Kerala: कोझिकोड रेलवे स्टेशन पर भरभरा कर ढहा सदी पुराना क्लॉक टावर, प्लेटफॉर्म पर गिरा मलबा; ट्रेन सेवाएं प्रभावित (Watch Video)
कोझिकोड रेलवे स्टेशन पर सदी पुराना क्लॉक टावर गिरा (Photo Credits: PTI)

कोझिकोड: केरल (Kerala) के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक, कोझिकोड रेलवे स्टेशन (Kozhikode Railway Station) पर गुरुवार, 9 जुलाई 2026 की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. स्टेशन परिसर में स्थित लगभग एक सदी पुराना ऐतिहासिक क्लॉक टावर (घड़ी मीनार) अचानक भरभरा कर ढह गया. यह घटना सुबह करीब 11:42 बजे की है, जब इस हेरिटेज संरचना का एक बड़ा हिस्सा तेज आवाज के साथ सीधे प्लेटफॉर्म नंबर 2 और पास के रेलवे ट्रैक पर जा गिरा. गनीमत यह रही कि इस बड़े ढांचागत हादसे में किसी भी यात्री या रेलवे कर्मचारी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है. मलबे के गिरने से ओवरहेड बिजली के तार टूट गए, जिसके चलते स्टेशन पर ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से बाधित हो गईं. यह भी पढ़ें: Ghaziabad: गाजियाबाद के वसुंधरा में भारी बारिश के बाद धंसी मुख्य सड़क, पाताल जैसे गड्ढे में समाई कार और स्कूटी; यातायात डायवर्ट

टला बड़ा हादसा, बंद थीं पैसेंजर ट्रेन की खिड़कियां

हादसे के समय प्लेटफॉर्म पर कोझिकोड-कन्नूर पैसेंजर ट्रेन खड़ी थी, जिससे एक बड़ी त्रासदी की आशंका थी. हालांकि, एक बड़ा हादसा इसलिए टल गया क्योंकि ट्रेन के प्रस्थान (रवानगी) का समय बाद का था, जिसके कारण बोगियों के दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह बंद थीं और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भीड़ जमा नहीं थी.

विशालकाय टावर को गिरता देख आस-पास काम कर रहे कुछ रेलवे कर्मचारी तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर भाग निकले. चश्मदीदों के अनुसार, अगर यह घटना किसी व्यस्त समय में होती तो भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था.

बिजली आपूर्ति ठप, कई प्रमुख ट्रेनें रास्ते में रोकी गईं

टावर का भारी-भरकम मलबा पटरियों और प्लेटफॉर्म पर गिरने के कारण ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली की लाइनें (ओवरहेड केबल्स) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे अधिकारियों ने तुरंत प्लेटफॉर्म नंबर 1, 2 और 3 की बिजली आपूर्ति (पावर सप्लाई) काट दी.

इस घटना के कारण कोझिकोड आने-जाने वाली रेल यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और ऐहतियात के तौर पर कई ट्रेनों को नजदीकी स्टेशनों पर ही रोक दिया गया। इस वजह से 'नेत्रावती एक्सप्रेस' और 'एरनाड एक्सप्रेस' जैसी प्रमुख ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर काफी समय तक खड़ी रहीं. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग (फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज) और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी कर मलबा हटाने का काम शुरू किया.

कोझिकोड रेलवे स्टेशन का क्लॉक टावर गिरा

स्टेशन पुनर्विकास और भारी बारिश बनी ढहने की वजह

रेलवे प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, यह क्लॉक टावर स्टेशन की एक पुरानी और निष्क्रिय हो चुकी इमारत का हिस्सा था, जिसे पहले ही असुरक्षित घोषित कर ढहाने (डेमोलिशन) के लिए चिन्हित किया जा चुका था. कोझिकोड रेलवे स्टेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) का काम चल रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन परिसर में भारी मशीनों से पाइलिंग (नींव की खुदाई) का काम चल रहा था, जिससे पैदा हुए कंपन, इस पुरानी इमारत की जर्जर स्थिति और केरल में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण यह ढांचा अपनी पकड़ खो बैठा और अचानक जमींदोज हो गया. रेलवे की तकनीकी टीम अब पटरियों की फिटनेस जांच पूरी होने के बाद ही रूट पर सामान्य परिचालन पूरी तरह बहाल करेगी.