उत्तराखंड की एक मंत्री रेखा आर्य के पति के एक हालिया बयान ने दिखाया है कि कई ताकतवर लोग आज भी शादी के लिए बिहारी लड़कियों को खरीदे और बेचे जाने को गहरी चिंता नहीं बल्कि मजाक की बात मानते हैं.उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण और बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के एक कथित बयान ने बिहारी लड़कियों की शादी के नाम पर होने वाली खरीद फरोख्त को चर्चा में ला दिया है. एक कार्यक्रम में साहू पार्टी कार्यकर्ता से कहते हुए पाए गए कि बिहार में लड़कियां 20-25 हजार में मिल जाती है. लड़कियों को खरीद-फरोख्त के सामान जैसा बताने वाले इस बयान पर बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए साहू को नोटिस दिया है. आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर मंत्री पर त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए इसकी जानकारी देने को भी कहा है.
शादी के लिए बिहार की लड़कियों की खरीद-बिक्री यानी ‘ब्राइड ट्रैफिकिंग' मानव तस्करी का ही एक रूप है. अशिक्षा, गरीबी, दहेज प्रथा व रूढ़िवादी सामाजिक सोच के कारण कई मामलों में परिवारजन अपनी बेटियों का सौदा करते हैं. कई मामलों में कोई नजदीकी रिश्तेदार इसमें बिचौलिये की भूमिका निभाता है.
इससे बिलकुल अलग तरह के कुछ अन्य मामलों में बिहार के बाहर के लोगों को बिहार की लड़की से शादी करवाने का झांसा देकर उनसे ठगी भी की जा रही. कई ऐसे मामले भी हैं, जिनमें दूसरे राज्यों में अपनी उम्र से दोगुनी या तिगुनी उम्र वाले पति से ब्याही बेटियां अपने घर लौट आई हैं. उनकी व्यथा सुन माता-पिता के रोंगटे खड़े हो जा रहे. अपराधों का रिकॉर्ड रखने वाले एनसीआरबी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2023 में बिहार में मानव तस्करी के कुल 132 मामले दर्ज हुए. जिनमें पीड़ितों की संख्या 510 थी. इनमें 327 पुरुष और 183 महिलाएं थीं. नाबालिगों की तस्करी के मामले में बिहार देश में दूसरे स्थान पर था. बिहार में 261 नाबालिग लड़के और 92 लड़कियां मानव तस्करी की शिकार हुईं. एनसीआरबी के 2022 के डाटा में मानव तस्करी के मामले में बिहार देश में तीसरे स्थान पर था.
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विवादों से गहरा नाता रहा है मंत्री के पति का
दरअसल, अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मंत्री रेखा आर्य के पति का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें गिरधारी लाल कुछ लड़कों की शादी नहीं होने पर तंज कसते हुए यह कहते सुने जा रहे हैं: क्या शादी बुढ़ापे में करोगे. अभी तक तीन-चार बच्चे हो जाते. लड़की हम तुम्हारे लिए बिहार से ले आते हैं. बिहार में 20-25 हजार में मिल जाती है. चलिए मेरे साथ तुम्हारी शादी करवाते हैं.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार एक वीडियो जारी कर गिरधारी लाल साहू ने उस बयान पर माफी मांगी है और सफाई दी है कि अपने भाषण के दौरान वो एक मित्र की शादी पर चर्चा कर रहे थे. जिसे उनके विरोधियों और कांग्रेस पार्टी ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली के जोगी नवादा के रहने वाले साहू ने अपनी राजनीति साहू समाज से शुरू की. बीजेपी से पहले वे समाजवादी पार्टी में सक्रिय रहे. मंत्री के पति का बरेली में खासा व्यापारिक रसूख है, वहीं विवादों से भी उनका पुराना नाता रहा है. भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उनके खिलाफ हत्या, धोखाधड़ी और जमीन कब्जे जैसे लगभग तीन दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. 1990 के बहुचर्चित जैन दंपति हत्याकांड में तो कोर्ट ने 2021 में उन्हें भगोड़ा घोषित करने तथा कुर्की तक के आदेश दिए थे. बरेली के सिविल लाइंस में 11 जून, 1990 में नरेश जैन और उनकी पत्नी पुष्पा जैन की हत्या कर दी गई थी, जिसमें गिरधारी लाल साहू मुख्य आरोपी हैं.
