इतिहास को भूलने का इतिहास; एस जयशंकर ने दिलाई US को लादेन की याद, अमेरिका-पाक के रिश्ते पर कह दी तीखी बात

जयशंकर ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान की सेना पर भरोसा किया, जबकि यही सेना ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादी को अपनी सरजमीं पर छुपने का मौका देती रही. उन्होंने 2011 की घटना का जिक्र किया जब बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में सेना की छावनी के पास से जिंदा पकड़ा गया.

S Jaishankar | PTI

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने अमेरिका और पाकिस्तान (Pakistan) के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका (US) जब-जब अपने राजनीतिक फायदे के लिए पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाता है, तब-तब वह अपने ही इतिहास को भूल जाता है. जयशंकर ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान की सेना पर भरोसा किया, जबकि यही सेना ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादी को अपनी सरजमीं पर छुपने का मौका देती रही. उन्होंने 2011 की घटना का जिक्र किया जब बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में सेना की छावनी के पास से जिंदा पकड़ा गया.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "इतिहास यही है कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हमेशा से यह अनदेखा करने का सिलसिला चलता आया है."

रूस से तेल खरीद को मुद्दा बनाकर पेश किया गया... ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी पर बोले एस जयशंकर.

सुविधा की राजनीति पर तीखी टिप्पणी

विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में समस्या तब आती है जब देश सुविधा की राजनीति करने लगते हैं. उन्होंने कहा, "कभी यह राजनीति सामरिक फायदे के लिए होती है, तो कभी आर्थिक लाभ के लिए. लेकिन इससे भरोसे और रिश्तों की गंभीरता पर असर पड़ता है."

भारत-रूस ऊर्जा संबंधों पर अमेरिका को जवाब

जयशंकर ने अमेरिका द्वारा भारत के रूस से तेल आयात पर सवाल उठाने पर भी पलटवार किया. उन्होंने कहा कि अगर भारत को रूस से तेल खरीदने पर आपत्ति है, तो फिर चीन और यूरोपीय संघ पर भी यही सवाल उठना चाहिए, क्योंकि वे भी सबसे बड़े खरीदार हैं.

पाकिस्तान मुद्दे पर भारत का स्पष्ट रुख

जयशंकर ने दो टूक कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने याद दिलाया कि यह भारत की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है और पिछले 50 सालों से यही रुख कायम है.

अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव

जयशंकर ने माना कि भारत और अमेरिका के बीच हाल के दिनों में कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं व्यापार और टैरिफ, रूसी तेल आयात और भारत-पाकिस्तान विवाद है. जिसमें अमेरिका बीच-बचाव की कोशिश करता रहा है.

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