8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट: जून में कई राज्यों का दौरा करेगा आयोग, फिटमेंट फैक्टर और पुरानी पेंशन बहाली पर कर्मचारियों की नजरें टिकी
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए गठित 8वें वेतन आयोग की देशव्यापी बैठकें जारी हैं. जून 2026 में आयोग जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और लखनऊ का दौरा करेगा. जानें फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि और ओपीएस (OPS) को लेकर क्या चल रही है चर्चा.
8th Pay Commission Update: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों तथा पेंशन की समीक्षा के लिए गठित '8वें केंद्रीय वेतन आयोग' (8th Central Pay Commission) की गतिविधियां तेज हो गई हैं. सरकार द्वारा नवंबर 2025 में अधिसूचित किए जाने के बाद यह आयोग इस समय विभिन्न हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों के साथ देशव्यापी परामर्श के चरण में है. आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, आयोग जून 2026 में देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों का दौरा करने जा रहा है. इसमें 1 से 4 जून तक श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), 8 जून को लद्दाख और 22-23 जून 2026 को लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में कर्मचारी संघों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित की गई हैं.
क्या है फिटमेंट फैक्टर और कितनी बढ़ेगी न्यूनतम सैलरी?
8वें वेतन आयोग की चर्चाओं में 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बना हुआ है. यह एक ऐसा गणितीय गुणक (Multiplier) होता है जिसके आधार पर पुरानी बेसिक सैलरी को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है. 7वें वेतन आयोग के समय सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई थी. वर्तमान में कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई और आर्थिक बदलावों को देखते हुए इस बार फिटमेंट फैक्टर को 3.68 या 3.83 के आसपास रखा जाए. यदि सरकार इस मांग को आंशिक रूप से भी मानती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर सीधे 32,000 रुपये से 35,000 रुपये के बीच पहुंच सकती है. यह भी पढ़े: 8th Pay Commission Update: आठवें वेतन आयोग की गतिविधियों में तेजी, यूनियनों के साथ बैठक और सुझावों की तारीख बढ़ी
OPS को लेकर तेज हुई बहस
वेतन विसंगतियों के अलावा, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने की मांग इस आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. अखिल भारतीय रेलवेमैन फेडरेशन (AIRF) और अन्य केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में साफ कहा है कि ओपीएस कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा देता है. कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि ओपीएस के तहत आखिरी बेसिक सैलरी का 50 प्रतिशत हिस्सा पेंशन के रूप में मिलना सुनिश्चित होता है, जबकि एनपीएस पूरी तरह मार्केट पर आधारित है. हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दो दशकों में एनपीएस में 16.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कॉर्पस जमा हो चुका है, इसलिए इसे पूरी तरह पलटना सरकार के लिए आर्थिक और प्रशासनिक रूप से बेहद जटिल होगा.
7वें वेतन आयोग के तहत हाल ही में बढ़ा है महंगाई भत्ता
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें अंतिम रूप से लागू होने तक कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के प्रावधानों के तहत ही लाभ मिल रहे हैं. हाल ही में अप्रैल 2026 में केंद्रीय कैबिनेट ने महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी है. इस फैसले के बाद अब कुल महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है. इस बढ़ोतरी के कारण कर्मचारियों की ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा भी पुरानी लिमिट (20 लाख रुपये) से बढ़कर 25 लाख रुपये हो गई है, जिससे सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सीधा लाभ मिल रहा है.
कब तक लागू हो सकती हैं 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?
आमतौर पर भारत में हर 10 साल में एक बार नया वेतन आयोग गठित किया जाता है. 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू हुई थीं, जिसके अनुसार 8वें वेतन आयोग के क्रियान्वयन की संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 जनवरी 2026 तय की गई है. आयोग फिलहाल MyGov पोर्टल और क्षेत्रीय दौरों के माध्यम से जनता, सरकारी विभागों और यूनियनों से सुझाव और डेटा एकत्र कर रहा है. परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंपेगा. यदि इस प्रक्रिया में थोड़ा समय भी लगता है और सिफारिशें बाद में मंजूर होती हैं, तो नियमों के मुताबिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2026 से ही एरियर (Arrears) के साथ संशोधित वेतन और पेंशन का भुगतान किया जाएगा.