Maharashtra Drought Crisis: महाराष्ट्र में सूखे का संकट, 19 जिलों के 83 तहसीलों में 20 दिनों से बारिश नहीं, खरीफ फसलों पर भारी खतरा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस स्थिति पर समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र को अलर्ट पर रहने और शुरुआती राहत कार्य तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
Maharashtra Drought Crisis: महाराष्ट्र में मानसून के लंबे ब्रेक के कारण खरीफ फसलों पर गंभीर संकट मंडराने लगा है. राज्य के 19 जिलों की 83 तहसीलों (तालुका) में पिछले 20 से अधिक दिनों से बारिश नहीं हुई है. इसके चलते राज्य के बड़े हिस्से में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है और फसलों के नुकसान तथा पेयजल की किल्लत की आशंका बढ़ गई है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस स्थिति पर समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र को अलर्ट पर रहने और शुरुआती राहत कार्य तैयार करने के निर्देश दिए हैं. यह भी पढ़े: Mumbai Weather Tomorrow: मुंबई में बुधवार को हल्की बौछारों के साथ 29°C तक पहुंच सकता है अधिकतम तापमान
तुरंत क्यों घोषित नहीं हो सकता सूखा?
कैबिनेट बैठक के बाद राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि नियमों के कारण तुरंत औपचारिक सूखा घोषित नहीं किया जा सकता. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और केंद्रीय सूखा प्रबंधन के दिशानिर्देशों के तहत फसलों के नुकसान का पंचनामा (मूल्यांकन) और जमीनी सत्यापन 5 अक्टूबर के बाद ही किया जा सकता है.
कृषि विभाग के अनुसार, यदि समय से पहले मूल्यांकन किया जाता है, तो प्रभावित किसान केंद्रीय वित्तीय सहायता के लिए अपात्र हो सकते हैं. इसलिए 5 अक्टूबर के बाद ही आधिकारिक सर्वेक्षण प्रक्रिया शुरू होगी.
मराठवाड़ा और विदर्भ सबसे अधिक प्रभावित
राज्य के मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिमी महाराष्ट्र के क्षेत्र इस सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.
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बीड: बोए गए क्षेत्र में 37.21% फसल का नुकसान दर्ज किया गया है.
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जालना: 27.83% फसलें प्रभावित हुई हैं.
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छत्रपति संभाजीनगर: 7.06% नुकसान की सूचना है.
लातूर, धाराशिव और परभणी में सोयाबीन, मूंग, उड़द और कपास की फसलें पानी की कमी से सूख रही हैं. इसके अलावा, सोयाबीन की फसल में 'येलो मोज़ेक वायरस' के प्रसार ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.
विदर्भ के अमरावती, अकोला, बुलढाणा और वाशिम में सोयाबीन और कपास की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. वहीं नागपुर, चंद्रपुर और गढ़चिरौली में बारिश की कमी के कारण धान (Paddy) की रोपाई में देरी दर्ज की गई है.
विपक्ष की मांग और सरकारी उपाय
विपक्षी दलों के नेताओं, जिनमें कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार और सोलापुर सांसद प्रणिती शिंदे शामिल हैं, ने सरकार से बिना 5 अक्टूबर का इंतजार किए तत्काल सूखा घोषित करने और राहत पैकेज देने की मांग की है. उन्होंने किसानों के कर्ज माफ करने, चारा शिविर स्थापित करने और पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की है.
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मौजूदा बांधों के पानी को मुख्य रूप से पीने के पानी के रूप में सुरक्षित रखें. साथ ही, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता का आकलन किया जा रहा है.