Indian OMCs: तेल विपणन कंपनियों ने नहीं कमाया संकट का फायदा, उपभोक्ताओं के हित में किया काम, आंकड़ों में दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) अकेले लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करती है और उसका सामान्य लाभ 20,000 से 30,000 करोड़ रुपये के बीच रहता है, जो लगभग 3 फीसदी मार्जिन है. तीनों तेल विपणन कंपनियों का संयुक्त ऑपरेटिंग मार्जिन 1 से 3 फीसदी के बीच बना रहता है, जिसे सामान्य परिचालन लाभ माना जाता है, न कि असामान्य मुनाफा.
Indian OMCs: सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के वित्त वर्ष 2025-26 में दर्ज 77,821 करोड़ रुपये के संयुक्त मुनाफे को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है. विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान तेल विपणन कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है. हालांकि ताजा आंकड़ों के अनुसार यह मुनाफा किसी ‘विंडफॉल’ की बजाय सामान्य परिचालन मार्जिन का हिस्सा है. IndiGo: इंडिगो का बड़ा फैसला, घरेलू उड़ानों में करेगी 7 फीसदी तक कटौती, बढ़ती लागत और कम मांग बना वजह
आंकड़ों के मुताबिक, तेल विपणन कंपनियों का कुल कारोबार लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर रहा, जिसके मुकाबले 77,821 करोड़ रुपये का लाभ केवल 3 से 4 फीसदी का नेट मार्जिन बनता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की कमोडिटी रिफाइनिंग कंपनियों के लिए यह सामान्य कार्यशील मार्जिन माना जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस मुनाफे का लगभग आधा हिस्सा डिविडेंड के रूप में भारत सरकार को वापस चला जाता है. इस राशि का इस्तेमाल सड़क, हाईवे, रेलवे और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में किया जाता है. वहीं बची हुई राशि रिफाइनरी विस्तार और कैपेक्स योजनाओं में लगाई जाती है, जहां एक बड़े रिफाइनरी विस्तार प्रोजेक्ट की लागत 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंचती है.
डेटा में यह भी बताया गया कि FY 2025-26 का मुनाफा पश्चिम एशिया संकट से सीधे तौर पर प्रभावित नहीं था, क्योंकि तेल विपणन कंपनियों उस समय 50 से 60 दिनों के प्री-कॉन्फ्लिक्ट क्रूड ऑयल स्टॉक पर काम कर रही थीं. संकट का वास्तविक असर FY 2026-27 की पहली तिमाही में देखने को मिल सकता है.
सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की थी. इसके बावजूद भारत में ईंधन की खुदरा कीमतों में संकट शुरू होने के बाद केवल 8 से 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि पड़ोसी देशों में यह बढ़ोतरी 20 से 67 फीसदी तक दर्ज की गई.
विशेषज्ञों का कहना है कि 130 फीसदी मुनाफे की वृद्धि का दावा भ्रामक है, क्योंकि इसकी तुलना FY 2024-25 के कम आधार से की जा रही है. उस वर्ष तेल विपणन कंपनियों का लाभ केवल 33,602 करोड़ रुपये रहा था, जो FY 2023-24 के मुकाबले 47,384 करोड़ रुपये कम था.
इस गिरावट की मुख्य वजह घरेलू एलपीजी पर 40,434 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी थी, जिसे तेल विपणन कंपनियों ने खुद वहन किया था. बाद में सरकार ने इसकी भरपाई की . FY 2025-26 का 77,821 करोड़ रुपये का लाभ FY 2023-24 के 80,986 करोड़ रुपये के लगभग बराबर है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) अकेले लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करती है और उसका सामान्य लाभ 20,000 से 30,000 करोड़ रुपये के बीच रहता है, जो लगभग 3 फीसदी मार्जिन है. तीनों तेल विपणन कंपनियों का संयुक्त ऑपरेटिंग मार्जिन 1 से 3 फीसदी के बीच बना रहता है, जिसे सामान्य परिचालन लाभ माना जाता है, न कि असामान्य मुनाफा.