Satya Niketan Building Collapse: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार का बड़ा कदम; पीजी के लिए अनिवार्य लाइसेंस, रेंट कैप और CCTV पर नया ड्राफ्ट बिल तैयार

दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला निजी पीजी/हॉस्टल इमारत के ढहने से पांच छात्रों सहित सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे पेइंग गेस्ट (PG) आवासों के नियमन के लिए कड़े कानूनी प्रावधान तैयार किए हैं. सरकार द्वारा प्रस्तावित 'पेइंग गेस्ट एकॉमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल' के तहत सभी पीजी संचालकों के लिए नगर निगम से अनिवार्य लाइसेंस लेना, पुलिस सत्यापन, फायर व स्ट्रक्चरल सेफ्टी एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य होगा.

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में हाल ही में अवैध रूप से संचालित पांच मंजिला पीजी इमारत के अचानक जमींदोज होने से मची त्रासदी के बाद दिल्ली सरकार हरकत में आ गई है. इस दर्दनाक हादसे में पांच छात्रों और दो मजदूरों सहित सात लोगों की जान चली गई थी.

राजधानी में अब तक लगभग अनियंत्रित रहे निजी छात्र आवास और पीजी सेक्टर को सख्त कानूनी दायरे में लाने के लिए सरकार ने एक व्यापक नियामक ढांचा (Draft Bill) तैयार किया है. इस मसौदे का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा, उचित किराया और संचालकों की जवाबदेही तय करना है. यह भी पढ़ें: Who Is Hariram Gupta: सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के मामले में गिरफ़्तार मालिक हरिराम गुप्ता कौन हैं? जानें उनके बारे में सब कुछ

अनिवार्य लाइसेंस और 90 दिनों में सुरक्षा मंजूरी

प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, दिल्ली में किसी भी इमारत को पीजी या निजी हॉस्टल के रूप में संचालित करने के लिए सख्त मानकों को पूरा करना होगा:

मनमाने किराए और डिपॉजिट पर सीमा (Rent Cap)

राजधानी के मुखर्जी नगर, लक्ष्मीनगर, राजेंद्र नगर और नॉर्थ कैंपस जैसे छात्र बहुल इलाकों में संचालकों द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने किराए पर नकेल कसने की तैयारी है:

सीसीटीवी निगरानी, नाइट गार्ड और 15 मिनट में वार्डन की उपलब्धता

छात्रों और कामकाजी युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य किए जा रहे हैं:

'GovPG' सिंगल-विंडो पोर्टल और संस्थागत निगरानी

छात्रों की सुविधा और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने की योजना है:

दो महीने के भीतर कानून को अंतिम रूप देने का लक्ष्य

सत्य निकेतन हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में व्यावसायिक रूप से उपयोग की जा रही पुरानी इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट के आदेश दिए हैं. वहीं, शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया है कि यह ढांचा निजी छात्र आवासों में जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जा रहा है.

प्रस्तावित विधेयक को सभी हितधारकों, छात्र संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद आगामी दो महीनों के भीतर अंतिम रूप देकर विधानसभा में पेश किया जाएगा.

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