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इस बयान को लेकर विपक्षी तो हमलावर हैं ही, बीजेपी भी आलोचना कर रही है. बीजेपी से राज्यसभा सदस्य शंभू पटेल ने तो यहां तक कह दिया कि अगर वो गधा मेरे सामने होता तो बिहारी होने के नाते मैं खुद उसकी पिटाई करता, फिर चाहे अंजाम जो भी होता. दुर्भाग्य यह कि वह हमारी पार्टी (बीजेपी) के मंत्री का पति है. यह बीजेपी का कल्चर नहीं है. बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्र ने कहा है कि महिला सौदे की वस्तु नहीं है. यह हरेक महिला का अपमान है. ऐसे बयान देने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि, बिहार बीजेपी के किसी बड़े नेता ने इस संबंध में अभी तक कुछ नहीं कहा है.
वहीं, जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा है कि किसी भी महिला का अपमान सहन करने योग्य नहीं है. विपक्षी आरजेडी ने अपने एक्स अकाउंट पर गिरधारी का बयान शेयर करते हुए लिखा है कि इस पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का स्पष्टीकरण बीजेपी की ओर से आना चाहिए. आरजेडी महिला मोर्चा ने इस बयान के विरोध में प्रतिरोध मार्च निकाला और इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही.
शादी के नाम पर होती इंसानों की खरीद-फरोख्त!
समय-समय पर कई ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनसे साफ है कि शादी के लिए राज्य की लड़कियों, यहां तक कि नाबालिगों की खरीद-फरोख्त की जाती है. दलालों के माध्यम से ऐसे सौदे करने वाले गिरोह सीमांचल सहित राज्य के कई इलाकों में सक्रिय है. बिहार से लाकर लड़कियों को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश व दिल्ली जैसे राज्यों में बेचे जाने की सबसे ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं. 2025 के जून में राजस्थान के कोटा से किसी तरह भागकर पटना पहुंची एक लड़की की निशानदेही पर चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. इस लड़की की शादी राजस्थान के एक युवक से करवाई गई थी. जब वह कोटा पहुंची तो पता चला कि एक सौदे के तहत उसे बेचा गया है. तब वह किसी तरह भागकर पटना के दानापुर पहुंची और पुलिस से शिकायत की. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने शादी करवाने में शामिल चार लोगों को सासाराम जिले के दिनारा से दबोचा.
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लोकलाज या फिर लालच की वजह से ऐसे कई मामले तो सामने ही नहीं आ पाते हैं. समाजशास्त्र की लेक्चरर जायना एजाज कहती हैं, ‘‘ब्राइड ट्रैफिकिंग की शिकार अक्सर 18 से 24 साल की महिलाएं होती हैं. ये युवतियां गरीबी की मारी होती हैं, जो खुद या उनके अभिभावक अक्सर परिचितों के चंगुल में फंस जाते हैं. हरियाणा जैसे राज्य में खराब लिंगानुपात के कारण दुल्हन खरीदने की नौबत आ जाती है. मानव तस्कर इसी परिस्थिति का फायदा दोनों तरफ से उठाते हैं.'' 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में प्रति एक हजार लड़कों पर केवल 830 लड़कियां थीं, जिससे इस प्रथा को और बल मिला.
एजाज कहती हैं, ‘‘अपनों के ही बीच सक्रिय दलाल युवती या उसके गरीब व अनपढ़ मां-बाप को बेहतर जिंदगी का सपना दिखाते हैं. कई मामलों में पैसे देकर उनका मुंह बंद कर देते हैं तो कई मामलों में अपनी ही चाची-मामी उसे जानबूझकर बेच देते हैं.'' इन्हें खरीदने वाले भी प्राय: ग्रामीण, अशिक्षित या कम शिक्षित, छोटे किसान या मजदूर होते हैं. साल 2020 में बिहार के कटिहार, अररिया, किशनगंज और सुपौल जिले की 500 लड़कियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फर्जी शादी के नाम पर मानव तस्करी से बचाने की गुहार भी लगाई थी.
