Vande Mataram Mix-Up: ठाणे में सरकारी कार्यक्रम के दौरान 'वंदे मातरम्' की जगह बजा लता मंगेशकर का फिल्मी गाना; एकनाथ शिंदे ने मांगी माफी
महाराष्ट्र के ठाणे स्थित गडकरी रंगायतन में आयोजित एक सरकारी समारोह में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के मूल स्वरूप की जगह लता मंगेशकर द्वारा गाया गया बॉलीवुड/एल्बम वर्जन बजने से असहज स्थिति पैदा हो गई. कार्यक्रम में मौजूद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आयोजकों की इस चूक पर नाराजगी जताई और मंच से माफी मांगते हुए भविष्य में सतर्क रहने की हिदायत दी.
ठाणे: महाराष्ट्र (Maharashtra) के ठाणे (Thane) में परिवहन विभाग द्वारा आयोजित एक आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम में उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' (Vande Mataram) के आधिकारिक स्वरूप के स्थान पर पार्श्व गायिका लता मंगेशकर का एक फिल्मी/एल्बम गाना बजा दिया गया.
कार्यक्रम में उपस्थित महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक सहित पूरा सभागार लगभग चार मिनट तक मौन खड़ा रहा. इसके बाद राष्ट्रगान और महाराष्ट्र का राज्य गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में अपने संबोधन के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस चूक के लिए खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी. यह भी पढ़ें: Eknath Shinde's Fitness Secret: व्यस्त शेड्यूल के बीच महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का फिटनेस मंत्र, रोजाना करते हैं 60 मिनट वर्कआउट
गडकरी रंगायतन में क्या हुआ?
यह कार्यक्रम ठाणे के गडकरी रंगायतन सभागार में गैर-मराठी भाषी ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने के उद्देश्य से चलाए गए 'हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा पाठ्यक्रम अभियान' के समापन समारोह के अवसर पर आयोजित किया गया था.
कार्यक्रम की शुरुआत में जब उद्घोषक ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन की घोषणा की, तो साउंड सिस्टम पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित मूल राष्ट्रगीत की जगह लता मंगेशकर का गाया हुआ एक दूसरा संगीतबद्ध संस्करण बजने लगा. प्रोटोकॉल के सम्मान में मंच पर मौजूद मंत्रियों और दर्शकों को करीब चार मिनट तक स्तब्ध खड़े रहना पड़ा.
ठाणे कार्यक्रम में वंदे मातरम का लता मंगेशकर संस्करण बजाया गया, जिसमें एकनाथ शिंदे ने भाग लिया
एकनाथ शिंदे ने माफ़ी मांगी
एकनाथ शिंदे ने जताई नाराजगी, संयोजकों को दी हिदायत
गाना समाप्त होने और कार्यक्रम आगे बढ़ने के बाद जब एकनाथ शिंदे ने मंच संभाला, तो उन्होंने इस तकनीकी और मानवीय गलती पर संयोजकों को फटकार लगाई.
शिंदे ने कहा:
- "राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान या देशभक्ति से जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों में इस प्रकार की लापरवाही कतई स्वीकार्य नहीं है."
- उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक और शासकीय कार्यक्रमों में केवल संसद और संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त आधिकारिक 'वंदे मातरम्' का ही वादन होना चाहिए.
- उन्होंने आयोजकों को सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में ऑडियो ट्रैक और प्रोटोकॉल की पहले से गहन जांच की जाए.
'वंदे मातरम्' का ऐतिहासिक महत्व
'वंदे मातरम्' की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में की थी. संस्कृत और बांग्ला के मिश्रण में लिखे गए इस छह छंदों वाले गीत को पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था.
आजादी के आंदोलन का मुख्य उद्घोष रहा यह गीत देश की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है. हालांकि, कई कलाकारों द्वारा इसके विभिन्न रूपांतरण गाए गए हैं, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों में केवल निर्धारित आधिकारिक धुन और मूल संस्करण बजाने का ही प्रोटोकॉल है.