जरुरी जानकारी

मोदी सरकार का कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, EPFO वेज लिमिट बढ़कर हुई 25,000 रुपये; जानें आपकी मासिक पेंशन और टेक-होम सैलरी पर क्या पड़ेगा असर

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है. इस ऐतिहासिक फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिलेगा और अधिकतम मासिक ईपीएस (EPS) पेंशन ₹7,500 से बढ़कर ₹12,500 हो जाएगी.

मोदी सरकार का कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, EPFO वेज लिमिट बढ़कर हुई 25,000 रुपये; जानें आपकी मासिक पेंशन और टेक-होम सैलरी पर क्या पड़ेगा असर

EPFO Wage Limit Hiked:  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य भविष्य निधि (PF) और पेंशन कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी इस निर्णय के बाद देश के 51 लाख से अधिक नए वेतनभोगी कर्मचारियों को अनिवार्य ईपीएफ (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) का लाभ मिलेगा. वेतन सीमा में बढ़ोतरी से जहां एक तरफ कर्मचारियों का पेंशन और पीएफ कॉर्पस बढ़ेगा, वहीं मासिक टेक-होम सैलरी में भी बदलाव आएगा.

मासिक अंशदान में कितना हुआ बदलाव?

ईपीएफओ नियमों के अनुसार, कर्मचारी का 12% अंशदान सीधे ईपीएफ खाते में जमा होता है. नियोक्ता (Employer) के 12% अंशदान में से 8.33% हिस्सा पेंशन फंड (EPS) में और शेष 3.67% हिस्सा ईपीएफ खाते में जाता है.   यह भी पढ़े:   EPFO WhatsApp Channel: ईपीएफओ वॉट्सऐप चैनल से कैसे जुड़ें? जानें कैसे करें जॉइन, क्या मिलेंगी सुविधाएं और साइबर फ्रॉड से बचने के जरूरी टिप्स

  • पुरानी सीमा (₹15,000): अधिकतम ईपीएस (EPS) अंशदान ₹1,250 प्रति माह (15,000 का 8.33%) और कुल अनिवार्य पीएफ कटौतियां ₹1,800 थीं.

  • नई सीमा (₹25,000): अधिकतम ईपीएस अंशदान बढ़कर ₹2,083 प्रति माह हो गया है. कर्मचारी और नियोक्ता का अनिवार्य पीएफ अंशदान अब ₹1,800 से बढ़कर ₹3,000 प्रति माह (25,000 का 12%) हो जाएगा.

जिन कर्मचारियों का मूल वेतन ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है, उनके पीएफ योगदान में ₹1,200 प्रति माह तक की अतिरिक्त कटौती होगी, जिससे उनकी पीएफ बचत बढ़ेगी.

ईपीएस (EPS) पेंशन की गणना का नया गणित

ईपीएस के तहत मासिक पेंशन का निर्धारण इस मानक सूत्र से किया जाता है:

$$\text{मासिक पेंशन} = \frac{\text{पेंशन योग्य वेतन} \times \text{पेंशन योग्य सेवा वर्ष}}{70}$$

  • पेंशन योग्य वेतन: सेवानिवृत्ति से ठीक पहले के अंतिम 60 महीनों का औसत मूल वेतन (जो नई सीमा के तहत अधिकतम ₹25,000 माना जाएगा).

  • पेंशन योग्य सेवा वर्ष: कुल योगदान सेवा अवधि. 20 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी करने वाले सदस्यों को 2 वर्ष का वैधानिक बोनस (Service Bonus) मिलता है.

सेवा अवधि के आधार पर पुरानी बनाम नई पेंशन की तुलना

अंतिम 60 महीनों का औसत मूल वेतन ₹25,000 होने की स्थिति में पेंशन का गणित इस प्रकार रहेगा:

योगदान सेवा वर्ष बोनस सहित कुल वर्ष पुरानी सीमा (₹15,000) पर पेंशन नई सीमा (₹25,000) पर पेंशन
10 वर्ष 10 वर्ष ₹2,143 ₹3,571
15 वर्ष 15 वर्ष ₹3,214 ₹5,357
20 वर्ष 22 वर्ष ₹4,714 ₹7,857
25 वर्ष 27 वर्ष ₹5,786 ₹9,643
30 वर्ष 32 वर्ष ₹6,857 ₹11,429
33 वर्ष 35 वर्ष ₹7,500 ₹12,500

अधिकतम ₹12,500 प्रति माह पेंशन प्राप्त करने के लिए कर्मचारी का अंतिम 60 महीनों का औसत वेतन ₹25,000 होना चाहिए और न्यूनतम 33 वर्षों की सेवा (बोनस के साथ 35 वर्ष) पूरी होनी चाहिए.

अगले 5 वर्षों में सेवानिवृत्त होने वालों पर असर

जो कर्मचारी अगले कुछ वर्षों में रिटायर होने वाले हैं, उन्हें तुरंत पूरी ₹12,500 की पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा. चूंकि ईपीएस पेंशन पिछले 60 महीनों के औसत वेतन पर आधारित होती है, इसलिए उनका पेंशन योग्य वेतन पुरानी ₹15,000 सीमा और नई ₹25,000 सीमा का मिश्रित (Blended) औसत होगा. नई सीमा का पूरा ₹12,500 का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो नए नियम लागू होने के बाद कम से कम 60 महीनों तक नई सीमा पर योगदान देंगे. पेंशन पाने के लिए ईपीएस में कम से कम 10 वर्षों की न्यूनतम सेवा अनिवार्य है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 19, 2026 11:46 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).