा बनाये गए दबाव के आगे झुका पाकिस्तान, मसूद अजहर पर लगाये गये प्रतिबंधो को तत्काल करेगा लागू

इस तरह दबाव में आया चीन

चीन पर लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव के साथ यूएनएससी में चीन की तरह स्थायी सदस्य और करीबी दोस्त रूस ने भी चीन पर दबाव बनाया. ऐसे में चीन को यह लगा कि अगर वह मसूद अजहर को बचाता है तो दुनियाभर में यह संदेश जाएगा कि आतंक को पनाह देने वाले देश पाकिस्तान को बचाने की कोशिश कर रहा है. इसके साथ ही पुलवामा हमले के बाद भारत की ओर से किए गए बालाकोट हवाई हमले पर वैश्विक स्तर सकारात्मक प्रतिक्रिया ने भी चीन को अपने फैसले पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया. चीन को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जनमत में खुद के अलग-थलग पड़ जाने का डर सताने लगा और फिर बाद में उसने अपने रूख में बदलाव करने के संकेत दिए.

इसके साथ ही मार्च महीने में चीनी सामानों के बहिष्कार को लेकर हैशटैग चीन और बॉयकाट चीनी प्रॉडक्टस के साथ भारतीय सोशल मीडिया में यह ट्रेंड करने लगा था. मार्च 2018 तक भारत और चीन में 89.71 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है जिसमें चीन का शेयर काफी ज्यादा है. बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने से उसकी संपत्ति जब्त रहेगी, यात्रा पर प्रतिबंध रहेगा और हथियार संबंधी पाबंदी रहेगी.

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