Google Drive Warning: गूगल ड्राइव पर आपत्तिजनक वीडियो स्टोर करना पड़ा भारी, कानपुर में आरोपी गिरफ्तार; क्लाउड स्टोरेज को न समझें निजी तिजोरी
कानपुर में गूगल ड्राइव पर बाल यौन शोषण से संबंधित अवैध सामग्री (CSAM) स्टोर करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है. यह मामला दर्शाता है कि तकनीकी कंपनियां क्लाउड स्टोरेज की सक्रिय निगरानी करती हैं और कैसे डिजिटल फुटप्रिंट्स अपराधियों को जेल पहुंचा सकते हैं.
Google Drive Warning: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गूगल ड्राइव पर महिलाओं और बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री (CSAM) स्टोर करने के आरोप में एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी गूगल के स्वचालित सुरक्षा सिस्टम (Automated Safety Systems) द्वारा संदिग्ध गतिविधि को फ्लैग करने के बाद हुई है. तकनीकी कंपनी से इनपुट मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा. यह मामला साफ तौर पर चेतावनी देता है कि इंटरनेट या क्लाउड स्टोरेज पर अपलोड की गई कोई भी अवैध सामग्री कानून की नजरों से छिपी नहीं है.
गूगल ने ऐसे पकड़ा आरोपी का डिजिटल सुराग
यह मामला कानपुर के चमनगंज इलाके का है. आरोपी ने अपने ही रिश्तेदारों और पड़ोस की लड़कियों के आपत्तिजनक वीडियो गुप्त रूप से रिकॉर्ड किए थे. इसके बाद उसने इन फाइलों को अपने गूगल ड्राइव अकाउंट पर अपलोड कर दिया. आरोपी ने पुलिस से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन से तो वीडियो डिलीट कर दिए थे, लेकिन वे फाइलें उसके क्लाउड स्टोरेज में बनी रहीं. गूगल के सुरक्षा स्कैनिंग टूल्स ने इन प्रतिबंधित फाइलों को तुरंत पहचान लिया और इसकी सूचना सरकारी एजेंसियों को दे दी.
अपर उप-आयुक्त (अपराध) अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को 6 जुलाई को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से एक अलर्ट प्राप्त हुआ था. यह अलर्ट महिलाओं और बच्चों से जुड़े एक गंभीर अपराध से संबंधित था. मामला सामने आते ही साइबर जांच टीमों को तैनात कर गोपनीय जांच शुरू की गई और कुछ ही दिनों में आरोपी को ट्रैक कर लिया गया.
डिजिटल फुटप्रिंट्स से बचना नामुमकिन
पुलिस के अनुसार, गूगल ने जांच में सहयोग करते हुए आरोपी से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी विवरण साझा किए. इसमें आरोपी का ईमेल अकाउंट, मोबाइल फोन का आईएमईआई (IMEI) नंबर, आईपी (IP) एड्रेस और अन्य डिजिटल पहचान शामिल थीं. इन पुख्ता सबूतों के आधार पर जांचकर्ताओं ने आरोपी के ठिकाने का पता लगाया और उसे गिरफ्तार कर लिया.
यह घटना स्पष्ट करती है कि किसी भी फाइल को केवल अपने डिवाइस से डिलीट कर देना काफी नहीं है. यदि वह डेटा क्लाउड बैकअप में मौजूद है, तो तकनीकी कंपनियां अपने डेटाबेस के आधार पर उसका मिलान करती हैं.
कैसे काम करता है कंपनियों का अलर्ट सिस्टम
गूगल ड्राइव जैसे प्लेटफॉर्म्स अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वाली सामग्री की पहचान करने के लिए स्वचालित सुरक्षा प्रणालियों का उपयोग करते हैं. जब भी कोई यूजर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) या अन्य प्रतिबंधित डेटा अपलोड करता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जेनरेट करता. ऐसे मामलों में कंपनी यूजर के अकाउंट को तुरंत सस्पेंड कर सकती है.
कानूनी आवश्यकताओं के तहत, ये कंपनियां ईमेल, आईपी एड्रेस और डिवाइस से जुड़ी जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करती हैं. इस मामले में भी नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) के माध्यम से साइबर टिपलाइन रिपोर्ट तैयार हुई थी, जिसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई की.
कड़े कानूनी प्रावधान और सजा
भारत में नाबालिगों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को स्टोर करना, शेयर करना या बनाना एक गंभीर संज्ञेय अपराध है. इस मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन वीडियो को अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी शेयर किया गया था. यदि ऐसा पाया जाता है, तो आरोपी पर अतिरिक्त धाराएं लगाई जाएंगी.
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऑनलाइन बाल शोषण या किसी भी साइबर अपराध से जुड़े मामलों की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर तुरंत दर्ज कराएं.