मानवाधिकार आयोग से शिकायत
हाल में ही बिहार के सीमावर्ती इलाकों से बीते छह माह में 100 लड़कियों के गायब होने का मामला सामने आया है. मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता सुबोध झा ने इसे लेकर राज्य और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में याचिका दर्ज की है. लापता हुई लड़कियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उनका कहना है कि अपने देश के अलावा सऊदी अरब, चीन, नेपाल और ब्राजील में इन्हें करोड़ों में बेचा जा रहा है. पूरे बिहार में यह आंकड़ा हजारों में पहुंच सकता है. वे इस संबंध में कई बार केंद्र सरकार को भी लिख चुके हैं. उनका दावा है कि इन लड़कियों का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी, बच्चा पैदा करने, फर्जी शादी और सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर अमानवीय गतिविधियों में किया जा रहा है.
बीते साल मई से अगस्त माह तक पूर्वी चंपारण जिले में ऐसे छह मामले सामने आए, जिनमें पांच लड़कियों को मानव तस्करों के जाल से छुड़ाया गया. बिहार सरकार मानव तस्करी के खिलाफ ऑपरेशन नया सवेरा नामक अभियान चलाकर इसे रोकने का भरपूर प्रयास कर रही है. केवल बीते अगस्त माह में इस अभियान के तहत बिहार पुलिस ने 1,016 नाबालिग बच्चों-बच्चियों तथा महिलाओं को मुक्त कराया. इसके साथ ही 197 पुरुष और 53 महिला तस्करों को गिरफ्तार भी किया. लेकिन, यह भी सच है कि जब तक लोगों में जागरूकता नहीं आएगी, तब तक मानव खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह लगाम संभव नहीं हो सकेगा.
शादी की आड़ में लुटेरी दुल्हन का खेल भी
बिहार की लड़कियों से शादी कराने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह भी खूब सक्रिय हैं. बीते शनिवार को ही रोहतास जिले के डेहरी में पुलिस ने इस गिरोह के पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें तीन महिलाएं थीं. इनके पास से सोने-चांदी के आभूषण, नकदी व मोबाइल फोन बरामद किए गए. यह गिरोह दूसरे प्रदेशों के ऐसे उम्रदराज लोगों को निशाना बनाता था, जिनकी शादी नहीं हो पाती थी. पुलिस के अनुसार दूसरे राज्य से एक युवक से शादी के नाम पर करीब डेढ़ लाख रुपये लेकर गिरोह डेहरी लाया था. उसकी शादी डेहरी की एक युवती से होनी थी, इसके पहले पुलिस ने सभी को दबोच लिया. पुलिस का कहना है कि शादी के बाद पकड़ी गईं ये महिलाएं दूल्हे से गहने, नकदी व अन्य सामान लेकर फरार हो जाती थीं. अब पुलिस इनका नेटवर्क खंगाल रही है.
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इससे पहले बीते साल दिसंबर माह में शादी का झांसा देकर सासाराम में राजस्थान जिले के जालौर जिले के ढाणी निवासी हरचंद राम से दु्ल्हन और उसके गिरोह ने करीब तीन लाख रुपये ठग लिए और दुल्हन बाथरुम जाने के बहाने फरार हो गई. हरचंद को जब जालसाजी समझ में आई, तब उसने पुलिस से शिकायत की. इस मामले में पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी कर दो महिलाओं को गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार ऐसी महिलाओं का नाम-पता अक्सर गलत ही रहता है. इसी तरह का एक मामला बीते साल जुलाई में सहरसा जिले में सामने आया था, जब पुलिस ने सात पुरुषों और तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया था. पुलिस के अनुसार तीनों महिलाएं पहले भी कई लोगों से फर्जी शादी कर धन उगाही कर चुकी थीं. बीते वर्ष जून माह में कैमूर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें हरियाणा के पृथला गांव निवासी सूरज कुमार को ठगे जाने का पता तब चला, जब विदाई के बाद लड़की ससुराल जा रही थी. पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन जाने के दौरान गिरोह के सदस्यों ने जेवर और पैसे तो छीन ही लिए, दुल्हन को लेकर भी फरार हो गए.













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