8th Pay Commission Update: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों तथा पेंशन में संशोधन के लिए गठित 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर बड़ी खबरें सामने आ रही हैं. आयोग ने विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कर्मचारियों से जुड़ा आवश्यक डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने की समयसीमा को एक बार फिर बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दिया है. इसके साथ ही, हाल ही में कोलकाता में संपन्न हुई दो दिवसीय स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) की बैठक में कर्मचारी संगठनों ने नए वेतन ढांचे और फिटमेंट फैक्टर को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के सामने रखी हैं.
डेटा सबमिशन की समयसीमा 31 जुलाई तक बढ़ी
8वें वेतन आयोग ने सभी सरकारी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि केवल ऑनलाइन डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से सबमिट की गई जानकारी ही स्वीकार की जाएगी. किसी भी प्रकार के भौतिक दस्तावेज, ईमेल या एक्सेल शीट पर विचार नहीं किया जाएगा. यह भी पढ़े: 8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग क्यों उठी? जानिए पूरा गणित
इस डेटा संग्रह अभ्यास के तहत आयोग पिछले तीन वित्तीय वर्षों के नियमित कर्मचारियों, पेंशनभोगियों के साथ-साथ कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) और आउटसोर्स किए गए जनशक्ति का पूरा विवरण जुटा रहा है. कई विभागों द्वारा अभी तक पूरी जानकारी अपलोड न कर पाने के कारण इस समयसीमा को आगे बढ़ाया गया है.
फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन पर बड़ा प्रस्ताव
9 और 10 जुलाई 2026 को कोलकाता में 8वें वेतन आयोग की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में विभिन्न कर्मचारी संघों और पेंशनर्स संगठनों ने भाग लिया.
बैठक में सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर में बड़े संशोधन को लेकर रही. कुछ कर्मचारी संगठनों (जैसे भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ) ने फिटमेंट फैक्टर को 4 गुना करने का प्रस्ताव दिया है. यदि सरकार इस मांग को मान लेती है, तो वर्तमान न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर सीधे 72,000 रुपये के स्तर पर पहुंच सकती है. इसके अलावा नेशनल काउंसिल स्टाफ साइड ने 3.833 के फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये होने की उम्मीद जताई जा रही है.
कर्मचारियों को मिल सकता है 18 से 24 महीने का एरियर
हालांकि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों की अंतिम रिपोर्ट आने और इसे पूरी तरह लागू होने में साल 2027 के मध्य या उत्तरार्ध तक का समय लग सकता है, लेकिन इसे 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा.
ऐसी स्थिति में 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को नया वेतन ढांचा लागू होने पर करीब 18 से 24 महीनों का एरियर (बकाया वेतन) एक साथ मिल सकता है. उदाहरण के तौर पर, यदि नए वेतनमान में देरी होती है, तो लेवल-1 के कर्मचारियों को संचित वेतन अंतर के रूप में एक बड़ा मुश्त भुगतान मिलने की पूरी संभावना है.
भत्तों और पुरानी पेंशन को लेकर भी अड़े संगठन
कोलकाता बैठक के दौरान कर्मचारी संगठनों ने केवल बेसिक पे ही नहीं, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भी बढ़ोतरी की मांग उठाई है. वर्तमान में शहरों की श्रेणियों (X, Y, Z) के आधार पर मिल रहे 30%, 20% और 10% के HRA स्लैब को और बेहतर करने पर जोर दिया गया है. इसके साथ ही, एकीकृत पेंशन योजना (UPS) आने के बावजूद कई संगठन अभी भी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी बहाली के लिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं. आयोग इन सभी सुझावों और फीडबैक की समीक्षा करने के बाद ही अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा.












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