Reliance Power FEMA Action: अनिल अंबानी की रिलायंस पावर पर ईडी की बड़ी कार्रवाई; FEMA नियमों के तहत 2,032 करोड़ की संपत्तियां जब्त, जानें क्या है पूरा मामला
प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर लिमिटेड के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी की 2,032.81 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को जब्त कर लिया है. जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में रिलायंस पावर के बैंक बैलेंस और उसकी सहायक कंपनी सासन पावर लिमिटेड में शेयरधारिता शामिल है.
नई दिल्ली: विदेशी मुद्रा नियमों के उल्लंघन को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड (Reliance Power Ltd) पर सख्त कदम उठाया है.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने फेमा (FEMA) के तहत 2,032.81 करोड़ रुपये की घरेलू संपत्तियों की कुर्की का आदेश जारी किया है. एजेंसी का कहना है कि यह संपत्ति उस विदेशी मुद्रा के मूल्य के बराबर है, जिसे नियमों को ताक पर रखकर देश से बाहर अवैध रूप से रखा गया था.
सेबी की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी जांच
इस मामले की शुरुआत भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से मिले अहम वित्तीय इनपुट के आधार पर हुई थी:
- 2,101 करोड़ का राइट-ऑफ: सेबी की जांच में यह बात सामने आई थी कि रिलायंस पावर की बैलेंस शीट में 2,101.46 करोड़ रुपये के राइट-ऑफ और प्रावधान दर्ज किए गए थे.
- टैक्स हेवन देशों में निवेश: यह भारी भरकम रकम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) और केमैन आइलैंड्स स्थित कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और अग्रिम भुगतानों (Advances) से जुड़ी थी.
- छापेमारी और साक्ष्य: इनपुट के आधार पर ईडी ने मार्च 2026 में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए थे.
ED ने अनिल अंबानी की रिलायंस पावर की 2,032 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की
एफसीसीबी फंड्स की राउंड-ट्रिपिंग और बीवीआई रूट
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में जटिल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन और फंड्स के डायवर्जन का खुलासा हुआ है:
- 2006 का एफसीसीबी इश्यू: रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (RNRL) — जिसका बाद में रिलायंस पावर में विलय हो गया — ने वर्ष 2006 में फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCB) के जरिए 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए थे.
- सिंगापुर से जिनेवा ट्रांसफर: इस राशि में से 275 मिलियन डॉलर उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर सहायक कंपनी (RNRL-S) में निवेश किए गए. इसके बाद इन फंड्स को स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) एसए में जमा कराया गया.
- मुखौटा कंपनियों को लोन: ईडी का आरोप है कि जिनेवा में जमा इन पैसों को गारंटी (Collateral) के रूप में रखकर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स की शेल कंपनियों को भारी कर्ज दिलवाया गया. जांच में पाया गया कि इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण भारत से ही फ्रंट पर्सन्स (डमी निदेशकों) के जरिए रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा किया जा रहा था.
- मॉरीशस के रास्ते राउंड-ट्रिपिंग: एजेंसी का दावा है कि इस कर्ज की रकम का इस्तेमाल मॉरीशस स्थित संस्थाओं के जरिए भारत में फंड्स की 'अस्थायी राउंड-ट्रिपिंग' करने और समूह व बाहरी पक्षों के फायदे के लिए किया गया.
फर्जी और बैकडेटेड दस्तावेजों से लोन छुपाने की कोशिश
जांच एजेंसी के अनुसार, जब बीवीआई की मुखौटा कंपनियां कर्ज चुकाने में पूरी तरह नाकाम रहीं, तो पूरे लेन-देन पर पर्दा डालने के लिए हेराफेरी की गई:
- बैकडेटेड अनुबंध: वित्तीय विसंगतियों को छिपाने के लिए बैकडेटेड (पुरानी तारीखों वाले) दस्तावेज तैयार किए गए, ताकि यह दिखाया जा सके कि सिंगापुर और इंडोनेशियाई सहायक कंपनियों ने बीवीआई संस्थाओं को सामान्य व्यावसायिक अग्रिम (Business Advances) दिए थे.
- फेमा की धारा 37A का इस्तेमाल: विदेशी मुद्रा को अवैध रूप से बाहर रोकने के आरोप में ईडी ने फेमा की धारा 37A के विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए रिलायंस पावर के बैंक खातों और मध्य प्रदेश स्थित 3,960 मेगावाट की सासन पावर लिमिटेड में उसकी शेयरधारिता को सीज कर दिया है.