Indus Waters Treaty: दिल्ली द्वारा सिंधु जल संधि पर आए फैसले को खारिज करने के बाद पाकिस्तान भारत के साथ करना चाहता है बातचीत
हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) द्वारा 1960 के सिंधु जल समझौते (IWT) को कानूनी रूप से बाध्यकारी ठहराने के फैसले को भारत द्वारा खारिज किए जाने के बाद पाकिस्तान ने नई दिल्ली से वार्ता की मेज पर लौटने की अपील की है. द हेग ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा था कि कोई भी पक्ष समझौते को एकतरफा निलंबित नहीं कर सकता, साथ ही जम्मू-कश्मीर में रातले जलविद्युत परियोजना के निर्माण पर कुछ अंतरिम प्रतिबंध लगाए थे.
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: द हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत (Permanent Court of Arbitration - PCA) के ताजा फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर कूटनीतिक तनातनी बढ़ गई है. ट्रिब्यूनल द्वारा समझौते को पूर्ण रूप से प्रभावी बताने और भारत की ओर से इसे सिरे से खारिज किए जाने के बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत से द्विपक्षीय बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है.
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इस मध्यस्थता अदालत के अधिकार क्षेत्र को मान्यता नहीं देता, इसलिए उसका फैसला भारत की स्थिति को किसी भी रूप में प्रभावित नहीं करता है. यह भी पढ़ें: Nepal Floods: विनाशकारी बाढ़ में 1,100 से अधिक मौतों के बाद नेपाल ने भारत, चीन और अमेरिका से मांगा जलवायु मुआवजा
हेग ट्रिब्यूनल का क्या था फैसला?
पाकिस्तान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए द हेग स्थित मध्यस्थता अदालत ने अपने फैसले में कहा:
- एकतरफा निलंबन अमान्य: ट्रिब्यूनल के अनुसार, 1960 के सिंधु जल समझौते में किसी भी देश द्वारा एकतरफा तरीके से संधि को 'स्थगित' (Abeyance) या समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए यह संधि कानूनी रूप से दोनों पक्षों पर लागू रहती है.
- रातले परियोजना पर अंतरिम निर्देश: अदालत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रही भारत की रातले जलविद्युत परियोजना (Ratle Hydroelectric Project) के कुछ निर्माण कार्यों, विशेषकर बांध की दीवार और पावर इनटेक संरचना पर आगे के तकनीकी आकलन तक कुछ पाबंदियां लगाने का निर्देश दिया.
भारत का कड़ा रुख: 'अवैध ट्रिब्यूनल, संधि रहेगी स्थगित'
भारत के विदेश मंत्रालय ने हेग अदालत के फैसले को त्वरित रूप से खारिज कर दिया:
- अधिकार क्षेत्र को अस्वीकार किया: भारत का कहना है कि विश्व बैंक द्वारा समानांतर रूप से गठित यह मध्यस्थता अदालत संधि के मूल नियमों के विरुद्ध बनी है, इसलिए इसके किसी भी आदेश या निर्णय का भारत के लिए कोई कानूनी आधार नहीं है. भारत इस प्रक्रिया की बैठकों में भी शामिल नहीं हुआ था.
- पहलगाम आतंकी हमला और राष्ट्रीय सुरक्षा: भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी) के बाद समझौते को स्थगित कर दिया था.
- आतंकवाद और जल वार्ता साथ नहीं: नई दिल्ली ने दोहराया है कि जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय, प्रभावी और स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक संधि को स्थगित ही रखा जाएगा.
पाकिस्तान की बातचीत की अपील और जल सुरक्षा की चिंता
ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद पाकिस्तान ने समझौते के तहत स्थापित संस्थागत तंत्रों (स्थायी सिंधु आयोग) के जरिए मतभेदों को सुलझाने और रचनात्मक संवाद शुरू करने की वकालत की है:
- जल सुरक्षा पर दबाव: सिंधु नदी प्रणाली पर अत्यधिक निर्भर होने के कारण पाकिस्तान समझौते के निलंबन से असहज है, क्योंकि भारत द्वारा हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने और नियमित बैठकों को रोक दिया गया है.
- किशनगंगा और रातले परियोजनाएं: पाकिस्तान लंबे समय से झेलम की सहायक नदी पर स्थित किशनगंगा और चिनाब पर स्थित रातले परियोजनाओं के डिजाइन पर आपत्ति जताता रहा है.
छह दशक पुराने समझौते का भविष्य
विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल समझौता कई युद्धों और तनावपूर्ण दौरों के बावजूद कायम रहा था, लेकिन जमीनी हकीकत बदलने और आतंकवाद के लगातार जारी रहने के कारण यह समझौता अब अपने सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है. भारत की दो टूक नीति के चलते तत्काल कूटनीतिक सुलह की गुंजाइश बेहद सीमित नजर आ रही है.