Bengaluru Stampede: कर्नाटक सरकार ने RCB को ठहराया जिम्मेदार, कहा- विराट कोहली के वीडियो ने बढ़ाई भीड़
कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट को सौंपी एक रिपोर्ट में बताया कि RCB ने इस परेड के लिए पुलिस से कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली थी. हालांकि उन्होंने 3 जून को पुलिस को सूचित जरूर किया था, लेकिन नियमानुसार 7 दिन पहले आवेदन देना जरूरी होता है.
बेंगलुरु: 4 जून 2025 को बेंगलुरु की सड़कों पर एक ऐतिहासिक पल होना था. Royal Challengers Bengaluru (RCB) की पहली IPL जीत का जश्न. लेकिन यह जश्न जल्द ही एक त्रासदी में बदल गया, जब भीड़भाड़ और अव्यवस्था के चलते हुए स्टांपेड में 11 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए. कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट को सौंपी एक रिपोर्ट में बताया कि RCB ने इस परेड के लिए पुलिस से कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली थी. हालांकि उन्होंने 3 जून को पुलिस को सूचित जरूर किया था, लेकिन नियमानुसार 7 दिन पहले आवेदन देना जरूरी होता है, साथ ही भीड़ अनुमान, ट्रैफिक प्लान और सुरक्षा व्यवस्था का विवरण भी देना होता है, जो नहीं दिया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, 3 जून 2025 को KSCA द्वारा Cubbon Park पुलिस थाने को शाम 6:30 बजे के आसपास सूचना दी गई, लेकिन जरूरी जानकारी के अभाव में अनुमति नहीं दी जा सकी.”
सोशल मीडिया पर ‘फ्री एंट्री’ का ऐलान, विराट कोहली का वीडियो वायरल
बिना अनुमति के बावजूद, RCB ने 4 जून सुबह 7:01 बजे सोशल मीडिया पर परेड की घोषणा कर दी यह परेड विधान सौधा से शुरू होकर चिन्नास्वामी स्टेडियम तक जानी थी. 8:55 बजे विराट कोहली का एक वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें फैन्स को जश्न में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया. इससे लाखों फैन्स जुटने लगे. दोपहर 3:14 बजे एक और पोस्ट में फ्री पास की बात कही गई, लेकिन तब तक हजारों लोग बिना पास के पहुंच चुके थे.
तीन लाख की भीड़, सिर्फ 35 हजार की जगह
रिपोर्ट के अनुसार, “करीब 3 लाख लोग उस जगह पर पहुंचे, जबकि स्टेडियम की क्षमता सिर्फ 35,000 थी. मेट्रो में भी 9.66 लाख यात्री सवार हुए. जो सामान्य से 60% अधिक था.” इतनी भीड़, अव्यवस्थित एंट्री सिस्टम और देर से खुले गेट्स ने मिलकर माहौल बिगाड़ दिया. गेट नंबर 1, 2 और 21 को भीड़ ने तोड़ डाला. कई अन्य गेटों पर भी हल्की स्टांपेड की घटनाएं हुईं.
बीच में रोक सकते थे कार्यक्रम, लेकिन दंगे का डर था
सरकार के मुताबिक, अधिकारियों ने कार्यक्रम रोकने पर विचार किया था, लेकिन अचानक कैंसलेशन से भीड़ हिंसक हो सकती थी, इसलिए प्रशासन ने ‘जागरूक’ निर्णय लेते हुए कार्यक्रम को बीच में नहीं रोका. रिपोर्ट में कहा गया, “भीड़ की मानसिकता, स्थिति की नाज़ुकता और सूचना के अभाव को देखते हुए कार्यक्रम रोकना और अधिक खतरनाक साबित हो सकता था.”
सरकार की सख्त टिप्पणी: ये एक ‘मानव निर्मित त्रासदी’ थी
कर्नाटक सरकार ने माना कि यह हादसा योजनाबद्ध विफलता, आरसीबी की लापरवाही और आयोजकों की असंवेदनशीलता का परिणाम था. किसी भी कार्यक्रम की सफलता के लिए सिर्फ जोश नहीं, जिम्मेदारी भी जरूरी होती है और यहां उस जिम्मेदारी की भारी कमी थी.