बलूचिस्तान में लोगों की हत्याएं पाकिस्तानी मानवाधिकार रिकॉर्ड के सबसे काले अध्यायों में से एक: CM हिमंत बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान में वर्षों से हो रही न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय बनी हुई हैं. सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं, जिन्हें आमतौर पर 'मारो और फेंको नीति' के रूप में जाना जाता है, पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है.
गुवाहाटी, 2 मई : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बलूचिस्तान में वर्षों से हो रही न्यायेतर हत्याएं पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड का सबसे काला अध्याय बनी हुई हैं. सीएम सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बलूचिस्तान में व्यवस्थित न्यायेतर हत्याएं, जिन्हें आमतौर पर 'मारो और फेंको नीति' के रूप में जाना जाता है, पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड में सबसे काले अध्यायों में से एक है. वर्षों से, बलूचों ने जबरन गायब किए जाने के क्रूर अभियान को झेला है, जहां छात्रों, कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का राज्य एजेंसियां अपहरण कर लेती हैं, उन्हें यातना दी जाती है और बाद में वे दूरदराज के खड्डों में मृत पाए जाते हैं या उन्हें सुनसान सड़कों पर फेंक दिया जाता है."
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बलूचिस्तान के लोगों का समर्थन करते हैं और उन्होंने याद दिलाया कि भारत उनके लिए खड़ा रहेगा. उन्होंने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री मोदी की आवाज ने दुनिया का ध्यान बलूचिस्तान के संकट की ओर खींचा, जिसे पाकिस्तान ने लंबे समय तक दबाए रखा था. यह भी पढ़ें : Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट ने बायो मेडिकल वेस्ट के निपटारे पर रिपोर्ट दाखिल न करने पर जताई नाराजगी
सीएम सरमा ने पोस्ट में उल्लेख किया, "यह अमानवीय प्रथा बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का चेहरा बन गई है, जहां परिवारों को उम्मीद की जगह अपने प्रियजनों के क्षत-विक्षत शव मिलते हैं. इसी गंभीर पृष्ठभूमि में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2016 के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान, वैश्विक समुदाय के लंबे समय से धारण मौन को तोड़ा. बलूचिस्तान से बहने वाली 'लाल नदियों' का जिक्र करते हुए, उन्होंने न्याय और सम्मान से वंचित लोगों को आवाज़ दी, यह इस बात की पुष्टि थी कि भारत उत्पीड़ित और चुप कराए गए लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है. उनके शब्दों में न केवल नैतिक स्पष्टता थी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वजन भी था, जिससे एक ऐसे संकट की तरफ ध्यान गया जिससे पाकिस्तान ने लंबे समय तक छुपाने की कोशिश की."
सीएम सरमा ने आगे कहा, "वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (वीबीएमपी) जैसे संगठनों का अनुमान है कि 20,000 से अधिक बलूच व्यक्ति गायब हो गए हैं, सैकड़ों शव संदिग्ध और क्रूर परिस्थितियों में बरामद किए गए हैं. कई लोगों पर गंभीर यातना के निशान हैं, जो भय और हिंसा के माध्यम से असहमति को दबाने की एक व्यवस्थित नीति की ओर इशारा करते हैं. यह अब कोई क्षेत्रीय या राजनीतिक मुद्दा नहीं है - यह एक मानवीय आपातकाल है."
(The above story first appeared on LatestLY on May 02, 2025 04:03 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

