देश

Mahakumbh 2025: संगम की स्वच्छता की पहरेदारी कर रहे प्रयागराज के 500 'गंगा प्रहरी'

प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम सिर्फ दो नदियों का नहीं बल्कि सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों लोगों की आस्था का भी संगम है. हर साल देश और विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों लोग यहां के स्वच्छ और निर्मल जल में आस्था की डुबकी लगाकर सनातन परंपरा का निर्वहन करते हैं.

Mahakumbh 2025: संगम की स्वच्छता की पहरेदारी कर रहे प्रयागराज के 500 'गंगा प्रहरी'
Mahakumbh-2025 (img: file photo)

प्रयागराज, 17 नवंबर : प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम सिर्फ दो नदियों का नहीं बल्कि सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों लोगों की आस्था का भी संगम है. हर साल देश और विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों लोग यहां के स्वच्छ और निर्मल जल में आस्था की डुबकी लगाकर सनातन परंपरा का निर्वहन करते हैं. तीर्थों के तीर्थ संगम के प्रति लोगों की यह आस्था यूं ही बनी रहे, इसके लिए 500 गंगा प्रहरी दिन-रात दोनों नदियों की स्वच्छता और निर्मलता को बनाए रखने में जुटे हुए हैं.

महाकुंभ 2025 के दौरान जब करोड़ों लोग संगम में पवित्र स्नान करेंगे तब भी यही गंगा प्रहरी नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पहरेदार बनकर खड़े रहेंगे. योगी सरकार इन्हें ट्रेनिंग के साथ ही रोजगार से जोड़कर प्रोत्साहित कर रही है. यह भी पढ़ें : कैलाश गहलोत ने दिल्ली के परिवहन मंत्री पद से इस्तीफा दिया, ‘आप’ का साथ छोड़ा

प्रयागराज में छोटे बड़े करीब 25 घाट हैं. महाकुंभ के दौरान इन सभी घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ने वाला है. ऐसे में घाटों के साथ साथ गंगा और यमुना नदी की स्वच्छता को बनाए रखना एक चुनौती होगी. हालांकि, प्रत्येक घाट पर तैनात गंगा प्रहरी इसको लेकर आश्वस्त हैं. वह निरंतर नदियों और घाटों की सफाई में जुट हुए हैं और साथ ही श्रद्धालुओं को भी नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक कर रहे हैं. प्रत्येक घाट पर 15 से 20 गंगा प्रहरी गंगा और यमुना दोनों ही नदियों की स्वच्छता को बरकरार रखने के लिए दिन रात काम कर रहे हैं. महाकुंभ के दौरान यह शिफ्ट में काम करेंगे. वहीं, पूरे देश से चुनिंदा 200 से अधिक गंगा प्रहरी यहां बुलाए जा रहे हैं, ताकि गंगा और यमुना की स्वच्छता बनाए रखने में जनशक्ति की कमी न हो.

प्रयागराज में 'नमामि गंगे परियोजना' के तहत वन्य जीव संस्थान के माध्यम से ये गंगा प्रहरी लगातार नदियों और घाटों की स्वच्छता के साथ साथ जलीय जीवों के संरक्षण में जुटे हुए हैं. जलज योजना में असिस्टेंट कॉर्डिनेटर की भूमिका निभा रहे चंद्रा कुमार निषाद के अनुसार, गंगा और यमुना नदियों में लाखों लोग डुबकी लगाते हैं, लेकिन यदि जल स्वच्छ न हो तो उनकी आस्था को ठेस पहुंचती है. हमारी टीम दिन रात घाटों पर स्वच्छता अभियान चलाती है. घाट के साथ साथ नदी में जो अपशिष्ट पदार्थ होते हैं उन्हें भी जाल के माध्यम से निकालकर नदी को स्वच्छ रखने का प्रयास किया जाता है. इसके अतिरिक्त हम श्रद्धालुओं को भी जागरूक करते हैं कि वो घाट और नदी दोनों ही जगह स्वच्छता का ध्यान रखें. इसमें कूड़ा या फूल माला न फेंकें. इसके बावजूद जो लोग फूल या अन्य गंदगी फेंकते हैं तो हम तुरान जाल और अन्य इक्विपमेंट से उठा लेते हैं.

उन्होंने बताया कि डबल इंजन की सरकार नदियों की स्वच्छता पर अच्छा काम कर रही है. 'नमामि गंगे परियोजना' के तहत जो सबसे अच्छा काम हुआ है वो यह की नदियों की सुरक्षा और स्वच्छता की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों को दे दी गई है. जिन लोगों की आय का प्रमुख स्रोत जलीय जीवों का शिकार था, वही अब उनके रक्षक बन गए हैं. इसकी वजह से नदी में कछुओं, डॉल्फिन, मछलियों की संख्या में वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि यदि जलीय जीवों को बचा लिया जाए तो नदी कभी गंदी नहीं होगी, क्योंकि ये जीव नदी को साफ करने का कार्य करते हैं.

वन विभाग के आईटी हेड आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि योगी सरकार ने स्थानीय लोगों को जलीय जीवों के शिकार के बजाय अन्य आय के स्रोतों से जोड़ने की पहल की है, जिससे जलीय जीवों का संरक्षण सुनिश्चित हुआ है. अर्थ गंगा योजना (जलज योजना) के अंतर्गत स्थानीय महिलाओं को सिलाई, ब्यूटी पार्लर, धूपबत्ती, जूट के थैले बनाने की ट्रेनिंग निशुल्क कराई जा रही है. अब तक 100 से 150 गांवों की 700 से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग और रोजगार से जोड़ा गया है.

वहीं, पुरुषों को भी गोताखोरी के अतिरिक्त वन्य विभाग से अन्य टास्क दिए जा रहे हैं, जिससे इन्हें आर्थिक सहायता भी मिल रही है. महाकुंभ में इन्हें एक निश्चित मानदेय भी प्रदान किया जाता है. इससे नदियों पर इनकी निर्भरता कम हुई है और अब ये नदियों की सुरक्षा के सारथी बन गए हैं. यही लोग घाटों पर अभियान चलाकर लोगों को गंगा और यमुना की स्वच्छता के लिए जागरूक कर रहे हैं.

चंद्रा कुमार निषाद ने बताया कि महाकुंभ के लिए योगी सरकार की ओर से उन्हें ट्रेनिंग दी गई है. स्वच्छ महाकुंभ के साथ ही उनकी टीम लोगों की मदद भी करेगी. लोगों को स्नान कराने के साथ साथ यदि घाट पर कोई खो जाता है तो उसको खोया पाया केंद्र तक पहुंचाया जाएगा. यही नहीं, स्नानार्थियों को घर पर उपलब्ध सेवाओं और सुविधाओं से भी परिचित कराया जाएगा. सुरक्षा कर्मियों के साथ ही हमारी टीम भी घाट पर स्नानार्थियों पर नजर रखेगी और किसी भी आपात स्थिति में लोगों की मदद और उनकी जान बचाने के लिए तत्परता से कार्य करेगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 17, 2024 01:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).