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अगस्त में मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से अधिक रहने के कारण इस वर्ष ब्याज दरों में कटौती मुश्किल: रिपोर्ट

एसबीआई रिसर्च की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहने के कारण अक्टूबर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है. इसके अलावा, अगर पहली तिमाही की विकास दर और दूसरी तिमाही के अनुमानित आंकड़ों को ध्यान में रखा जाए तो दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती भी कुछ मुश्किल है.

अगस्त में मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से अधिक रहने के कारण इस वर्ष ब्याज दरों में कटौती मुश्किल: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 13 सितंबर : एसबीआई रिसर्च की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रहने के कारण अक्टूबर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है. इसके अलावा, अगर पहली तिमाही की विकास दर और दूसरी तिमाही के अनुमानित आंकड़ों को ध्यान में रखा जाए तो दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती भी कुछ मुश्किल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 295 आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी रेट को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत या शून्य कर दिया गया है, इसलिए खाद्य वस्तुओं पर 60 प्रतिशत पास-थ्रू प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस कैटेगरी में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2026 में 25-30 आधार अंकों तक कम हो सकती है.

इसके अलावा, सेवाओं के जीएसटी रेट्स को रेशनलाइज बनाने से अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर सीपीआई मुद्रास्फीति में 40-45 आधार अंकों की और कमी आ सकती है, क्योंकि 50 प्रतिशत पास-थ्रू प्रभाव होगा. एसबीआई रिसर्च ने कहा, "कुल मिलाकर, हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 26-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति 65-75 आधार अंकों के दायरे में रह सकती है." भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति, जो इस वर्ष जुलाई में 98 महीनों के निचले स्तर 1.61 प्रतिशत पर आ गई थी, अगस्त में मामूली वृद्धि के साथ 2.07 प्रतिशत पर पहुंच गई है. ऐसा खाद्य एवं पेय पदार्थों की मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण हुआ है, जो पिछले 2 महीनों से नकारात्मक थी. यह भी पढ़ें : तेजस्वी यादव के प्रस्तावित अधिकार यात्रा को लेकर JDU ने कसा तंज, कहा- ‘राजनीति के फ्लॉप खिलौना बन गए’

सब्जियों की कीमतें नकारात्मक क्षेत्र में बनी रहीं, हालांकि अगस्त में मामूली वृद्धि के साथ -15.92 प्रतिशत पर पहुंच गईं. दालों की कीमतों में -14.53 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मसालों की कीमतों में भी अगस्त में गिरावट देखी गई. फलों की मुद्रास्फीति भी घटकर 11.65 प्रतिशत रह गई, जबकि तेल और वसा की सीपीआई बढ़कर 21.24 प्रतिशत हो गई. भारत की कोर मुद्रास्फीति फिर से बढ़कर 4.16 प्रतिशत हो गई. ग्रामीण और शहरी दोनों उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 1.69 प्रतिशत और 2.47 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह क्रमशः 1.18 प्रतिशत और 2.10 प्रतिशत थी.

राज्यवार मुद्रास्फीति के आंकड़ों से पता चलता है कि 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 26 में मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से कम दर्ज की गई है. केवल केरल और लक्षद्वीप ही ऐसे हैं, जहां मुद्रास्फीति दर 6 प्रतिशत से अधिक रही. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इस मौसम में खरीफ की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 2.5 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में हुई है, लेकिन कई हफ्तों तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण यह लाभ खत्म होने का खतरा है. अगस्त से 11 सितंबर के बीच पूरे देश में लगभग 8.7 प्रतिशत वर्षा रिकॉर्ड की गई.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 13, 2025 03:43 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).