एचसी ने बंगाल सरकार को चुनाव बाद हुई हिंसा पीड़ितों को राहत देने का निर्देश दिया
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दक्षिण कोलकाता के पुलिस उपायुक्त राशिद मुनीर खान के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया, जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम के दौरे के दौरान बाधाओं को रोकने में विफल रहे.
कोलकाता, 2 जुलाई : कलकत्ता उच्च न्यायालय (Kolkata High Court) ने शुक्रवार को दक्षिण कोलकाता के पुलिस उपायुक्त राशिद मुनीर खान के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया, जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम के दौरे के दौरान बाधाओं को रोकने में विफल रहे. टीम जादवपुर चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच करने जा रही थी. अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ितों को राहत प्रदान करने का भी निर्देश दिया. अदालत उस घटना का जिक्र कर रही थी जब चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा गठित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की तथ्यान्वेषी टीम पर जादवपुर इलाके में कुछ लोगों ने कथित तौर पर हमला किया था. समिति ने 30 जून को अपनी अंतरिम रिपोर्ट अदालत को सौंपी.
चुनाव के बाद की हिंसा पर राज्य के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए, कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार को चुनाव के बाद की हिंसा के संबंध में सभी शिकायतों को प्राथमिकी के रूप में मानने और उन सभी व्यक्तियों को राशन और चिकित्सा उपचार की व्यवस्था करने का निर्देश दिया, जो घायल हो गए थे. इसके अलावा, अदालत ने भाजपा कार्यकर्ता अविजीत सरकार के संबंध में एक दूसरा पोस्टमॉर्टम करने का भी आदेश दिया, जिनकी राज्य में चुनाव के बाद की हिंसा के मद्देनजर भीड़ द्वारा कथित रूप से हत्या कर दी गई थी. अदालत ने निर्देश दिया कि पोस्टमॉर्टम अलीपुर कमांड अस्पताल में करना होगा. एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभिजीत सरकार की कथित हत्या का संज्ञान लिया है. हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह मामले में कोई निर्देश नहीं दे रही है और उसने केवल दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश दिया है. यह भी पढ़ें : Jammu- Kashmir: पीडीपी प्रवक्ता एसएस बुखारी ने कहा, पीएम मोदी के साथ सर्वदलीय बैठक के बाद महबूबा मुफ्ती ने आज राजनीतिक हालात पर बैठक की
एसीजे राजेश बिंदल और जस्टिस आई.पी. मुखर्जी, हरीश टंडन, सौमेन सेन और सुब्रत तालुकदार की पांच सदस्यीय पीठ ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की एक समिति द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है. खंडपीठ ने कुछ क्षेत्रों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को भी नोटिस जारी किया है कि हिंसा को रोकने में विफल रहने पर उनके खिलाफ अवमानना का मामला क्यों न चलाया जाए. रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में दायर की गई थी और अदालत ने इसकी सामग्री का खुलासा करने या राज्य के वकील के साथ इसकी एक प्रति साझा करने से इनकार कर दिया था. इसने स्पष्ट किया कि 13 जुलाई को समिति की अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के बाद राज्य को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 02, 2021 03:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

