RBI Kisan Credit Card Revision: 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे किसान क्रेडिट कार्ड के नए नियम, जानें लोन लिमिट, गारंटी मानदंड और पात्रता की पूरी जानकारी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के लिए नए और संशोधित नियम जारी किए हैं. 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले इन नियमों के तहत लोन की अवधि, कोलैटरल-फ्री सीमा और फसलों के सीजन का मानकीकरण किया गया है.
RBI Kisan Credit Card Revision: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के किसानों को कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए समय पर लोन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) निर्देश, 2026' जारी किए हैं. केंद्रीय बैंक द्वारा तैयार की गई यह संशोधित और अंतिम गाइडलाइन 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगी. यह नए नियम सभी कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और ग्रामीण सहकारी बैंकों पर समान रूप से लागू होंगे. आरबीआई ने साफ किया है कि 1 जनवरी 2027 से पहले स्वीकृत किए जा चुके पुराने केसीसी लोन अपनी मैच्योरिटी या रिन्यूअल की अवधि तक मौजूदा नियमों के तहत ही चलते रहेंगे.
केसीसी लोन संरचना में क्या बदलाव हुए?
आरबीआई द्वारा जारी नए ढांचे का मुख्य उद्देश्य कृषि ऋण की प्रक्रिया को सरल और मानकीकृत (Standardised) बनाना है. नए नियमों के तहत अब बैंक किसानों को छह साल (6 Years) की अवधि के लिए एक 'कम्पोजिट क्रेडिट फैसिलिटी' (मिश्रित ऋण सुविधा) के रूप में केसीसी लोन प्रदान करेंगे. इस सिंगल विंडो सुविधा में किसानों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) और निवेश (Investment) दोनों तरह की जरूरतें शामिल होंगी. यह भी पढ़े: PM Kisan 23rd Installment: कल जारी होगी पीएम किसान की 23वीं किस्त, इन 4 गलतियों के कारण रुक सकते हैं आपके ₹2,000
फसलों के सीजन का किया गया मानकीकरण
ऋण देने और उसे वापस चुकाने की प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए आरबीआई ने फसल सीजन को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है:
-
कम अवधि वाली फसलें (Short-duration crops): बुआई से लेकर फसल की मार्केटिंग तक की अवधि अधिकतम 12 महीने तय की गई है.
-
लंबी अवधि वाली फसलें (Long-duration crops): बुआई से लेकर मार्केटिंग तक की अवधि 12 महीने से अधिक और अधिकतम 18 महीने तक निर्धारित की गई है.
लोन चुकाने की अवधि को इन्हीं फसल सीजनों या कृषि गतिविधियों से होने वाली कमाई (Cash Flow) के साथ जोड़ा जाएगा.
किन खर्चों के लिए मिलेगा केसीसी लोन?
संशोधित नियमों के अनुसार, केसीसी के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग किसान निम्नलिखित कार्यों के लिए कर सकेंगे:
-
फसलों की खेती और कटाई के बाद के खर्च.
-
पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, एक्वाकल्चर, रेशम कीट पालन और मधुमक्खी पालन.
-
किसान परिवार की घरेलू उपभोग आवश्यकताएं.
-
कृषि संपत्तियों और उपकरणों का रखरखाव.
-
फसल, स्वास्थ्य, दुर्घटना और कृषि संपत्ति का बीमा प्रीमियम.
-
कृषि और उससे संबद्ध क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश.
बिना गारंटी (Collateral-Free) लोन की सीमा
आरबीआई ने नए दिशानिर्देशों में बिना किसी गारंटी या सुरक्षा के दिए जाने वाले लोन (Collateral-Free Loan) की सीमा को 2 लाख रुपये प्रति उधारकर्ता पर बरकरार रखा है. इसका मतलब है कि 2 लाख रुपये तक के केसीसी लोन के लिए किसानों को कोई जमीन या संपत्ति बंधक नहीं रखनी होगी.
यदि लोन की राशि 2 लाख रुपये से अधिक होती है, तो बैंक अपनी आंतरिक क्रेडिट नीतियों और आरबीआई के नियमों के आधार पर गारंटी तय करेंगे. हालांकि, यदि बैंक और किसान के बीच फसल खरीद का कोई टाई-अप (Tie-up Recovery) समझौता है, तो बैंक 3 लाख रुपये तक के लोन के लिए भी गारंटी की शर्त से छूट दे सकते हैं. केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस सीमा को और बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
कौन से किसान होंगे इस योजना के पात्र?
आरबीआई के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड योजना की पात्रता में कोई कटौती नहीं की गई है. संशोधित नियमों के तहत निम्नलिखित लोग लोन के लिए पात्र बने रहेंगे:
-
स्वयं की भूमि पर खेती करने वाले किसान (Owner cultivators).
-
किरायेदार किसान (Tenant farmers) और मौखिक पट्टेदार (Oral lessees).
-
बटाईदार (Sharecroppers).
-
किसानों के स्वयं सहायता समूह (SHGs) और संयुक्त देयता समूह (JLGs).
आरबीआई ने बताया कि फरवरी 2026 में जारी किए गए ड्राफ्ट नियमों पर विभिन्न हितधारकों और आम जनता से मिले फीडबैक को शामिल करने के बाद ही इन अंतिम नियमों को मंजूरी दी गई है.