8वां वेतन आयोग: 2.75 और 3.5 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बदलेगी केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी? समझें पूरा गणित

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चा तेज हो गई है. यदि आयोग 2.75 या 3.5 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश करता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹49,500 या ₹63,000 तक पहुंच सकता है. जानिए वेतन मैट्रिक्स के अलग-अलग स्तरों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा

8th Pay Commission Fitment Factor: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के बाद से ही लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें नए वेतन ढांचे और फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हुई हैं. न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित इस आयोग के 18 महीने के कार्यकाल में से 10 महीने से अधिक का समय पूरा हो चुका है. आयोग द्वारा तैयार किए जाने वाले वेतन मैट्रिक्स में 'फिटमेंट फैक्टर' सबसे महत्वपूर्ण पैमाना माना जा रहा है. अगर आयोग 2.75 या 3.5 का गुणांक (मल्टीप्लायर) तय करता है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹49,500 या ₹63,000 हो सकता है. हालांकि, ये आंकड़े केवल विश्लेषणात्मक आकलन हैं और आयोग की ओर से अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा समान गुणांक (यूनिफॉर्म मल्टीप्लायर) होता है, जिसके जरिए कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे को नए रिवाइज्ड बेसिक पे में बदला जाता है.  यह भी पढ़े;  8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से केंद्रीय कर्मचारी क्यों मांग रहे हैं 5 MACP अपग्रेडेशन? जानें वजह और प्रस्ताव

रिवाइज्ड बेसिक पे=वर्तमान बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर

ऐतिहासिक रूप से, वेतन आयोग मुद्रास्फीति और महंगाई के असर को बेअसर करने के लिए इस मल्टीप्लायर का इस्तेमाल करते आए हैं. उदाहरण के लिए:

  • 6ठा वेतन आयोग: 1.86 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया गया था.

  • 7वां वेतन आयोग: इसे बढ़ाकर 2.57 तय किया गया, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 हुई.

चूंकि वेतन संशोधन आमतौर पर 10 साल में एक बार होता है, इसलिए यह गुणांक अगले एक दशक के लिए वेतन, वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) और भत्तों का आधार तय करता है.

2.75 और 3.5 के आधार पर पे मैट्रिक्स की संभावित स्थिति

यदि 8वें वेतन आयोग में 2.75 या 3.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो पे मैट्रिक्स के अलग-अलग स्तरों (Levels) पर बेसिक सैलरी का अनुमानित ढांचा इस प्रकार होगा:

पे मैट्रिक्स लेवल (Pay Matrix Level) 7वें वेतन आयोग का बेसिक पे 2.75 फिटमेंट फैक्टर पर अनुमानित बेसिक पे 3.5 फिटमेंट फैक्टर पर अनुमानित बेसिक पे
लेवल 1 (प्रारंभिक स्तर) ₹18,000 ₹49,500 ₹63,000
लेवल 2 ₹19,900 ₹54,725 ₹69,650
लेवल 3 ₹21,700 ₹59,675 ₹75,950
लेवल 4 ₹25,500 ₹70,125 ₹89,250
लेवल 5 ₹29,200 ₹80,300 ₹1,02,200
लेवल 6 ₹35,400 ₹97,350 ₹1,23,900
लेवल 7 ₹44,900 ₹1,23,475 ₹1,57,150
लेवल 10 (ग्रुप 'ए' प्रवेश) ₹56,100 ₹1,54,275 ₹1,96,350
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,38,525 ₹4,30,850
लेवल 18 (कैबिनेट सचिव) ₹2,50,000 ₹6,87,500 ₹8,75,000

(नोट: ऊपर दिए गए आंकड़े केवल बेसिक पे के संशोधन को दर्शाते हैं. महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और परिवहन भत्ता (TA) जुड़ने के बाद कुल इन-हैंड सैलरी अलग होगी).

लेवल 6 और लेवल 10 के कर्मचारियों पर असर

  • लेवल 6 (मध्यम स्तर के पद): वर्तमान में ₹35,400 बेसिक पाने वाले कर्मचारियों का वेतन 2.75 के गुणांक पर ₹97,350 और 3.5 के गुणांक पर ₹1,23,900 हो जाएगा.

  • लेवल 10 (ग्रुप 'ए' अधिकारी): प्रवेश स्तर के ग्रुप-ए अधिकारियों (वर्तमान बेसिक ₹56,100) की नई बेसिक सैलरी ₹1.54 लाख से लेकर ₹1.96 लाख के बीच पहुंच जाएगी.

कर्मचारी यूनियनों की उच्च गुणांक की मांग

कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगी यूनियनों का तर्क है कि पोस्ट-कोविड मुद्रास्फीति, मकान किराए, चिकित्सा और शिक्षा में हुई भारी बढ़ोतरी की भरपाई के लिए 7वें वेतन आयोग का 2.57 फैक्टर नाकाफी है. कई यूनियनों ने 3.5 या उससे अधिक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है, जबकि कुछ ज्ञापनों में इसे 4.00 तक रखने का अनुरोध किया गया है.

 

आयोग की समयसीमा और आगे की प्रक्रिया

3 नवंबर 2025 को गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय मिला है. आयोग दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और लद्दाख सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हितधारकों के साथ परामर्श प्रक्रिया पूरी कर रहा है.

आयोग की औपचारिक रिपोर्ट मई-जून 2027 तक आने की संभावना है. इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की समीक्षा और मंजूरी के बाद ही नया पे मैट्रिक्स और फिटमेंट फैक्टर आधिकारिक रूप से लागू होगा.

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