Nipah Virus Case: केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस के मामले की पुष्टि, 43 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित
मरीज को शुरुआत में लगातार बुखार की शिकायत थी. वर्तमान में उनका इलाज कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में चल रहा है. हालांकि उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है,
Nipah Virus Case: केरल के कोझिकोड जिले में एक 43 वर्षीय व्यवसायी में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने व्यापक रोकथाम उपाय शुरू कर दिए हैं. पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने गुरुवार को इस निदान की पुष्टि की. यह साल 2026 में राज्य में इस जूनोटिक (जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाले) संक्रमण का पहला मामला है. संक्रमित व्यक्ति कोझिकोड के रामनाट्टुकरा का रहने वाला है.
मरीज की स्थिति और संपर्क ट्रेसिंग
मरीज को शुरुआत में लगातार बुखार की शिकायत थी. वर्तमान में उनका इलाज कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में चल रहा है. हालांकि उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन वह अभी भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है. यह भी पढ़े: Nipah Virus Outbreak in WB: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय का अपडेट, दिसंबर से अब तक केवल दो मामले
संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन ने मरीज के हालिया संपर्कों का पता लगाने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों ने अब तक 77 ऐसे व्यक्तियों की पहचान की है जो मरीज के संपर्क में आए थे. इस सूची में 58 स्वास्थ्य कर्मी, 14 परिवार के सदस्य और 5 मित्र या सहकर्मी शामिल हैं. राहत की बात यह है कि वर्तमान में इनमें से किसी भी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण नहीं दिखे हैं. हालांकि, 'उच्चतम जोखिम' (Highest-Risk) श्रेणी के दो और 'उच्च जोखिम' (High-Risk) श्रेणी के 13 संपर्कों को सख्त क्वारंटाइन में रखा गया है.
संक्रमण के स्रोत और रोकथाम के प्रयास
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बताया कि प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि संक्रमण किसी पर्यावरणीय स्रोत से फैला है. मरीज ने हाल ही में एक गोदाम किराए पर लिया था और खुद उसकी सफाई की थी. स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इस दौरान वह फ्रूट बैट्स (फल खाने वाले चमगादड़) के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आए होंगे, जो निपाह वायरस के प्राकृतिक स्रोत माने जाते हैं.
अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में फील्ड-स्तरीय निगरानी और जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है. हालांकि जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में औपचारिक रूप से कंटेनमेंट जोन घोषित करने की कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है. स्थिति पर नजर रखने और जनता की चिंताओं को दूर करने के लिए जिला चिकित्सा कार्यालय में एक नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया गया है.
निपाह वायरस का जोखिम भरा समय और सार्वजनिक सलाह
स्वास्थ्य अधिकारियों ने निपाह वायरस के संचरण के उच्च जोखिम वाले समय को लेकर अपनी सलाह दोहराई है. यह जोखिम आमतौर पर मई से सितंबर तक रहता है. इस अवधि के दौरान चमगादड़ों की गतिविधियों और प्रजनन में वृद्धि होने के कारण वायरस के फैलने की संभावना बढ़ जाती है.
सरकार ने जनता से सावधानी बरतने का आग्रह किया है, विशेष रूप से चमगादड़ों के सीधे संपर्क से बचने की सलाह दी गई है. लोगों से कहा गया है कि यदि वे अपने आसपास चमगादड़ों की असामान्य गतिविधि देखें, तो उन्हें खुद हटाने के बजाय स्थानीय अधिकारियों को सूचित करें. इसके अलावा, निवासियों को स्वच्छता के उच्च मानकों का पालन करने और ऐसे फलों को खाने से बचने की सलाह दी गई है जो जानवरों या पक्षियों द्वारा आंशिक रूप से खाए गए प्रतीत होते हैं.