नई दिल्ली: भारत को अगर रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करना पड़े, तो देश का ईंधन आयात बिल 9 से 12 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है. यह चेतावनी हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिपोर्ट में दी गई है. रूस दुनिया के कुल कच्चे तेल आपूर्ति का करीब 10% हिस्सा देता है. 2022 के बाद से भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदा, क्योंकि यह डिस्काउंट पर उपलब्ध था, 60 डॉलर प्रति बैरल की कैप के साथ. इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई और महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिली.
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FY20 में रूस का भारत के कुल तेल आयात में हिस्सा सिर्फ 1.7% था. FY25 में यह बढ़कर 35.1% हो गया, जिससे रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया. FY25 में भारत ने रूस से 88 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चा तेल आयात किया, जबकि कुल आयात 245 MMT रहा.
अगर रूस से सप्लाई बंद हो गई तो क्या होगा?
SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर FY26 के बाकी समय में रूस से तेल आयात बंद हो गया, तो भारत का ईंधन बिल 9 अरब डॉलर बढ़ सकता है और FY27 में यह बढ़ोतरी 11.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. अगर पूरी दुनिया रूस से तेल लेना बंद कर दे और बाकी देश उत्पादन नहीं बढ़ाएं, तो कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10% का उछाल आ सकता है.
पुराने सप्लायर्स बन सकते हैं मददगार
रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर इराक था, उसके बाद सऊदी अरब और यूएई. भारत के पास इन देशों के साथ वार्षिक अनुबंध हैं, जिनमें जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सप्लाई लेने की लचीलापन है. अगर रूस से सप्लाई रुकती है, तो भारत आसानी से इन पुराने सप्लायर्स पर वापस जा सकता है.
नए देशों से भी आ रही है सप्लाई
रूस पर निर्भरता घटाने के लिए भारत ने तेल आयात के स्रोतों को 40 देशों तक फैला दिया है. अब ब्राजील, कनाडा, गयाना जैसे देश भी भारत के ऊर्जा बास्केट में शामिल हो गए हैं. इससे आपूर्ति का जोखिम कम होता है. भले ही भारत के पास वैकल्पिक स्रोत हैं, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, तो ईंधन महंगा होना तय है. यह आम जनता और उद्योग दोनों पर दबाव डाल सकता है.













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