EPFO 3.0: कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब UPI और ATM के जरिए निकाल सकेंगे PF का पैसा

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने नए डिजिटल अपग्रेड 'EPFO 3.0' के तहत पीएफ निकासी की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाने जा रहा है. जल्द ही सदस्य यूपीआई (UPI) और एटीएम (ATM) के जरिए सीधे पैसा निकाल सकेंगे. इसके साथ ही ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को भी बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Facebook)

EPFO 3.0:  देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक बड़ा डिजिटल बदलाव करने जा रहा है. संगठन अपने नए अपग्रेड "EPFO 3.0" के तहत भविष्य निधि (PF) से पैसा निकालने की प्रक्रिया को बेहद तेज और आसान बनाने की तैयारी में है. इस नई पहल के तहत पीएफ अंशधारक जल्द ही यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और एटीएम (ATM) नेटवर्क के जरिए सीधे अपने खाते से पैसा निकाल सकेंगे. इसके साथ ही, ईपीएफओ ने एडवांस क्लेम के लिए ऑटो-सेटलमेंट (स्वचालित निपटान) की सीमा को भी एक झटके में पांच गुना बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है. इन बदलावों से संगठन के 30 करोड़ से अधिक सदस्यों को आपात स्थिति में तुरंत नकदी मिल सकेगी.

यूपीआई और एटीएम से पीएफ निकासी जल्द, टेस्टिंग पूरी

EPFO 3.0 के अंतर्गत पेश किए जा रहे दो बड़े बदलावों में पहला बदलाव सीधे तौर पर रोजमर्रा की बैंकिंग से जुड़ा है. अब पात्र पीएफ खाताधारक यूपीआई-सक्षम प्लेटफॉर्म और विशेष ईपीएफओ एटीएम कार्ड के जरिए सीधे अपने पीएफ फंड तक पहुंच सकेंगे. खबरों के अनुसार, इस फीचर की तकनीकी टेस्टिंग (Testing) पूरी हो चुकी है. इसके लागू होने के बाद सदस्यों को अपने ही पैसे के लिए हफ्तों का इंतजार नहीं करना होगा और बेहद कम समय में पैसा उनके बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा.

ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़कर हुई 5 लाख रुपये

दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव एडवांस क्लेम की सीमा को लेकर है, जिसे लागू भी कर दिया गया है. गंभीर बीमारी, शिक्षा, शादी या घर खरीदने जैसे जरूरी कामों के लिए किए जाने वाले एडवांस दावों की ऑटो-सेटलमेंट सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 5 लाख रुपये कर दिया गया है. इस बढ़े हुए दायरे के कारण अब बड़ी संख्या में दावों का निपटारा बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप (Manual Intervention) के कंप्यूटर सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से किया जा सकेगा. पूरी तरह से केवाईसी (KYC) अनुपालन वाले खातों के लिए यह निपटान प्रक्रिया महज 72 घंटों के भीतर पूरी हो जाएगी.

 डिजिटल बदलाव का सफर

साल 1952 में स्थापित ईपीएफओ दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संगठनों में से एक है, जो भारत के संगठित क्षेत्र के कार्यबल के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करता है. ईपीएफओ के डिजिटल परिवर्तन के सफर ने साल 2015 में 'डिजिटल इंडिया वीक' के दौरान रफ्तार पकड़ी थी. इसके बाद यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की शुरुआत और प्रतिष्ठानों के ऑनलाइन पंजीकरण जैसे कदम उठाए गए. गौरतलब है कि ऑटो-सेटलमेंट की व्यवस्था सबसे पहले कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई थी, ताकि संकट के समय लोगों को तुरंत राहत दी जा सके. अब इसी व्यवस्था को अपग्रेड करके ईपीएफओ 3.0 के रूप में पेश किया जा रहा है.

जानकारों की राय और डेटा सुधार की जरूरत

बाजार विश्लेषकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने ईपीएफओ के इस डिजिटल कदम की सराहना की है. जानकारों का कहना है कि इससे नियोक्ताओं (Employers) पर निर्भरता कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी. हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस सुविधा का निर्बाध लाभ उठाने के लिए सदस्यों का डेटा पूरी तरह सही होना चाहिए. विश्लेषण दिखाते हैं कि पैन (PAN), बैंक खाते के विवरण या अन्य पहचान दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण अक्सर पीएफ क्लेम रिजेक्ट हो जाते हैं. इसलिए सदस्यों को अपने विवरण को हमेशा अपडेट रखना चाहिए.

आगे की राह और कुछ जरूरी नियम

यूपीआई और एटीएम निकासी की सफल टेस्टिंग के बाद अब सभी की निगाहें इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग तारीख पर टिकी हैं. सदस्यों को ध्यान रखना होगा कि भले ही निकासी के रास्ते आसान हो रहे हैं, लेकिन बुनियादी नियम पहले जैसे ही रहेंगे. सदस्य आमतौर पर अपने कुल ईपीएफ बैलेंस का 50% से 75% तक ही एडवांस निकाल सकते हैं, जबकि न्यूनतम 25% हिस्सा भविष्य के सेवानिवृत्ति बफर के रूप में खाते में रखना अनिवार्य होता है. इसके अलावा, लगातार 5 वर्ष की सेवा से पहले 50,000 रुपये से अधिक की समय-पूर्व निकासी पर टैक्स और टीडीएस (TDS) के नियम भी यथावत लागू रहेंगे.

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